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Autism Spectrum Disorder Kya Hai: ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) मस्तिष्क के विकास (Neurodevelopmental Disorder) से संबंधित एक स्थिति है। इससे पीड़ित व्यक्ति को पढ़ने-लिखने और लोगों से बातचीत करने में मुश्किल होती है। इतना ही नहीं, ऑटिज्म वाले लोगों को समाज में मेलजोल बनाने और संपर्क करने में परेशानियां आती हैं। दरअसल, यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति का दिमाग सामान्य लोगों के दिमाग की तुलना में काफी अलग तरीके से काम करता है। इससे पीड़ित लोगों का दिमाग देरी से विकसित होता है। ऑटिज्म वाले लोगों के लिए अपने भाव प्रकट करना काफी मुश्किल होता है। इन लोगों को आंखों से संपर्क करने में भी मुश्किल होती है। कई बार बच्चों में असामान्य लक्षण नजर आते हैं, जो ऑटिज्म के हो सकते हैं। लेकिन, इन लक्षणों को पेरेंट्स समझ नहीं पाते हैं। इसलिए ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder in Hindi) के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (World Autism Awareness Day) मनाया जाता है। आज इस दिवस के मौके पर हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो ऑटिज्म डिसऑर्डर वाले बच्चों (Autism Spectrum Disorder Symptoms in Kids in Hindi) में दिखाई देते हैं। आइए, तुलसी हेल्थकेयर, गुरुग्राम के सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. गौरव गुप्ता से जानते हैं बच्चों में ऑटिज्म डिसऑर्डर के लक्षण-
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, हर 36 में से एक बच्चे में ऑटिज्म के लक्षण दिखाई देते हैं। यह डिसऑर्डर लड़कियों की तुलना में लड़कों में ज्यादा आम है। ऑटिज्म लड़कों में 4 गुना अधिक (Autism in Boys vs Girls) आम है।
आपको बता दें कि ऑटिज्म विकार का पता 18 महीने या उससे कम उम्र के बच्चों में लगाया जा सकता है। आमतौर पर 2 साल के बच्चों में इसके लक्षण साफ नजर आ सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में ऑटिज्म डिसऑर्डर का पता किशोरावस्था या युवावस्था में लगता है।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित सभी बच्चों को अलग-अलग लक्षणों का अनुभव हो सकता है। कुछ बच्चों में जन्म के कुछ समय बाद ही इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। हालांकि, आमतौर पर 2 साल की उम्र तक ऑटिज्म डिसऑर्डर के लक्षण दिखाई देते हैं। ऑटिज्म के अलग-अलग लोगों में अलग-अलग लक्षण (Autism Disorder ke Lakshan) महसूस हो सकते हैं।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित कुछ बच्चों को सीखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप बच्चे को बार-बार कुछ सीखा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी वह सीखने में असमर्थ है, तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। यह संकेत ऑटिज्म डिसऑर्डर का हो सकता है।
जब बच्चों को मनचाही चीज नहीं मिलती है, तो उनका उदास होना बेहद सामान्य है। लेकिन, अगर आपका बच्चा हर वक्त उदास और गुस्से में बैठा रहता है, तो यह बिल्कुल आम संकेत नहीं है। यह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का संकेत हो सकता है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे हर वक्त उदासी में रहना पसंद कर सकते हैं।
ज्यादातर बच्चे अपने दोस्तों के साथ रहना और खेलना पसंद करते हैं। लेकिन, ऑटिज्म डिसऑर्डर (ASD) से पीड़ित बच्चे अकेले रहना पसंद करते हैं। उन्हें अकेले खेलना पसंद होता है। ऐसे बच्चों को अपनी ही दुनिया में रहना और खेलना अच्छा लगता है।
ऑटिज्म डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों को आंखों से संपर्क करने में दिक्कत होती है। इन बच्चों के चेहरे पर कोई भाव नजर नहीं आता है। अगर ऑटिज्म वाले बच्चों को आवाज देंगे, तो हो सकता है कि उन्हें सुनाई न दे। हो सकता है वह अपना नाम सुनकर भी कोई प्रतिक्रिया न दे। ऐसे बच्चे बातचीत शुरू नहीं कर पाते हैं।
अगर आपका बच्चा किसी वस्तु की तरफ इशारा नहीं कर पाता है या वह अपनी कोई बात समझा नहीं पाता है, तो हो सकता है कि उसे ऑटिज्म डिसऑर्डर हो। ऑटिज्म डिसऑर्डरवाले बच्चों को इशारा करने में मुश्किल हो सकती है। वे लोगों के चेहरे के भाव पढ़ने असमर्थ हो सकते हैं। इतना ही नहीं, ऐसे बच्चे लोगों के शरीर की मुद्रा भी नहीं पहचान पाते हैं।
ऑटिज्म वाले कुछ लोगों को पढ़ने-लिखने में काफी परेशानी होती है। वहीं, ऑटिज्म के कुछ लोग पढ़ने-लिखने में काफी तेज होते हैं। ऑटिज्म वाले बच्चे पढ़ाई में सामान्य बच्चों की तरह भी हो सकते हैं। इससे पीड़ित कुछ बच्चे आसानी से नई स्किल्स सीख सकते हैं, तो कुछ बच्चों को इशारे में समझ नहीं आते हैं।
बच्चे धीरे-धीरे विकसित होते हैं। लेकिन, ऑटिजम स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर वाले बच्चों में 2 साल की उम्र से पहले विकास में देरी हो सकती है। इन बच्चों का व्यवहार, सामान्य बच्चों की तुलना में काफी अलग होता है। अगर आपको बच्चे के विकास संबंधी कोई समस्या नजर आ रही है, तो ऐसे में डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।
सीडीसी के अनुसार, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का सिर्फ एक कारण (Autism Spectrum Disorder ke Karan) नहीं है। किसी बच्चे में ऑटिज्म डिसऑर्डर होने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। सभी बच्चों में ऑटिज्म के अलग-अलग कारक हो सकते हैं। इसमें जेनेटिक, बायोलॉजिकल और एनवायरनमेंट कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। हालांकि, इसके कुछ जोखिम कारक हो सकते हैं।
ऑटिज्म विकार का इलाज (Autism Spectrum Disorder Treatment) पूरी तरह से संभव नहीं है। लेकिन, कुछ ऐसे उपचार हैं, जो ऑटिज्म के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं और इससे पीड़ित व्यक्ति के जीवन में सुधार कर सकते हैं। ऑटिज्म हर व्यक्ति को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है। इसलिए, हर व्यक्ति को अलग-अलग उपचार की जरूरत होती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।