... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Updated : November 17, 2017 3:06 PM IST
अब सिर्फ दवाइयों से ही नहीं, बल्कि संगीत द्वारा भी बहुत सी बीमारियों का इलाज किया जाने लगा है। कई रोगों के इलाज के लिए म्यूजिक थेरेपी का एक वैकल्पिक रूप में इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि संगीत दिमाग की चोटों को ठीक कर सकता है और कैंसर के रोगियों के लिए भी लाभकारी साबित होता है। इतना ही नहीं अगर सीओपीडी और अन्य पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियों के मरीजों को दवाओं के साथ-साथ म्यूजिक थेरेपी भी दी जाए, तो उन्हें काफी फायदा हो सकता है। बैंगलोर स्थित फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर विवेक आनंद पाडेगल आपको बता रहे हैं कि म्यूजिक थेरेपी से सीओपीडी के मरीजों को कैसे फायदा हो सकता है।
म्यूजिक से सीओपीडी के मरीजों को कैसे मदद मिलती है?
जब आप फ्लूट या ट्रॉम्बोन जैसा कोई वाइंड इंस्ट्रूमेंट बजाते हैं, तो इसमें श्वसन प्रक्रिया में मदद करने वाली मांसपेशियां काम करती हैं। डॉक्टर के अनुसार, जब सीओपीडी से पीड़ित कोई व्यक्ति म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाता है या गाता है, तो छाती की श्वसन मांसपेशियों, डायाफ्राम और पेट व छाती के बीच की प्रमुख मांसपेशियों पर असर पड़ता है। यहां तक कि गाने से भी ऐसे मरीजों को फायदा होता है क्योंकि इससे उन्हें सांस की कमी से निपटने में मदद मिलती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गाना अपने आपमें एक ब्रीदिंग एक्सरसाइज है। कई बार इससे मरीजों के मूड में भी सुधार होता है क्योंकि सीओपीडी के मरीज अक्सर तनाव या चिंता से परेशान रहते हैं।
कौन-सा इंस्ट्रूमेंट सही काम करता है?
डॉक्टर के अनुसार, वाइंड इंस्ट्रूमेंट से चेस्ट मसल्स और डायाफ्राम की ट्रेनिंग होती है, जोकि सांस लेने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सीओपीडी से पीड़ितों के लिए बांसुरी, ट्रॉम्बोन, ट्रम्पट, शहनाई, बैसून, सैक्सोफोन्स या ट्यूबा जैसे कोई भी वाइंड इंस्ट्रूमेंट बेहतर काम करते हैं। लेकिन डॉक्टर के अनुसार हार्मोनिका या माउथ ऑर्गन सबसे बेहतर होता है। हार्मोनिका रोगियों को फेफड़ों में और बाहर पर्याप्त हवा में मदद करता है। डॉक्टर के अनुसार, जब मरीज हार्मोनिका बजाता है, तो इससे गहरी सांस लेने और छोड़ने में मदद मिलती है। इससे सांस लेने की मांसपेशियों की कसरत होती है और वो मजबूत बनती हैं।
म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने के फिजिकल लाभ क्या हैं?
चूंकि श्वसन की मांसपेशियां म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने में सीधे रूप से शामिल होती हैं, इसलिए इससे सीओपीडी रोगियों को मसल्स को ट्रेन और स्ट्रोंग करने में मदद मिलती है, जिससे उन्हें बेहतर सांस लेने में मदद मिलती है। इसके अलावा, सीओपीडी वाले व्यक्तियों में बीमारी और चिंता के कम होने के साथ उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया है।
इन बातों का रखें ध्यान
किसी भी इंस्ट्रूमेंट को किसी एक्सपर्ट की देखभाल में बजाना चाहिए। इसका इस्तेमाल दवा के रूप में नहीं करना चाहिए बल्कि उपचार कराते रहना चाहिए। इसके अलावा अपनी जीवनशैली का ख्याल रखें। स्मोकिंग से बचें, डायट का ध्यान रखें और कुछ ना कुछ फिजिकल एक्टिविटी करते रहें।
Read this in English
अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock