
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Symptoms of Heart Attack in Children: आजकल की बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और मानसिक तनाव का असर अब सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, विशेषकर दिल की सेहत पर भी पड़ने लगा है। पहले हार्ट अटैक को केवल बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह समस्या कम उम्र के बच्चों में भी देखी जा रही है। चिंता की बात यह है कि कई बार माता-पिता इन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। आप ऐसी गलती न करें, इसके लिए आपको समय रहते ऐसे संकेतों को पहचानना जरूरी है, जो बच्चों में देखे जाते हैं। तो आइए जानते हैं बच्चों में हार्ट अटैक से जुड़े 5 ऐसे लक्षण, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।
अगर बच्चा बार-बार सीने में जलन, भारीपन या दर्द की शिकायत करता है, तो इसे सिर्फ गैस, एसिडिटी या सामान्य थकान मानकर अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है। यह लक्षण हृदय में ब्लॉकेज या अन्य गंभीर हृदय रोगों का संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यदि बच्चा हल्की गतिविधि के बाद ही थकान महसूस करता है, चक्कर आता है या अत्यधिक सुस्ती दिखाता है, तो यह सामान्य कमजोरी नहीं, बल्कि दिल में रक्त संचार की समस्या या दिल की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकता है। हालांकि, ऐसे लक्षण किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के संकेत भी हो सकते हैं, लेकिन फिर भी डॉक्टर से समय रहते संपर्क कर लेना बेहद जरूरी है।
बच्चे की धड़कन सामान्य से तेज हो जाए या धड़कन में अनियमितता हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। यह दिल की धमनियों में ब्लॉकेज या इलेक्ट्रिकल इम्बैलेंस की ओर इशारा कर सकता है। अगर आपका बच्चा इससे जुड़ा कोई लक्षण बताता है, तो आपको बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए।
अगर बच्चा खेलते समय या आराम की स्थिति में भी सांस लेने में परेशानी महसूस करता है, तो यह सामान्य थकान नहीं, बल्कि हृदय की कमजोरी या फेफड़ों से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि, जरूरी नहीं है कि ये लक्षण हार्ट अटैक का ही हो, लेकिन फिर भी समय रहते इसकी जांच कराना बेहद जरूरी है।
अगर थोड़ी मेहनत करके या बिना किसी शारीरिक मेहनत के ही बच्चे की त्वचा नीली पड़ जाती है और अत्यधिक पसीना आता है, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी या हृदय संबंधी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। ऐसे लक्षणों की पहचान होने के बाद डॉक्टर से दिखाने में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए।
इन लक्षणों को हल्के में न लें। किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें। समय पर जांच और उपचार से बच्चों को गंभीर स्थितियों से बचाया जा सकता है। याद रखें सावधानी और सतर्कता ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य की कुंजी है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
हां बच्चों में भी हार्ट अटैक आना संभव है, हालांकि, इसके मामले वयस्कों की तुलना में दुर्लभ होते हैं।
सीने में दर्द होना, जी मिचलाना, शरीर के बाएं तरफ दर्द होना आदि हार्ट अटैक के कुछ शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
हृदय से होने वाली कोई भी बीमारी जैसे हार्ट अटैक, हार्ट का रुक जाना (हार्ट फेलियर) और धमनियों से जुड़ी बीमारी आदि