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Written By: Yogita Yadav | Published : August 21, 2018 2:42 PM IST
इन दिनों दवाओं के साथ-साथ वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति की ओर भी दुनिया का ध्यान जा रहा है। हालांकि भारत में यह सदियों से प्रचलित है। आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं जीवन पद्धति को दोष रहित माना गया है, परंतु इसका असर होने में काफी समय लगता है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह जिज्ञासा होती है कि कौन सा इलाज है ज्यादा बेहतर आयुर्वेद या एलोपैथी?
आयुर्वेद का सिद्धांत
आयुर्वेद में कहा जाता है कि इस धरती पर पाई जाने वाली हरेक जड़, हरेक पत्ता, हरेक पेड़ की छाल का औषधीय गुण है। हमने केवल कुछ का ही इस्तेमाल करना सीखा है। बाकी का इस्तेमाल करना हमें अभी सीखना है। सेहत कोई ऐसी चीज नहीं है, जो आसमान से आपके ऊपर गिरे। सेहत एक ऐसी चीज है जो आपके भीतर से पैदा होती है। क्योंकि शरीर आपके भीतर से बनता है। गुण धरती से आते हैं, मगर वे आपके भीतर से विकसित होते हैं। इसलिए अगर आपको मरम्मत का कोई काम करना है, तो आपको निर्माता के पास जाना चाहिए, किसी लोकल मैकेनिक के पास नहीं। आयुर्वेद का मूल तत्व यही है।
आयुर्वेद एक समग्रतावादी प्रणाली का मतलब सिर्फ शरीर का संपूर्ण रूप में उपचार करना नहीं है। समग्रतावादी प्रणाली का मतलब जीवन का एक संपूर्ण रूप में उपचार करना है, जिसमें धरती, हम जो खाते हैं, जिस हवा में सांस लेते हैं, जो हम पीते हैं – सब कुछ शामिल होते हैं। इन सब चीजों का ध्यान रखे बिना, आयुर्वेद का असली लाभ नहीं दिख सकता।
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आयुर्वेद और एलोपैथी
जब हम सेहत, बीमारी या व्याधि की बात करते हैं, तो उनके दो बुनियादी प्रकार हैं। एक तरह की व्याधि हमारे शरीर में बाहर से आती है, जो बाहरी जीवाणुओं का हमला होता है। अब भी एलोपैथी चिकित्सा पद्धति संक्रमणों से निपटने में सबसे प्रभावी है, इसमें कोई शक नहीं है।
मगर मनुष्य की ज्यादातर बीमारियां खुद की उत्पन्न की हुई होती हैं। वे शरीर के अंदर उत्पन्न होते हैं। ऐसी पुरानी बीमारियों के लिए, एलोपैथी चिकित्सा बहुत कारगर साबित नहीं हुई है। एलोपैथी से बीमारी को सिर्फ संभाला जा सकता है। वह कभी बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करती क्योंकि मुख्य रूप से इसमें लक्षणों का इलाज किया जाता है।
करते हैं लक्षणों का इलाज
ज्यादातर पुरानी बीमारियों के लक्षण बड़ी समस्या का छोटा सा हिस्सा होते हैं। हम हर समय बस उन छोटे हिस्सों का इलाज करते हैं। असल में अब यह उपचार का एक स्थापित तरीका बन गया है – चाहे आपको मधुमेह हो, उच्च रक्तचाप या दमा, डॉक्टर आपसे इसी बारे में बात करते हैं कि बीमारी को संभाला कैसे जाए। वे कभी उससे छुटकारा पाने की बात नहीं करते।
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जब हो इमरजेंसी
अगर आप बहुत गंभीर स्थिति में हैं, तो किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाना सही नहीं होगा। आप उसके पास तभी जाएं, जब आपके पास ठीक होने का समय हो। आपात स्थिति के लिए एलोपैथी में बेहतर व्यवस्था है। मगर जब आपकी समस्याएं हल्की होती हैं, और आप जानते हैं कि वे उभर रही हैं, तो आयुर्वेदिक उपचार और दूसरी प्रणालियां उपचार के बहुत प्रभावशाली तरीके हैं।
चित्र स्रोत:Shutterstock.
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