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Barley Atta For Diabetes: इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (International Diabetes Federation) के मुताबिक भारत में 7 करोड़ से ज्यादा की आबादी डायबिटीज से ग्रसित है। यह आंकड़े वर्ष 2020 के हैं, जो बताते हैं की डायबिटीज (Type 2 Diabetes) किस तरह से भारत को खोखला कर रहा है। यहां की जनता को अपनी चपेट में ले रहा है। यह बीमारी कोई आम बीमारी नहीं यह आजीवन रहने वाली एक स्थिति है जिसमें व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) बढ़ता और घटता है ऐसी स्थिति में व्यक्ति का जीवन बहुत ही कठिन बन जाता है।
आमतौर पर डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के साथ अग्नाशय से इंसुलिन (Insulin) नामक हार्मोन का उत्पादन कम या बंद हो जाता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद शर्करा या ग्लूकोस ऊर्जा में नहीं बदल पाता है, ऐसी स्थिति में शरीर में कई बदलाव देखने को मिलते हैं, जैसे- थकान, भूख न लगना, बार-बार पेशाब आना, मुंह का सूखापन, बार-बार प्यास लगना और शरीर कमजोर होना इत्यादि।
डायबिटीज के कारण (Diabetes Causes) और भी कई बीमारियां शरीर में घर करने लगती हैं जैसे हृदय रोग, डायबिटिक रेटिनोपैथी, किसी घाव का लंबे समय तक ठीक ना होना जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी में ब्लड शुगर को नियंत्रित करना इंसान के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, हालांकि सही खानपान और नियमित एक्सरसाइज से ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखा जा सकता है कई बार सही खानपान और तनाव मुक्त जीवन शैली अपनाकर इंसान डायबिटीज को मात भी दे सकता है।
डायबिटीज को मात देने के लिए करीब 2800 साल पहले चरक ऋषि ने कुछ आहार की पहचान की थी उस दौर में दवा के तौर पर इन्हीं खाद्य पदार्थों का सेवन कर डायबिटीज पर नियंत्रण रखा जाता था इस बात का खुलासा एक रिसर्च में सामने आया है
Researchgate.Net में छपे एक लेख के मुताबिक, जौ का आटा (Barley Atta In Hindi) डायबिटीज पेशेंट के लिए किसी रामबाण औषधि से कम नहीं है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो यानी कम होने के कारण ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है। इसलिए इसे दवा के रूप में माना गया है। महर्षि चरक ने 2800 साल पहले लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड (Low Glycemic Index Food) के तौर पर पहचान की थी। इसके अतिरिक्त जौ को शहद, त्रिफला और सिरके के साथ सेवन करने से किडनी में किसी तरह की समस्या उत्पन्न नहीं होती है यानी यह किडनी को भी स्वस्थ रखता है।
सबसे पहले जौ को पीस कर उसका आटा बनाने आप आटे की रोटी बना कर खा सकते हैं, इसे सत्तू (Sattu Ka Atta) के रूप में भी नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं। यह आपका पाचन तंत्र भी मजबूत रखेगा साथ ही वजन को भी नियंत्रित रखेगा। डायबिटीज रोगी जौ के जैसे अन्य लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स आहार को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, इससे उनका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहेगा इसके साथ ही नियमित योगाभ्यास एक्सरसाइज और तनाव मुक्त जीवन शैली अपनाकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।