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समय पर ब्रश न बदलने पर हो सकती हैं ये बीमारियां, जानें कब व कितने समय में बदल देना चाहिए ब्रश

Changing toothbrush: हमारा शारीरिक स्वास्थ्य हमारे मुंह के देखभाल पर टिका होता है और अगर हम हमारे मुंह का ध्यान नहीं रख पाते हैं, तो इसका मतलब है कि कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे समय पर ब्रश बदलना भी जरूरी है।

समय पर ब्रश न बदलने पर हो सकती हैं ये बीमारियां, जानें कब व कितने समय में बदल देना चाहिए ब्रश

Written by Mukesh Sharma |Updated : November 27, 2024 4:11 PM IST

Why changing your brush on time in important in hindi: दांतों को स्वस्थ रखना न केवल अच्छी मौखिक स्वच्छता, बल्कि समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक है। दांत हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे भोजन चबाना, बोलने में सहायता करना और चेहरे की सुंदरता बनाए रखना। यदि दांत स्वस्थ नहीं हैं, तो इससे कई शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। इन दांतों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं टूथब्रश। तो वहीं टूथब्रश का सही तरीके से इस्तेमाल और समय-समय पर उसे बदलना दांतों और मसूड़ों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। नहीं तो दांतों में जमा प्लाक और बैक्टीरिया मसूड़ों की बीमारियां, दांत सड़ने और कैविटी का कारण बन सकते हैं। ये संक्रमण खून के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों, जैसे हृदय और फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इसलिए, दांतों को स्वस्थ रखना पूरे शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसलिए आपको जाना चाहिए कि आपको कितने समय में अपना टूथब्रश बदलना है और ऐसा न करने पर आपके दांतों को क्या नुकसान हो सकता है।

टूथब्रश बदलने की समय सीमा

डेंटल एसोसिएशन और ओरल हाइजीन विशेषज्ञों के अनुसार, हर 3 महीने में टूथब्रश बदलने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कुछ लोग इससे जल्दी भी टूथब्रश बदल सकते हैं, जैसे:

  • टूथब्रश के ब्रिसल्स के घिसने के साथ, उसकी सफाई की क्षमता घट जाती है, जिससे दांतों की सफाई सही तरीके से नहीं हो पाती। इसलिए, समय पर टूथब्रश बदलना दांतों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
  • अगर कोई बीमारी जैसे सर्दी, फ्लू या मुंह के संक्रमण के बाद इसे बदलने की जरूरत हो सकती है, ताकि बैक्टीरिया या वायरस से बचा जा सके।

टूथब्रश न बदलने के 4 नुकसान

1. दांतों की सफाई में कमी

अगर टूथब्रश पुराना हो जाता है और ब्रिसल्स घिस जाते हैं, तो वह दांतों के बीच की जगह और कोनों को सही तरीके से साफ नहीं कर पाता। इससे दांतों पर प्लाक (गंदगी और बैक्टीरिया का जमाव) जमा होता है, जो कैविटी (दांत सड़ना) और गम रोग (मसूड़ों की बीमारी) का कारण बन सकता है। प्लाक का समय पर हटाना जरूरी होता है, क्योंकि यह सख्त होकर टार्टर (टूथ स्टोन) में बदल सकता है, जिससे दांतों की सफाई और भी कठिन हो जाती है।

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2. मसूड़ों की समस्याएं

पुराने और घिसे हुए ब्रिसल्स मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जब ब्रिसल्स कठोर और घिसे हुए होते हैं, तो वे मसूड़ों से रगड़कर उन्हें सुजा सकते हैं या रक्तस्राव करवा सकते हैं। इससे मसूड़ों की सूजन (जिंजीवाइटिस) और दांतों के झड़ने (पेरियोडोंटाइटिस) जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

3. मुंह में बदबू

एक पुराना टूथब्रश दांतों की सफाई सही तरीके से नहीं कर पाता, जिससे मुंह में बैक्टीरिया का जमाव बढ़ जाता है। बैक्टीरिया मुंह में दुर्गंध उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे आपको खराब सांस की समस्या हो सकती है। बैक्टीरिया के कारण मुंह में संक्रमण और सूजन भी हो सकती है।

4. संक्रमण का खतरा

टूथब्रश पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जमा हो सकते हैं, खासकर जब वह गीला रहता है या उसका सही तरीके से रखरखाव नहीं किया जाता। यदि आप टूथब्रश को लंबे समय तक नहीं बदलते, तो वह बैक्टीरिया का स्रोत बन सकता है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर अगर आपने फ्लू, सर्दी, या किसी अन्य संक्रमण के बाद उसी टूथब्रश का इस्तेमाल किया, तो इससे बीमारी का पुनरावृत्ति हो सकती है।

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सही देखभाल और आदतें

  • 3 महीने में एक बार टूथब्रश बदलें।
  • बीमार होने के बाद तुरंत टूथब्रश बदलें।
  • टूथब्रश को गीला रखने से बचें और उसे अच्छे से सूखा कर रखें।
  • सही तकनीक से ब्रश करें, ताकि ब्रिसल्स ज्यादा देर तक सही बने रहें।