Asthma कर सकता है 'दिमाग खराब', मरीज को हो सकती हैं ब्रेन से जुड़ी ये समस्याएं
अस्थमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 7 मई को विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day 2024) मनाया जाता है।
अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है, जो श्वसन मार्गों (सांस की नलियों) को प्रभावित करती है और उससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। ऐसा आमतौर पर श्वसन मार्गों में सूजन के कारण होता है, श्वास नलियां संकुचित हो जाती हैं। अस्थमा के प्रमुख लक्षणों में सांस लेने के दौरान सीटी जैसी आवाज आना, सांस फूलना, सीने में जकड़न और खांसी होना आदि शामिल हैं। ऐसे कई कारक हैं, जो अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा देते हैं इनमें प्रमुख रूप से धूल, मिट्टी, सूक्ष्म कीट, पराग, खांसी-जुकाम और श्वसन मार्गों में संक्रमण आदि शामिल हैं। अस्थमा के दो अलग-अलग प्रकार हैं जिन्हें स्पेसिफिक अस्थमा और नॉन-स्पेसिफिक अस्थमा के नाम से जाना जाता है। अस्थमा के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी देखा जा सकता है और इसलिए यह अनुवांशिक बीमारी हो सकती है। अस्थमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं व अन्य उपचारों की मदद से इसके लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
अस्थमा के कारणों के अनुसार इसे प्रमुख रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है, जो इस प्रकार हैं -
अस्थमा से ग्रसित ज्यादातर लोगों को कभी-कभी लक्षण महसूस होते हैं, जबकि अन्य लोगों को लगातार लक्षणों का सामना करना पड़ जाता है। घरघराहट होना अस्थमा का सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है, जिसमें सांस लेने के दौरान सीटी बजने और बोलने के दौरान चिल्लाने जैसी ध्वनि आती है। हालांकि, इसके अलावा अस्थमा में कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं जैसे -
अस्थमा अटैक के दौरान श्वसन मार्गों के चारों तरफ मौजूद मांसपेशियों में सूजन आने लगती है, जिससे मार्ग संकुचित होने लगते हैं और परिणामस्वरूप सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हालांकि, ऐसा क्यों होता है इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है, हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ अनुवांशिक और वातावरणीय कारक अस्थमा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अस्थमा का निदान करने के लिए कोई विशेष टेस्ट नहीं बन पाया है, इसलिए नवजात शिशुओं में अक्सर इस बीमारी का पता नहीं चल पाता है। हालांकि, छोटे बच्चों या किसी वयस्क को अस्थमा के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो शारीरिक परीक्षण और मेडिकल हिस्ट्री का पता लगाकर डॉक्टर इस स्थिति का निदान कर सकते हैं। स्थिति की पुष्टि करने के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PETs) जिसे ब्रीथिंग टेस्ट भी कहा जाता है। इसके अलावा स्पायरोमेट्री टेस्ट भी किया जा सकता है, जिसकी मदद से आपके सांस छोड़ने के दौरान निकलने वाली हवा के दबाव की जांच की जाती है। इसके अलावा कुछ अन्य टेस्ट भी हैं, जिन्हें अस्थमा का निदान करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है -
अभी तक अस्थमा के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है और इसलिए ज्यादातर मामलों में इस से बचाव नहीं किया जा सकता है। हालांकि, इसके लक्षणों को पैदा करने वाला कारकों से बचकर इसके लक्षणों को विकसित होने से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है -
इलाज की मदद से अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, हालांकि, इसके इलाज पर अभी शोध चल रहे हैं। वर्तमान में दवाओं व अन्य उपचार विकल्पों की मदद से अस्थमा के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अस्थमा के इलाज का मुख्य लक्ष्य ग्रस्त व्यक्ति के लक्षणों को नियंत्रित करना है ताकि व सांस लेने में दिक्कत व अन्य परेशानियां न हो पाएं। अस्थमा के प्रकार के अनुसार उनका इलाज भी अलग-अलग हो सकता है जिनमें निम्न शामिल हैं -
यदि अस्थमा की समय पर देखभाल न की जाए तो इससे कई गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे -
अस्थमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 7 मई को विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day 2024) मनाया जाता है।
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अस्थमा एक श्वसन संबंधी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में करीब 339 मिलियन से अधिक लोग अस्थमा के मरीज हैं। इस बीमारी में वायुमार्ग सूज जाता है और संकरा हो जाता है।
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अस्थमा अटैक (asthma causes) रात में ज्यादा होता है. दमा या अस्थमा की खांसी रात में परेशान करने वाली होती है. रात में अस्थमा या दमा के अटैक से बचवा के उपाय जरूरी हैं. घर के अंदर का तापमान और वायु प्रदूषण के साथ कमरे की धूल पर अगर ध्यान रखा जाए तो रात में अस्थमा के अटैक से बच (asthma prevention) सकते हैं.
अस्थमा के दौरान एक्सरसाइज करना हानिकारक हो सकता है लेकिन तब, जब आप इस दौरान सावधानियां नहीं बरतते हैं। जानें, अस्थमा के दौरान एक्सरसाइज करते समय आपको क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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बाहर से आने के बाद जूतों को घर के अंदर न ले जाएं।
तनाव से दूर रहें क्योंकि यह अस्थमा के अटैक का कारण बन सकता है।
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