Autistic Pride Day 2020: बचपन में ही दिखने लगते हैं ऑटिज़्म के लक्षण, ये समस्याएं दे सकती हैं संकेत
Autistic Pride Day 2020: बचपन में ही दिखने लगते हैं ऑटिज़्म के लक्षण, ये समस्याएं दे सकती हैं संकेत
आमतौर पर बच्चों में ऑटिज़्म के लक्षण (Symptoms of Autism) बचपन से ही दिखायी पड़ते हैं। इन बच्चों का विकास बाकी बच्चों की तुलना में काफी धीमी गति से होता है। यह जन्म के बाद पहले 3 वर्षों में होने वाली बीमारी है। जैसा कि यह उम्र बच्चे के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसीलिए, यह बच्चे के मानसिक विकास में रूकावट डालता है। ऑटिज़्म के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए ऑटिस्टिक प्राइड डे और वर्ल्ड ऑटिज़्म डे जैसे आयोजन भी किए जाते हैं। (Autistic Pride Day 2020 in hindi)
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 18, 2020 1:06 PM IST
Autistic Pride Day 2020: बचपन में ही दिखने लगते हैं ऑटिज़्म के लक्षण, ये समस्याएं दे सकती हैं संकेत
Autistic Pride Day 2020: ऑटिज़्म (Autism) बच्चों के दिमागी विकास से जुड़ा एक डिसॉर्डर है। एक्सपर्ट्स के अनुसार दुनिया में 160 में से एक बच्चे में ऑटिज्म की स्थिति देखी जाती है। आमतौर पर बच्चों में ऑटिज़्म के लक्षण (Symptoms of Autism) बचपन से ही दिखायी पड़ते हैं। इन बच्चों का विकास बाकी बच्चों की तुलना में काफी धीमी गति से होता है। यह जन्म के बाद पहले 3 वर्षों में होने वाली बीमारी है। जैसा कि यह उम्र बच्चे के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसीलिए, यह बच्चे के मानसिक विकास में रूकावट डालता है। ऑटिज़्म के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए ऑटिस्टिक प्राइड डे और वर्ल्ड ऑटिज़्म डे जैसे आयोजन भी किए जाते हैं। (Autistic Pride Day 2020 in hindi)
क्या हैं ऑटिज़्म के कारण?
ऑटिज्म की वजहें क्या है, इसके बारे में सही तरीके से पता नहीं लग नहीं लगाया सही कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन एक ऐसा माना जाता है कि ऐसा सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। कई बार प्रेगनेंसी में पोषण की कमी या सही डायट ना मिल पाने से भी गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए ऑटिज्म का ख़तरा बढ़ सकता है।
छोटे बच्चों में दिखने वाले ऑटिज़्म के लक्षण:
अगर आपका बच्चा इशारे करने या समझने में असक्षम है, तो यह इस तरफ ध्यान दें। अगर आपका बच्चा किसी बड़े को कुछ दिखाने के लिए इशारे नहीं कर पाता, किसी बात का जवाब हां या ना के रुप में नहीं देता तो यह ऑटिज़्म का संकेत हो सकता है।
जब अपनी नैनी या केयरटेकर के साथ बच्चा खेलता नहीं, उन्हें देखकर खुश नहीं होता, बच्चा अपने साथ रहने वाले व्यक्ति की आंखों में नहीं देखता या आई कॉन्टैक्ट नहीं बनाता, तो हो सकता है कि वह ऑटिस्टिक है।
ऐसे बच्चे खिलौनों के साथ खेलने में कोई रूचि नहीं दिखाते। कई बार बच्चे अनुचित तरीके से खिलौने का उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह एक ही काम को बार-बार और बहुत देर तक करते रहना भी ऑटिस्टिक बच्चों के व्यवहार का एक हिस्सा है।
अक्सर, बच्चे जब पुकारे जाने वाले के बाद प्रतिक्रिया नहीं देते , तो पैरेंट्स को लगता है कि, बच्चे को सुनने में तकलीफ है या फिर शायद खेलने में व्यस्त है। लेकिन, हो सकता है कि यह ऑटिज़्म का एक लक्षण हो।
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