कैसे पीठ का मामूली दर्द भी रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर का संकेत हो सकता है? स्पाइन सर्जन से जानें
रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कोर्ड हमारे शरीर के सबसे क्रिटिकल हिस्सों में से एक है और कई बार पीठ का दर्द जिसे हम आम समझ लेते हैं वह स्पाइनल ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है। इस लेख में हम इसी बारे में जानेंगे।
आजकल डेस्क जॉब ज्यादा हो गई हैं और काम इतना ज्यादा है कि कुछ लोग तो शिकायत करते हैं कि उनके पास तो खड़े होकर एक मिनट के लिए स्ट्रेच करने का भी समय नहीं है। हालांकि, वे तो बहाना मार रहे होते हैं, लेकिन यह सच हैं कि आजकल लोगों का लाइफस्टाइल काफी बिजी हो गई है और इस कारण से लोगों को छोटी-मोटी समस्या रहने लगी हैं जैसे पीठ दर्द। पीठ दर्द की समस्या हर उम्र के लोगों को होती है। लंबे समय तक बैठे रहने, खराब शारीरिक मुद्रा में बैठने, या दैनिक तनाव के कारण पीठ दर्द हो सकता है। ज्यादातर मामलों में यह थोड़े से आराम या साधारण इलाज से अपने आप ठीक भी हो जाता है। लेकिन कई बार यही सामान्य पीठ दर्द रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है इसलिए इसे हर बार सामान्य समझकर नहीं टालना चाहिए।
पीठ का दर्द अलग लंबे समय से है, लगातार बढ़ रहा है या फिर दर्द वाले हिस्से में असामान्य रूप से सूजन बढ़ने लगी है तो यह अच्छा संकेत नहीं है क्योंकि रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर यानी स्पाइनल ट्यूमर की शुरूआत में भी कुछ इस तरह के ही लक्षण देखे जाते हैं। कुछ मामलों में पीठ का दर्द स्पाइनल ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसे नजरंदाज बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है।डॉ. अनुराग सक्सेना, क्लस्टर हेड, दिल्ली एनसीआर, न्यूरोसर्जरी एवं सीनियर स्पाइन सर्जन
स्पाइनल ट्यूमर क्या है?
ट्यूमर में ऊतकों की असामान्य वृद्धि होने लगती है और इसलिए स्पाइनल ट्यूमर में भी रीढ़ की हड्डी के अंदर या उसके आसपास ऊतक असामान्य रूप से बढ़ने लग जाते हैं। इससे स्पाइनल कॉर्ड और उसके नजदीक स्थित नसों के सामान्य कार्य पर असर पड़ता है, जिससे चलने-फिरने, महसूस करने और तालमेल बनाने की क्षमता प्रभावित होती है। इन स्थितियों की गंभीरता आमतौर पर ट्यूमर के आकार, वह किस जगह पर बन रहा है और साथ ही ट्यूमर से तंत्रिकाएं कितनी ज्यादा प्रभावित हुई हैं।
स्पाइन या स्पाइनल कॉर्ड में बनने वाले ट्यूमर प्राइमरी स्पाइनल ट्यूमर कहलाते हैं और अगर ट्यूमर शरीर के किसी अन्य हिस्से से स्पाइन तक फैला है तो उसे मेटास्टेटिक या सेकेंडरी स्पाइनल ट्यूमर कहते हैं। स्पाइनल ट्यूमर स्पाइन के अलग-अलग हिस्सों में विकसित हो सकते हैं। स्पाइनल कॉर्ड, उसे कवर करने वाली मेम्ब्रेन, इन मेंब्रेन के बीच के हिस्से और स्पाइनल बोन्स या वर्टिब्रा में यह ट्यूमर बन सकते हैं।
कैसे पता लगाएं पीठ का दर्द असामान्य है
पीठ में होने वाला दर्द आमतौर पर थकान, दिनभर बैठे रहने की आदत या फिर लाइफस्टाइल से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याओं का संकेत होता है। लेकिन रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर भी शुरुआत में पीठ में दर्द जैसे संकेत देता है, तो ऐसे में कैसे पहचान करें कि आपको पीठ में दर्द क्यों हो रहा है?
ये लक्षण पीठ की सामान्य समस्या से अलग होते हैं। इनके प्रति सावधान रहना चाहिए क्योंकि ये आसानी से नजरअंदाज हो सकते हैं। ट्यूमर के कारण को समझने और उसे ठीक करने के लिए पूरी जांच महत्वपूर्ण होती है। ये लक्षण कुछ इस प्रकार होते हैं -
- पीठ में लगातार दर्द रहना - अगर पीठ का दर्द कई हफ्तों से बना हुआ है, जो आराम करने या सामान्य देखभाल से ठीक नहीं हो रहा है, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, तो फौरन जाँच करानी चाहिए।
- रात में बेचैनी रहना - अगर रात में दर्द बढ़ जाता है, जिससे नींद प्रभावित होती है, जबकि दिन में कोई भी शारीरिक तनाव महसूस नहीं होता, तो यह चिंताजनक हो सकता है।
- बढ़ता हुआ दर्द - अगर दर्द पीठ से शुरू होकर हाथों और पैरों की ओर बढ़ता है और कभी-कभी बहुत तेज, चुभने वाला या बिजली के झटके की तरह महसूस होता है, तो यह ट्यूमर के कारण हो सकता है।
- सुन्नपन या झनझनाहट - शरीर के कुछ हिस्सों में सुई जैसी चुभन या स्पर्श महसूस करने की क्षमता कम हो जाना, जो आसानी से ठीक न होना। यह भी ट्यूमर का लक्षण हो सकता है।
- मांसपेशियों की कमजोरी - शरीर की शक्ति कम हो जाना, दैनिक काम-काज, जैसे पैदल चलने, भार उठाने या फिर खड़े होने में दिक्कत महसूस होना एक गंभीर लक्षण है।
- शरीर का बैलेंस बनाने में दिक्कत - मल-मूत्र पर नियंत्रण कम हो जाना। यह आमतौर से बीमारी बढ़ने के बाद शुरू होता है और तब होता है, जब नसें बहुत ज्यादा प्रभावित हो चुकी होती हैं।
स्पाइनल ट्यूमर का इलाज
स्पाइनल ट्यूमर की पुष्टि करने और उसकी सटीक जगह का पता लगाने के लिए अलग-अलग प्रकार के इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं, जैसे स्पाइन का सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्स रे आदि, जो किसी भी असामान्य वृद्धि का पता लगाते हैं। कुछ मामलों में टिश्यू के परीक्षण के लिए बायोप्सी भी की जा सकती है, जबकि बोन स्कैन और ब्लड टेस्ट से बीमारी कितनी फैली है, या बीमारी का कारण क्या है, यह पता लगाया जाता है।
ट्यूमर का इलाज प्रमुख रूप से अलग-अलग चीजों पर निर्भर करता है जैसे ट्यूमर का आकार प्रकार क्या है, आकार कितना है और उससे स्पाइन कितनी प्रभावित है आदि। आमतौर से कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए कीमोथेरेपी तथा ट्यूमर को सिकोड़ने और नियंत्रित करने के लिए रेडियेशन थेरेपी दी जाती है। कई मामलों में सर्जरी करनी पड़ सकती है। यदि ट्यूमर का पता जल्दी चल जाता है, तो इलाज की सफलता उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है और इलाज के दौरान होने वाली किसी भी कॉम्प्लिकेशन का खतरा उतना ही कम हो जाता है।
अगर मरीज को पहले से ही कोई न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम नहीं है, तो ऐसे में इलाज उतना ही ज्यादा प्रभावी रहता है। ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और न्यूरोमॉनिटरिंग जैसी आधुनिक सर्जरी को बहुत कम जोखिम के साथ काफी सुरक्षित बना दिया है। इसके बाद रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी द्वारा इलाज निकाले गए ट्यूमर टिश्यू की बायोप्सी रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
हालांकि पीठ दर्द के अधिकतर मामले खतरनाक नहीं होते हैं लेकिन अगर दर्द के साथ-साथ कुछ अन्य समस्याएं महसूस होती हैं या फिर कुछ समय के बाद भी दर्द ठीक न हो, तो इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत होती है। स्पाइनल ट्यूमर बहुत कम लोगों को होता है लेकिन इसके लक्षण आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं और इसे लोग सामान्य पीठ का दर्द मानकर जांच में देर करते रहते हैं। इसलिए अगर शरीर में कोई भी परिवर्तन दिखाई दे, तो समय पर जांच करानी चाहिए क्योंकि तुरंत जांच इलाज के नतीजों को काफी बेहतर बना सकती है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल स्पाइनल ट्यूमर से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।