बायोलॉजिकल उम्र vs रियल उम्र: इनमें क्या अंतर और कैसे पता चलेगा आपका शरीर कितना बूढ़ा हो चुका है?
उम्र सिर्फ हर साल जन्मदिन मनाने वाली नहीं है होती है बल्कि उम्र यह भी होती है कि आपका शरीर अपने आप को कितना बूढ़ा या जवान महसूस कर रहा है। इस लेख में हम बायोलॉजिकल एज और क्रोनोलॉजिकल एज के बारे में जानेंगे।
अगर आपको भी यही लगता है कि आपकी उम्र आपको बताती है कि आपका शरीर कितनी बूढ़ा हो चुका है या कितना जवान है तो शायद आप भी गलत सोच रहे हैं। उम्र भी दरअसल, दो अलग-अलग तरह की होती है बायोलॉजिकल उम्र और क्रोनोलॉजिकल उम्र अगर आप इसे थोड़ा आसान भाषा समझना चाहते हैं को बायोलॉजिकल उम्र को जैविक उम्र कह सकते हैं और क्रोनोलॉजिकल उम्र का मतलब है जो आपकी असली उम्र है। लेकिन इन दोनों में अंतर क्या है और इनमें से कौन सी उम्र बताती है कि आपका शरीर कितना बूढ़ा हो चुका है। इस बारे में ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विनीता सिंह टंडन से बात की जिसके बारे में हम आपको कुछ खास जानकारी इस लेख में देने वाले हैं।
बायोलॉजिकल और क्रोनोलॉजिकल उम्र को समझें
असली उम्र यानी क्रोनोलॉजिकल उम्र का कॉन्सेप्ट तो बहुत सीधा और सिंपल होता है, जैसे 30 साल पहले जन्मे व्यक्ति की उम्र 30 साल ही होती है। लेकिन बायोलॉजिकल उम्र का हिसाब इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपको जन्म लिए हुए कितना समय हो गया बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि एक स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में आपका शारीरिक स्वास्थ्य कैसा है। एक 30 साल के व्यक्ति की उम्र 35 या 25 भी हो सकती है, जो आमतौर पर उसकी हेल्थ, फिटनेस और मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है।
इन दोनों का अंतर समझें
वैसे तो बायोलॉजिकल और क्रोनोलॉजिकल दोनों के बारे में जानकर आप इनके बीच का अंदर भी समझ गए होंगे कि रियल उम्र कैलेंडर के अनुसार होती है जो आपके जन्म के दिन से से शुरु हो जाती है। वहीं बायोलॉजिकल उम्र आपके शरीर की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है और बताती है कि आपके अंग, मांसपेशियां, हृदय, फेफड़े, दिमाग और कोशिकाओं के बूढ़े होने की गति सामान्य से कम है, ज्यादा है या फिर सामान्य ही है।
चलिए इसको एक उदाहरण के रूप में समझते हैं, कि 30 की उम्र के दो लोग हैं। लेकिन उनमें से एक नियमित व्यायाम करता है, संतुलित भोजन खाता है और तनाव को नियंत्रित रखता है। दूसरा व्यक्ति धूम्रपान करता है, नींद पूरी नहीं लेता और शारीरिक गतिविधि कम करता है। ऐसे में जिसका लाइफस्टाइल अच्छा है उसकी बायोलॉजिकल उम्र 27 से 30 हो सकती है और वहीं जिसका लाइफस्टाइल अच्छा नहीं है उसकी बायोलॉजिकल उम्र 40 या उससे भी कहीं ज्यादा हो सकती हैं।
कैसे पता चलेगा कि शरीर समय से पहले बूढ़ा हो रहा है?
हमारा शरीर अलग-अलग तरह से कई संकेत देता है, जो बताते हैं कि हमारी एजिंग प्रोसेस यानी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया सामान्य से तेज हो रही है यानी हम तेजी से बूढ़े हो रहे हैं। इनमें से कुछ लक्षण निम्न हो सकते हैं -
- जल्दी थकान महसूस होना
- सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी
- मांसपेशियों की ताकत कम होना
- बार-बार बीमार पड़ना
- पहले की तुलना में याददाश्त कमजोर होना
इस तरह के संकेत अगर आपको समय से पहले दिखने लगे हैं, तो यही संकेत है कि आपकी एजिंग प्रोसेस तेज हो रही है और आपको जल्द से जल्द इस बारे में कुछ करना चाहिए। खैर! जो हमने ऊपर बताए वे संकेत आमतौर पर ऐसे संकेत हैं जो आपको खुद ज्यादा महसूस होंगे, लेकिन शारीरिक रूप से दिखे वाले भी कुछ संकेत हो सकते हैं जो आपको नहीं बल्कि दूसरों को भी आपकी बायोलॉजिकल उम्र वास्तविक उम्र से ज्यादा होने का संकेत देते हैं और ये संकेत कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -
- पेट के आसपास लगातार चर्बी बढ़ना
- ब्लड प्रेशर का बढ़ना
- ब्लड शुगर का बढ़ना
- कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन
- नींद की खराब गुणवत्ता
- त्वचा का समय से पहले ढीला पड़ना
- जोड़ों में दर्द और अकड़न
- लंबे समय तक तनाव और चिंता रहना
हालांकि, इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि ये संकेत आमतौर पर आपकी सटीक बायोलॉजिकल उम्र नहीं बताते लेकिन शरीर की बढ़ती उम्र के महत्वपूर्ण संकेत जरूर हो सकते हैं।
बायोलॉजिकल उम्र को कैसे मापें?
आपको सिर्फ अपनी कैलेंडर वाली उम्र का ध्यान नहीं रखना है बल्कि उसके साथ-साथ इस बात का ध्यान भी रखना है कि आपकी बायोलॉजिकल उम्र कितनी हो गई है। क्योंकि उससे ही आपके स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक निम्न तरीकों से बायोलॉजिकल एज का पता लगाने में मदद मिल सकती है -
- शारीरिक फिटनेस - आप शारीरिक रूप से कितने फिट हैं, यह आपकी बायोलॉजिकल एज बताने वाला सबसे बड़ा फैक्टर है। आपके चलने की गति, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन और सहनशक्ति शरीर की उम्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।
- ब्लड टेस्ट - आपके खून की जांच करके भी आपकी बायोलॉजिकल एज का पता लगाया जा सकता है, जिसमें ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, इन्फ्लेमेशन के स्तर और स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाया जा सकता है जो आपकी हेल्थ कंडीशन के बारे में बताती हैं।
- हृदय और फेफड़ों की क्षमता - आपकी कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ आपकी बायोलॉजिकल एज बताने वाले सबसे प्रमुख तरीकों में से एक है। आपकी रियल उम्र के अनुसार आपका दिल और फेफड़े कितने अच्छे से काम कर पा रहे हैं उससे आपकी बायोलॉजिकल एज का पता चलता है।
- शारीरिक संरचना - आपके शरीर में कितनी चर्बी है और आपका मसल मास (यानी आपकी मांसपेशियां कितनी मजबूत हैं) क्या है, आदि पर निर्भर करता है कि आपका शरीर कितने अच्छे से काम कर पा रहा है। इन दोनों का अनुपात आपकी बायोलॉजिकल एज को बताने में मदद करता है।
- नई टेक्नोलॉजी वाले टेस्ट - आज के समय में मेडिकल साइंस काफी एडवांस हुआ है और कुछ एडवांस टेस्ट कोशिकाओं और डीएनए पर अध्ययन करते हैं लेकिन अभी तक इसे क्लिनिकल जरूरतों के अनुसार ही इस्तेमाल किया जाता है और आम लोगों को इस्तेमाल के लिए अभी ये टेस्ट उपलब्ध नहीं है।
बायोलॉजिकल उम्र बढ़ाने वाली आदतें
हमारी रियल उम्र बढ़ना हमारे हाथ में नहीं होता है, क्योंकि वह समय और कैलेंडर के अनुसार चलता है लेकिन हमारी बायोलॉजिकल उम्र हमारे कंट्रोल में जरूर होती है। हमारे द्वारा की जाने वाली कुछ आदतें हैं, जिनके कारण बायोलॉजिकल उम्र बढ़ने लगती है -
- धूम्रपान और तंबाकू का सेवन
- अत्यधिक शराब का सेवन
- लंबे समय तक तनाव
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- जंक फूड और प्रोसेस्ड भोजन का अधिक सेवन
- पर्याप्त नींद न लेना
- मोटापा
- अनियंत्रित डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
ये सभी कारक शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे बायोलॉजिकल उम्र तेजी से बढ़ सकती है।
अपनी बायोलॉजिकल उम्र को कम कैसे रखें?
जैसा कि हमने आपको ऊपर बोला है कि आप अपनी बायोलॉजिकल एज को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं और उसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना है जैसे -
- नियमित व्यायाम - रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, साइकिल चलाना, योग या कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को लंबे समय तक युवा बनाए रखने में मदद करता है।
- संतुलित भोजन करना - अपनी डाइट में हेल्दी चीजों का शामिल करें जैसे साबुत अनाज, सब्जियां, फल, दालें, ड्राई फ्रूट्स व सीड्स आदि। साथ ही ध्यान रखें कि आप प्रोटीन पूरा ले रहे हैं या नहीं।
- पर्याप्त नींद लें - डाइट के साथ-साथ नींद भी बहुत जरूरी है और अगर आपको अपनी बायोलॉजिकल एज को कंट्रोल करना है तो आपके लिए जरूरी है कि आप अपना स्लीप शेड्यूल सही करें।
- तनाव को नियंत्रित करें - स्ट्रेस आपको जल्दी बूढ़ा बनाने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण कारण है, इसलिए स्ट्रेस को मैनेज करना बेहद जरूरी है। ध्यान लगाना, योग करना, गहरी सांसे लेना और अपने परिवार वालों व दोस्तों के साथ समय बिताना स्ट्रेस कंट्रोल कर सकता है।
- नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं - नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराते रहना भी बेहद जरूरी है, ताकि ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल आदि को निगरानी में रखा जा सके और अन्य किसी बीमारी के गंभीर होने से पहले ही उसका पता लगाया जा सके।
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच करवाने से बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा सकता है और उन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. विनीता ने आगे बताया कि जब शारीरिक स्वास्थ्य की बात आती है, तो यह बात सिर्फ सुनने में ही अच्छी लगती है कि उम्र तो बस एक नंबर है। क्योंकि उम्र सिर्फ कैलेंडर पर लिखी संख्या नहीं है, बल्कि आपके शारीरिक और यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य में भी यह एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आपका शरीर अंदर से कितना स्वस्थ यह यही आपकी बायोलॉजिकल उम्र है। नियमित रूप से सही डाइट लेना, नियमित एक्सरसाइज करना, समय पर पूरी नींद लेना और स्ट्रेस को मैनेज करना अपनी बायोलॉजिकल उम्र को कंट्रोल करने के लिए बेहद जरूरी है ताकि आपका शरीर लंबे समय तक हेल्दी और युवा रहे।
हर व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वे अपनी उम्र को कैलेंडर पर गिनना छोड़कर बल्कि इस बात पर भी ध्यान दें कि उनका स्वास्थ्य कैसा महसूस कर रहा है और उनकी जीवनशैली कैसी है। ताकि वे एक अच्छा और बेहद जीवन जी सकें और समय से पहले उनका शरीर बूढ़ा न हो पाए।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल बायोलॉजिकल उम्र और असली उम्र के बारे में कुछ जरूरी जानकारी देना है। हालांकि, इसमें दी गई जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।