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डायबिटीज के संदर्भ में भारतीय डॉक्टर भी कम परेशान नहीं हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता है युवाओं का इस बीमारी की जद में आना। इससे आंखों की रोशनी भी कम होने लगती है। साथ ही किडनी और हार्ट पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। ©Shutterstock
डायबिटीज (Anti diabetes herbs) दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही बीमारियों में से एक है। इसके कारण शरीर भीतर से खोखला हो जाता है। डायबिटीज को और भी कई बीमारियों का मुख्य आधार माना जाता है। एक बार डायबिटीज हो जाए तो उस पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि शुरूआत से ही अपनी डाइट में ऐसी चीजें (Anti diabetes herbs) शामिल करें, जो डायबिटीज के जोखिम को कम कर दें। आइए जानते हैं क्या है वें घरेलू टिप्स, जिन्हें फॉलो (Anti diabetes herbs) कर आप डायबिटीज के जोखिम को कम कर सकते हैं।
डायबिटीज के संदर्भ में भारतीय डॉक्टर भी कम परेशान नहीं हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता है युवाओं का इस बीमारी की जद में आना। इससे आंखों की रोशनी भी कम होने लगती है। साथ ही किडनी और हार्ट पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए डायबिटीज को खतरनाक रोगों की स्थिति में शुमार किया जाता है।
शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें। तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनता है। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। एक और फ़ायदा ये है कि पत्तियों में मौजूद ऐन्टीआक्सिडन्ट आक्सिडेटिव स्ट्रेस संबंधी कुप्रभावों को दूर करते हैं।
नीम इन्सुलिन रिसेप्टर सेंसिटिविटी बढाने के साथ साथ शिराओं व धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक करता है और हाइपो ग्लाय्केमिक ड्रग्स पर निर्भर होने से बचाता है। हालांकि यह स्वाद में कड़वा होता है, पर इसके सेवन से रक्त संबंधी विकारों से भी छुटकारा मिलता है।
आप अपनी रोजाना की चाय में दालचीनी को आसानी से शामिल कर सकते हैं। ये इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारने के साथ-साथ ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को भी कम करता है। अगर सिर्फ आधी चम्मच दालचीनी रोज़ ली जाए तो इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधार कर अपने वज़न को भी नियंत्रित किया जा सकता है। दालचीनी के सेवन से ह्रदय संबंधी रोगों का खतरा भी कम हो जाता है।
ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं जो एक मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व हैं, इससे ब्लड शुगर को रिलीज़ करने में मदद मिलाती है और शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है।
इसे मोरिंगा भी कहते हैं, इसके पत्तों में इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह के मामलों में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है।
ये चीजें बना रहीं हैं आपको उम्र से पहले बूढ़ा, रहें सावधान!
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