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Bipolar Disorder in Hindi: कुछ मानसिक बीमारियां ऐसी हैं, जिन्हें हम भारतीय लोग बीमारी समझते ही नहीं है। जबकि मानसिक बीमारियों के बारे में कहा जाता है, कि अगर उनका समय रहते ध्यान न दिया जाए तो वे जानलेवा स्थिति बन सकती हैँ। ऐसी ही एक बीमारी के बारे में हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं, जो दिखने में बहुत सामान्य होती है लेकिन अगर इसे लंबे समय तक इग्नोर किया जाए और ट्रीटमेंट के लिए जरूरी कदम न उठा जाएं तो यह स्थिति जानलेवा बन सकती है। हम बाइपोलर डिसऑर्डर की बात कर रहे हैं, जिसमें व्यक्ति का बार-बार मूड स्विंग होता है और यह स्थिति कई बार बहुत गंभीर होती है। लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर के बारे में अभी तक लोग इतना नहीं जानते हैं, जितना स्ट्रेस एंग्जायटी या डिप्रेशन के बारे में जानते हैं। जबकि बाइपोलर डिसऑर्डर का अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो यह गंभीर स्थिति में जा सकता है और मरीज को सुसाइडल थॉट भी आने लग सकते हैं। इस लेख में जानें क्या है बाइपोलर और इसे कंट्रोल कैसे करें।
सबसे पहले आपको समझना होगा कि बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है और इसें क्या होता है। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि इसमें मरीज के बार-बार मूड स्विंग होते हैं, लेकिन यह सिर्फ मूड स्विंग होना ही नहीं है। दरअसल, इसमें मूड चरम सीमा पर चला जा सकता है, जैसे या तो बहुत ज्यादा खुश या फिर बहुत ज्यादा दुखी होना। इसलिए यह एक कॉम्प्लेक्स मेंटल कंडीशन है और इसमें व्यक्ति अगर बहुत ज्यादा खुश होता है तो उसे बहुत ज्यादा ऊर्जा महसूस होने लगती है और वह एक्टिविटी करने लगता है। अगर व्यक्ति ज्यादा दुखी हो जाता है, तो ऐसे में निराशा इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि उसे खुदकुशी के विचार आने लगते हैं।
कुछ लोगों को अक्सर मूड स्विंग की समस्या होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह बाइपोलर का संकेत ही हो। वहीं ऐसा भी हो सकता है कि बार-बार हो रहे मूड स्विंग कहीं बाइपोलर का संकेत न हो और हम उसे सामान्य समझ कर इग्नोर करते रहें। ऐसी कंडीशन को सुनिश्चित कैसे किया जाए? दरअसल, बाइपोलर डिसऑर्डर में होने वाले मूड स्विंग की पहचान सबसे प्रमुख यही है कि इसमें होने वाले मूड स्विंग बहुत एक्सट्रीम लेवल पर होते हैं। मतलब व्यक्ति बिना किसी वजह के बहुत उदास या बहुत खुश दिखता है। मूड स्विं होने के कारण मरीजों में कुछ इस तरह के लक्षण देखे जा सकते हैं
दुख की खबर यह है कि बाइपोलर डिसऑर्डर का कोई परमानेंट इलाज नहीं है और अच्छी खबर यह है कि कुछ मरीजों में यह अपने आप परमानेंटली ठीक हो जाता है। हालांकि, कुछ दवाएं व थेरेपी आदि हैं, जिनकी मदद से इस समस्या के लक्षणों को कंट्रोल करके रखा जा सकता है। अगर दवाओं की मदद से मरीज के दिमाग को शांत रखा जाता है और बिहेवियरल थेरेपी की मदद से मरीज को ऐसी स्थिति को मैनेज करने का तरीका सिखाया जाता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।