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दिन में कितना पाद (fart) मारना है नार्मल? कैसे पहचानें पाद मारना कब बन रहा सेहत के लिए खतरनाक
अगर आप किसी समूह में बैठे हैं और अचानक से कोई पाद (farting) मार दे तो निश्चित है कि आपको बदबू के साथ-साथ गुस्सा आएगा। कभी-कभार पाद मारने वाला व्यक्ति हंसी का भी पात्र बन जाता है। लेकिन एक बात जान लीजिए कि पाद मारना बिल्कुल सामान्य है और इसे आपके हेल्दी होने का संकेत माना जाता है। आइए जानते हैं क्यों पाद मारना है हेल्दी और कितना पाद मारना होता है नार्मल।
पाद यानी की पेट की गैस, जो हमारे पाचन क्रिया और सांस लेनेके कारण छोटी आंत में बनती है। अक्सर जब भी आप कुछ खाते हैं, चबाते हैं या फिर निगलते हैं तो आप थोड़ी मात्रा में हवा भी निगल जाते हैं, जो आपके पाचन तंत्र में समा जाती है। हां, कुछ हवा अवशोषित हो जाती है तो कुछ हवा आप डकार के माध्यम से और कुछ हवा पाद के रूप में छोड़ते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि पाद मारना हेल्दी होता है क्योंकि ऐसा करने से आपके शरीर को पेट में बनी ज्यादा गैस को बाहर निकालने में मदद मिलती है नहीं तो आप असहजता और कभी-कभार दर्द भी महसूस कर सकते हैं।
एक व्यक्ति औसतन दिन में 14 से 23 बार पाद मारता है। हालांकि ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खा रहे हैं और किस प्रकार की जीवनशैली जी रहे हैं, जिसकी वजह से आपको ज्यादा या कम पाद आता है। ज्यादातर पाद बदबूरहित होते हैं और इसका कोई संकेत भी नहीं होता है। लेकिन कुछ कारक हैं, जिनकी वजह से बदबू आती है और उनमें आवाज आती है।
ऐसा कहा जाता है कि दिन में 25 बार तक पाद मारना बिल्कुल सामान्य होता है। हालांकि इससे ज्यादा गैस पास करनेको बहुत ज्यादा माना जाता है। अगर आप सामान्य के मुकाबले ज्यादा पाद मार रहे हैं तो यह पेट फूलने, सूजन व दर्द और डकार जैसे लक्षणों के साथ आपको परेशान कर सकता है।
अगर आप जरूरत से ज्यादा पाद मार रहे हैं तो ये कोई चिंता की बात नहीं है। हालांकि अगर आपको ये महसूस हो रहा है कि आप असमान्य रूर से पाद मार रहे हैं और आपको दर्द के साथ डकार और पेट फूलने की समस्या भी हो रही है तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलने की जरूरत है।
पाद मारने का संबंध आंतों के स्वस्थ होने से जुड़ा हुआ है और इसके कई फायदे हैंः
1-पेट दर्द और पेट फूलने को कम करता है।
2-डाइट के हेल्दी और संतुलित होने का पता लगाता है।
3-आंतों को स्वस्थ बनाता है।
4-फूड एलर्जी और गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
5-कई स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती संकेत हो सकता है।