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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 17, 2022 2:17 PM IST
डायबिटीज रोगियों में कोविड का खतरा कम करती है ये वैक्सीन! स्टडी में दावा लंबे वक्त तक मिल सकती है रोगियों को सुरक्षा
मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (MGH) के शोधकर्ताओं ने सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन नाम की पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में ये दावा किया है कि Bacillus Calmette-Guerin यानी की BCG वैक्सीन की दो डोज कोविड और दूसरी संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान कर सकती है। बता दें कि ये शोध महामारी की शुरूआत में शुरू हुआ था।
कोविड महामारी की शुरुआत में टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों पर ये अध्ययन किया गया था, जिसमें प्लेसेबो का इस्तेमाल हुआ था। शोधकर्ताओं ने पाया कि करीब 12.5 फीसदी प्लेसेबो से इलाज हुए मरीज और 1 फीसदी बीसीजी से उपचारित मरीजों में कोविड की पुष्टि हुई, जिससे ये पता चलता है कि वैक्सीन 92 फीसदी तक प्रभावी है।
जिस समूह को बीसीजी वैक्सीन लगाई गई थी उस समूह में दूसरे संक्रामक रोगसे भी सुरक्षित प्रभाव देखा गया। इन संक्रामक बीमारियों के शिकार लोगों में कम लक्षण, बीमारी की कम गंभीरता और कम बीमारियों का खतरा देखा गया। इसके अलावा मरीजों में बीसीजी वैक्सीन का कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं पाया गया है।
बीसीजी से मिलने वाली व्यापक संक्रमण सुरक्षा से ये पता चलता है कि ये वैक्सीन न सिर्फ कोविड से बल्कि भविष्य में आने वाले कोरोनावायरस के नए वेरिएंट और दूसरे रोगाणुओं से भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि ये नतीजे टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों पर बीसीजी वैक्सीन के प्रभाव को लेकर बड़ी स्टडी के लिए प्रेरित करेंगे। बता दें कि डायबिटीज रोगी, कोविड के सबसे संवेदनशील समूहों में से एक माने जाते हैं। मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल की इम्यूनोबायॉलोजी के निदेशक और एमडी, पीएचडी डेनिस फॉस्टमैन का कहना है कि पहले भी कई अध्ययन हो चुके हैं, जिसमें ये साफ हो चुका है कि टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में कोविड के गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा बहुत ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि महामारी की शुरुआत से पहले बीसीजी वैक्सीनकी तीन डोज संक्रमण और कोविड व अन्य संक्रामक रोग के गंभीर लक्षणों को सीमित करने का काम करती है। मौजूदा वक्त में कोविड को रोकने के लिए एंटीजन विशिष्ट वैक्सीन से अलग बीसीजी वैक्सीन सिर्फ एक विशेष वायरस या इंफेक्शन के खिलाफ काम करने के लिए बाध्य नहीं है।
लंडन स्कून ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिक्ल मेडिसिन की प्रोफेसर हेजल डॉकरेल का कहना है कि अध्ययन से सामने आए निष्कर्ष इस विचार का समर्थन करते हैं कि बीसीजी वैक्सीन को क्लीनिकल प्रभाव के लिए वक्त की जरूरत है लेकिन इसके प्रभाव लंबे वक्त तक सुरक्षा प्रदान करने में प्रभावी होंगे। बता दें कि ये शोधकर्ता इस अध्ययन में आधाकारिक रूप से शामिल नहीं हैं।