जिस लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम पर थे अटल बिहारी वाजपेयी, जानें कैसे करता है काम और कब पड़ती है जरूरत

लाइफ सपोर्ट सिस्टम वह उपकरण है जिसे मरीज के अंगों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।

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Written By: Editorial Team | Published : August 17, 2018 10:21 AM IST

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब इस दुनिया में नहीं रहे। वह दिल्ली के एम्स में 11 जून से भर्ती थे। वाजपेयी डिमेंशिया बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्हें किडनी और नली में संक्रमण, छाती में जकड़न, मूत्रनली में संक्रमण आदि की समस्या थी। कई शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे वाजपेयी की हालत जब बेहद नाजुक हो गई थी तो उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। आखिर क्या है यह लाइफ सपोर्ट सिस्टम, कब पड़ती है इसकी जरूरत?

दरअसल, जिस लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर अटल जी को रखा गया था, वह शरीर के अंगों को कंट्रोल करने के लिए एक प्रक्रिया है। जानिए क्या होता है लाइफ सपोर्ट सिस्टम, कैसे करता है ये काम और किन्हें पड़ती है इसकी जरूरत।

क्‍या है लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम

लाइफ सपोर्ट सिस्टम वह उपकरण है जिसे मरीज के अंगों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। चिकित्सीय स्थितियों में मरीज को जीवित रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। आमतौर पर यह सिस्‍टम उन लोगों के लिए है, जिनके शरीर का एक या एक से अधिक अंग काम करना बंद कर देते हैं और उन्‍हें एक सहायता की जरूरत होती है। इस सिस्टम की मदद से अंग रिकवर होकर सामान्य रूप से काम करने में मदद करती है। इससे मरीज जिंदा रहता है और उसके अंगों को रिकवर करने में मदद करता है। हालांकि, कई गंभीर मामलों में मरीज की मौत भी हो जाती है। कुछ मामलों में शरीर के अंग रिकवर नहीं हो पाते। जब मरीज की हालत बहुत नाजुक हो जाती है, उसी स्थिति में लाइफ सपोर्ट सिस्टम प्रोवाइड करवाया जाता है।

कब पड़ती है जरूरत

इस सिस्‍टम की जरूरत खासतौर से तब होती है जब मरीज की श्‍वसन प्रणाली, हृदय प्रणाली, गुर्दे की प्रणाली और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम फेल हो जाते हैं। कई बार मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र भी फेल हो सकते हैं, लेकिन लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम के माध्‍यम से बाकी अंग काम करने लगते हैं तो तंत्रिका तंत्र भी वापस अपने स्‍टेज पर आ जाती है। लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम खासतौर से श्वसन, कार्डियोवैस्कुलर, गुर्दे, और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम के लिए है।

कैसे देते हैं लाइफ सपोर्ट सिस्टम

सबसे पहले मरीज को वेंटीलेटर पर रखकर ऑक्सीजन दी जाती है। इससे हवा दबाव बनाते हुए फेफड़ों तक पहुंचती है। खासकर निमोनिया और फेफड़ों के फेल होने पर ऐसा किया जाता है। लाइफ सपोर्ट में एक ट्यूब को मरीज की नाक के जरिए शरीर के अंदर डाला जाता है। ट्यूब का दूसरा हिस्सा इलेक्ट्रिक पंप से जोड़ा जाता है।

हटाते कब हैं लाइफ सपोर्ट सिस्टम

दो स्थिति में ही मरीज का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जाता है। अगर शरीर के अंगों में उम्मीद के मुताबिक सुधार दिखाई दे और अंग काम करना शुरू कर दे तो यह हटाया जा सकता है। अगर एक तय समय तक शरीर के अंगों में सुधार नहीं दिखाई दे तो इसे हटा दिया जाता है। हालांकि, इसे हटाने के लिए परिजनों की सहमति जरूरी है। लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के बाद भी डॉक्टर्स इलाज जारी रखते हैं।

चित्रस्रोत :Shutterstock.

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