... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Yogita Yadav | Published : August 9, 2019 4:17 PM IST
Use of over-the-counter diet pills or can have severe health consequences, including high blood pressure and liver and kidney damage. © Shutterstock
नींद हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी है। अगर हम डीप स्लीप नहीं ले पाते हैं तो कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। तनाव के बढ़ते जाने और शारीरिक श्रम के घटते जाने के कारण आजकल लोगों को नींद ठीक तरह से नहीं आती है। इसके लिए कुछ लोग नींद की गोलियां (Sleeping pills hazards) लेने लगते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि हर रोज नींद की गोली (Sleeping pills hazards) लेना आपके स्वास्थ्य लिए कितना बड़ा जोखिम खड़ा कर देता है। वैज्ञानिकों का तो यहां तक मानना है कि लंबे समय तक नींद की गोलियां लेने से ब्रेन हेल्थ को नुकसान पहुंचता है। जिससे डिमेंशिया का खतरा हो सकता है।
जब हम मानसिक तौर पर तो थक जाते हैं, पर शारीरिक तौर पर नहीं थकते तब हमारा शरीर नींद के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाता। असल में हमारे शरीर के भीतर ही कुछ ऐसे रसायन होते हैं, जो मस्तिष्क को नींद के संकेत देते हैं। जब ये संदेश मस्तिष्क तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाते हैं तो चाहकर भी हमें नींद नहीं आती। बिस्तर पर जाने के घंटों बाद भी हमें नींद नहीं आ पाती।
वहीं दूसरी ओर कई बार तनाव के कारण शरीर विपरीत तरीके से रिएक्ट करता है। तनाव बढ़ाने वाला कार्टिसोल हार्मोन मस्तिष्क को शरीर की आवश्यकता के विपरीत संदेश देता है। ऐसी स्थिति में भी हम करवट बदलते रहते हैं, पर नींद नहीं आ पाती। नींद की आवश्यकता को देखते हुए डॉक्टर कभी-कभार नींद की गोलियां लेने की सलाह देते हैं। पर धीरे-धीरे इन गोलियों पर निर्भरता बढ़ने लगती है। एक स्थिति ऐसी भी आती है जब नींद की गोलियों के बगैर हम सो ही नहीं पाते। परंतु इसके शरीर पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव होते हैं।
न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक शोध में यह पाया गया कि 65 की उम्र पार कर चुके 10 प्रतिशत लोग ऐसे जिन्हें लगता है कि वे डिमेंशिया के शिकार हैं वास्तव में वह नींद की गोलियों के साइड इफैक्ट से जूझ रहे होते हैं। लंबे समय तक इस तरह की गोलियों पर निर्भरता उनमें मनोभ्रंश अर्थात डिमेंशिया और अल्जाइमर का भी जोखिम बढ़ा देती है।
शहरी अधेड़ उम्र लोगों में होने लगी है इस जरूरी विटामिन की कमी, हो जाएं सावधान!