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सिर्फ 730 ग्राम वजन के साथ हुआ जन्म, 66 दिन NICU में जिंदगी की जंग जीतकर घर लौटी बच्ची

कई बच्चे समय पहले ही पैदा हो जाते हैं यानी कि नौ महीने पूरे होने से पहले ही। ऐसे में उनके शरीर का सही तरह से विकार नहीं हुआ होता है। ऐसा ही केस फरीजदाबाद से आया जहां एक बच्ची 730 ग्राम की पैदा हुई। आइए जानते हैं क्या मामला है।

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Written By: Vidya Sharma | Published : June 24, 2026 2:53 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Sushil Singla

बच्चे को जन्म नौ महीने बाद होता है, लेकिन अगर बच्चा समय से पहले ही दुनिया में आ जाए तो कई उसे प्री-मैच्योर बेबी कहा जाता है। कई बार देखने को मिलता है कि समय से पहले और कम वजन के साथ जन्मे बच्चों का मृत्युदर ज्यादा होता है। लेकिन अब तकनीकें आगे बढ़ी हैं और डॉक्टर अंडर वेट प्रीमैच्योर बेबी की जिंदगी बचाने में सफल हो रहे हैं। ऐसा ही एक केस फरीदाबाद का है, जहां सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर 8 के नियोनेटल केयर में सिर्फ 730 ग्राम की प्रीमैच्योर बच्ची का जन्म हुआ था।

इस बच्ची के लिए जिंदगी की शुरुआत ही एक बड़ी चुनौती बन गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि समय से पहले जन्म लेने के कारण उसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा और उसे तुरंत NICU में भर्ती करना पड़ा। लेकिन पीडियाट्रिक्स के डायरेक्टर डॉक्टर सुशील सिंगला की एक्सपर्ट देखरेख में NICU टीम ने एडवांस्ड नियोनेटल प्रोटोकॉल फॉलो किए और उसकी इस मुश्किल यात्रा के दौरान पूरी सावधानी से निगरानी की। आइए थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि बच्ची का ट्रीटमेंट कैसे सफल हुआ।

66 दिनों में बच्ची का मिली नई जिंदगी

सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद, सेक्टर 8 ने नियोनेटल केयर में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। यहां एक बच्ची को बहुत ज्यादा कम वजन और समय से पहले जन्म होने के बाद सफलतापूर्वक ठीक करने के बाद डिस्चार्ज किया गया। जन्म पर बच्ची का वजन सिर्फ 730 ग्राम था। NICU में 66 दिन बिताने और एडवांस्ड मेडिकल केयर, एक्सपर्ट डॉक्टरों और लगातार मॉनिटरिंग की मदद से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने के बाद बच्ची का वजन बढ़कर 1.83 kg हुआ। उसे स्थिर हालत में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया।

अंडरवेट और प्रीमैच्योर बच्ची को क्या समस्याएं हुईं?

जब हमने पीडियाट्रिक्स के डायरेक्टर डॉक्टर सुशील सिंगला से यह सलाल पूछा तो, उन्होंने बताया कि "समय से बहुत पहले पैदा हुई बच्ची को शुरुआती मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हमें 22 दिनों तक फीड इनटॉलेरेंस और नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस होने की आशंका थी। हमारी देखरेख में NICU टीम ने एडवांस्ड नियोनेटल प्रोटोकॉल फॉलो किए और उसकी इस मुश्किल यात्रा के दौरान पूरी सावधानी से निगरानी की। और साथ ही क्लीनिकल मैनेजमेंट से बच्ची को धीरे-धीरे स्थिर किया गया और 28वें दिन तक उसे पूरा दूध पिलाया गया।"

51वें दिन बच्ची को हो गया था मैनिंजाइटिस

डॉक्टर बताते हैं कि 51वां दिन बच्ची के इलाज का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण साबित हुआ। इस दिन बच्ची को मेनिन्जाइटिस हो गया, साथ ही एपनिया और ब्रैडीकार्डिया के एपिसोड भी हुए थे। जिसके लिए तुरंत CPR और मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत पड़ी। दो डॉक्टर्स ने इस जानलेवा समय के दौरान इंटेंसिव केयर मैनेजमेंट का नेतृत्व किया। समय पर मदद करने जैसे कि वेंटिलेटरी सपोर्ट, इनोट्रोप्स और मैनिंजाइटिस के बाद की दिक्कतों को ध्यान से संभालने आदि से बच्ची की हालत स्थिर हो पाई और धीरे-धीरे वह कमरे की हवा में सांस लेने और मुंह से दूध पीने लायक हो गई।

कम वजन वाले बच्चों के इलाज में क्या परेशानी आती है?

पीडियाट्रिक के डॉयरेक्टर डॉक्टर सुशील सिंगला ने कहा कि "बहुत कम वजन वाले बच्चे को ऐसी जटिल समस्याओं के साथ इलाज करने के लिए न सिर्फ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है, बल्कि निरंतर ध्यान और टीमवर्क की भी जरूरत होती है। यह मामला हमारे NICU प्रोटोकॉल की मजबूती और हमारी पूरी टीम के समर्पण को दिखाता है। वहीं डॉक्टर स्वेता बताती हैं कि "इस बच्ची की देखभाल के हर एक स्टेज में बहुत ही सतर्क और सावधानीपूर्ण फैसले लेने और लगन की जरूरत थी। बच्ची की रिकवरी में संदिग्ध NEC (Necrotizing Enterocolitis) खतरे को भांपना बहुत महत्वपूर्ण था।"

वहीं डॉक्टर आनंद अपना एक्सपियरेंस शेयर करते हुए बताते हैं कि "51 वां दिन बहुत ही मुश्किल चुनौती वाला दिन था। समय पर इलाज शुरू करने और मिलकर काम करने से हमें उसे गंभीर हालत से बाहर निकालने में मदद मिली।" हॉस्पिटल से डिस्चार्ज के बाद बच्ची की हालत ठीक थी। डॉक्टर बताते हैं कि डिस्चार्ज होने के बाद बच्ची हीमोडायनामिक रूप से स्थिर है, उसे पूरा ओरल फीड मिल रहा है, और वह अपने आप सांस ले रही है।

डिस्क्लेमर: यह मामला एक विशेष मरीज के इलाज से जुड़ा है। हर प्रीमैच्योर या कम वजन वाले शिशु की स्थिति अलग हो सकती है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।