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मैं अंधेरी, मुंबई के एक मशहूर अस्पताल में हेमेटोलॉजिस्ट के ऑफिस से बाहर निकल आयी क्योंकि डॉक्टर ने मुझे बताया कि मेरी ऑटोइम्यून समस्या जिसे इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्पुरा ( Idiopathic Thrombocytopenic Purpura) कहते हैं उसका कोई इलाज नहीं है और मुझे इसके साथ अपनी पूरी ज़िंदगी बितानी पड़ सकती है। मैंने एक और डॉक्टर से इस विषय पर राय लेने का प्लान बनाया और उनसे मिलने गयी, क्योंकि जो डॉक्टर मेरा इलाज कर रहे थे, मेरी समस्या के बारे में वह मुझे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे थे। लेकिन मेरा यह फैसला भी बुरा ही निकला। मैं डिप्रेशन की ओर बढ़ रही थी, मैं सोच रही थी कि अब मेरी पूरी ज़िंदगी अनगिनत ब्लड टेस्ट और कोर्टिकॉस्टिरॉइड कराते गुज़रेगी। लेकिन यह 9 साल पहले की बात है। हेमेटोलॉजिस्ट से मिलने के निराशाभरे वक़्त के बाद, मैंने केरल जाने का फैसला किया और वहां जाकर किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की मदद से इलाज कराने का फैसला किया। इससे बढ़िया निर्णय मैंने कभी नहीं लिया था। किसी स्टेरॉयड या इम्यूनोसप्रेस्न्टस (immunosuppressants) की मदद के बिना, मैं अपनी समस्या से राहत पाने का काम किया और अब एक हेल्दी ज़िंदगी फिर से जी सकती हूं।
मेरे जैसे, अनगिनत लोग जो किसी ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित हैं, उनके डॉक्टरों से यह सुना जा सकता है कि उनकी हालत का कोई इलाज नहीं है। अभी तक जो भी तथ्य हैं वह यह बताते हैं कि इस बीमारी को नियंत्रित करने और समस्या को पूरी तरह से स्थायी राहत पाने के कुछ तरीके हैं। कुछ सीधे-सादे तरीकों से आपको इस समस्या के लक्षणों को कमज़ोर करने में मदद मिल सकती है और आपको ऑटोइम्यून बीमारियों के अत्याचार से आज़ाद होने में मदद हो सकती है। इंन्टीग्रल आयुर्वेद से डॉ. मनन गांधी 5 अहम टिप्स दी हैं, जो आपको इस ऑटोइम्यून समस्या से राहत पाने में मदद हो सकती है और ये काफी बहुत आसान हैं।
कच्चा खाना ना खाएं
सही भोजन एक हेल्दी लाइफ स्टाइल की बुनियाद है और इसीलिए कहा जाता है कि प्रोसेस्ड खाना खाने से बचना चाहिए। सवाल यह है कि ऑटोइम्यूनीटी के लिए 'सही' भोजन क्या है? डॉ. गांधी का कहना है कि आपके खाने में ढेर सारी सब्जियां शामिल होनी चाहिए, लेकिन आपको कच्चा खाना खाने से पूरी तरह बचना चाहिए। डॉ. गांधी कहते हैं, "आयुर्वेदिक दवाओं के नियमों के मुताबिक, कच्चे खाद्य पदार्थ और सलाद पाचन शक्ति को गड़बड़ा सकते हैं। क्योंकि पके हुए खाद्य पदार्थों के मुकाबले इनका विघटन ज़्यादा मुश्किल होता है।" वैसे भी यह समझने की ज़रूरत है कि आजकल ज़्यादातर बीमारियों की जड़ हमारे गट की सेहत को नज़रअंदाज करना है। ओवरऑल हेल्थ के लिए भोजन का पाचन, विघटन और असिमलैशन करने की प्रक्रिया को संतुलित किया जाना चाहिए।
फर्मेंटेड खाना ना खाएं
सही भोजन एक हेल्दी जीवन शैली के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है और इसीलिए आपको फर्मेंटेड भोजन से हर कीमत पर बचा जाना चाहिए। हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स अपने खाने में किण्वित या फर्मेंटेड चीज़ें शामिल करने की सलाह देते हैं, आयुर्वेद का मानना है कि वे आपके शरीर का ओज या उसकी शक्ति को कम कर देते हैं। इसका मतलब है कि सभी किण्वित खाद्य पदार्थ बंद होने चाहिए। "किण्वित खाद्य पदार्थों के साथ समस्या यह है कि वे शरीर के विभिन्न चैनलों में रुकावट लाते हैं और ऊर्जा के प्रवाह को सीमित करते हैं। इसलिए रोटी, इडली, डोसा, ढोकला, दही, यीस्ट या खमीर और अल्कोहल जैसे खाद्य पदार्थों से बचें,"डॉ. गांधी ने कहा।
अनुलोम-विलोम करें
नाड़ी शोधन या प्राणायाम के तौर पर मशहूर यह रूप में भी जाना जाता है, अनुलोम-विलोम आपके शरीर के ऊर्जा चैनलों को साफ करने, खाली करने और शुद्ध करने में मदद करता है। यह श्वास तंत्र आपके फेफड़ों को स्वस्थ रखता है, ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है, ऑक्सीजनवाले खून के सही प्रसार में मदद करता है और शरीर में तनाव का स्तर कम कर देता है। नर्वस सिस्टम को सही लय में लाकर, यह चिंता कम कर देता है और आपको शांति महसूस कराता है।
ध्यान करें
डॉ. गांधी कहते हैं कि ऑटो-इम्यून बीमारी वाले लोग डिप्रेशन और चिंता जैसी न्यूरोसाइक्रियाटिज़ जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। ये बीमारी के लक्षणों को ख़राब कर सकते हैं। तो यह अहम है कि आप ध्यान से अपने मन में उठनेवाले परेशानीभरे विचार और चिंता पर लगाम लगा सकते हैं।
आत्मविश्लेषण करें
आध्यात्मिक स्तर पर, डॉ. गांधी कहते हैं कि ऑटोइम्यूनिटी ज्यादातर ऐसे लोगों में देखा जाता है जो बहुत आदर्शवादी और नैतिक रूप से विवादित होते हैं। जब आपके काम आपके नैतिक विचारों से मेल नहीं खाते हैं, तो आप तनाव और उदासी महसूस करते हैं। ऐसे में आप अक्सर खुद को भला-बुरा कहते हैं और आपका आत्मसम्मान भी कम हो सकता है। "आत्मनिरीक्षण। अपने आप को समझें और आप जो कर रहे हैं अपने उस व्यवहार और प्रतिक्रियाओं को समझें। लेट जाएं और आराम से बैठकर अपने शरीर के माध्यम से अपने भीतर के ऊर्जा को पूरे शरीर में तैरने दें। ऊर्जा के साथ-साथ आपका ध्यान भी विचरण करता है, इसलिए अपने शरीर के विभिन्न हिस्सों की ओर आपका ध्यान केंद्रित करें, अपने पैर की उंगलियों से शुरू करें और अपने सिर के मध्यभाग या शिखा वाले स्थान तक ले जाएं। ऐसा करने से, ऊर्जा या प्राण आपके शरीर के हर हिस्से तक पहुंचती है, और उस हिस्से को चंगा करते हैं,"डॉक्टर गांधी कहते हैं, जिन्होंने यह भी कहा कि तनाव को कम करने के लिए, किसी को एक के नैतिक कोड को आराम करने और जीवन में अधिक प्रैक्टिकल बनना सीखना चाहिए।
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अनुवादक: Sadhana Tiwari
चित्र स्रोत: Shutterstock Images.