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भारत सहित दुनियाभर की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर एक बहुत ही कॉमन कैंसर है। भारत में महिलाओं को होने वाले कुल कैंसर केसेज में से करीब 28.2% मामले ब्रेस्ट कैंसर के होते हैं। साल 2022 में अकेले भारत में इसके 216,108 मामले सामने आए थे। चिंता की बात ये है कि ब्रेस्ट कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि कुछ सावधानियां और सतर्कता रखकर इस कैंसर से पूरी तरह से मुक्ति पाई जा सकती है। शुरुआती स्टेज में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करवाकर आप फिर से एक हेल्दी लाइफ जी सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप समय समय पर मैमोग्राफी (Mammography) टेस्ट करवाएं। क्या है यह टेस्ट और एक उम्र के बाद इसे करवाना क्यों जरूरी है, यह जानना हर महिला के लिए आवश्यक है।
मैमोग्राफी एक प्रकार का एक्स-रे है जिसका उपयोग ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसमें ब्रेस्ट के टिश्यूज की फोटो बनाने के लिए कम-डोज वाले एक्स-रे का यूज किया जाता है। मैमोग्राफी ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने का एक इंपॉर्टेंट और इजी तरीका है। भले ही आप ब्रेस्ट कैंसर के कोई लक्षण महसूस न करें, लेकिन फिर भी एक निश्चित उम्र के बाद यह टेस्ट करवा लेना चाहिए।
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार 40 से 74 साल की हर महिला को हर दो साल में एक बार मैमोग्राफी टेस्ट करवाना चाहिए। इसकी शुरुआत 40 साल की उम्र पार करने के साथ ही कर देनी चाहिए। अमेरिकन कॉलेज ऑफ रेडियोलॉजी और अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार समय पर ब्रेस्ट कैंसर का उपचार करवाने से इससे होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शोध बताते हैं कि 40 साल की उम्र के बाद ब्रेस्ट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। साल 2015 के बाद से इसमें हर साल करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार मैमोग्राफी टेस्ट से ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती स्टेज में ही पता चल सकता है। फिर भी कुछ मामलों में 40 साल की उम्र से पहले भी यह टेस्ट करवाया जा सकता है। जैसे जिन युवतियों को प्यूबर्टी बहुत ही जल्दी आ गई है। या फिर जिन युवतियों की फैमिली हिस्ट्री में ब्रेस्ट कैंसर के मामले हैं, उन्हें ये टेस्ट कम उम्र में भी करवा लेना चाहिए। इसी के साथ अगर ब्रेस्ट काफी हैवी हैं तो आपको मैमोग्राफी टेस्ट के साथ ही अल्ट्रासाउंड या एमआरआई भी करवाना चाहिए, जिससे सटीक रिजल्ट मिल पाएं।