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Risk of Autism: ऑटिज्म एक प्रकार का गंभीर रोग है, जो शरीर को तंत्रिका प्रणाली को प्रभावित करता है। इससे शरीर की कई क्रियाएं प्रभावित हो जाती हैं। ऑटिज्म रोग का पूरा नाम ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) जिसके मामलों की संख्या काफी तेजी से बढ़ते जाने के कारण यह एक चुनौती बनता जा रहा है। भारत में भी ऑटिज्म के मामलों की संख्या काफी तेजी से बढ़ती जा रही है, जिससे आने वाले समय के लिए यह एक काफी बड़ी चुनौती बन सकती है। ऑटिज्म के लक्षण ज्यादातर मामलों में बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं और इस कारण से कई बार इसके खतरे का पता नहीं लग पाता है। जेनेटिक स्थितियों के अलावा ऑटिज्म के खतरे का अंदाजा लगाना काफी मुश्किल हो सकता है। लेकिन यह भी देखा गया है कि लड़कियों की तुलना में लड़कों में ऑटिज्म के मामले ज्यादा देखे जाते हैं।
ऑटिज्म एक जेनेटिक डिसऑर्डर है, जिसका मतलब है कि अगर माता या पिता में से कोई ऑटिज्म से ग्रस्त है या फिर सगे भाई या बहन में से किसी को यह डिसऑर्डर है, तो यह विकार होने का खतरा ज्यादा देखा जाता है। इसके अलावा कुछ स्टडी में यह भी देखा गया है कि लड़कियों की तुलना में लड़कों में ऑटिज्म होने का खतरा ज्यादा रहता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा (UMN) की वेबसाइट पर पब्लिश की गई रिपोर्ट के अनुसार लड़कियों से ज्यादा लड़कों में ऑटिज्म के मामले इसलिए पाए जाते हैं, क्योंकि लड़कों में ऐसे खास तरह के जेनेटिक होते हैं, जिनमें इस विकार के होने का खतरा ज्यादा बढ़ता है।
ऑटिज्म के लक्षणों की अगर सही तरीके से पहचान की जाए तो बचपन में ही इसके लक्षणों को पता लगाया जा सकता है। इसके लक्षणों में निम्न शामिल हो सकेत हैं
ऑटिज्म एक जेनेटिक विकार है और इसलिए पूरी तरह से इसकी रोकथाम करना संभव नहीं है। लेकिन लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव लाकर इस जेनेटिक बीमारी के खतरे को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है, जिनमें निम्न शामिल हैं -