अस्थमा (Asthma)

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अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है, जो श्वसन मार्गों (सांस की नलियों) को प्रभावित करती है और उससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। ऐसा आमतौर पर श्वसन मार्गों में सूजन के कारण होता है, श्वास नलियां संकुचित हो जाती हैं। अस्थमा के प्रमुख लक्षणों में सांस लेने के दौरान सीटी जैसी आवाज आना, सांस फूलना, सीने में जकड़न और खांसी होना आदि शामिल हैं। ऐसे कई कारक हैं, जो अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा देते हैं इनमें प्रमुख रूप से धूल, मिट्टी, सूक्ष्म कीट, पराग, खांसी-जुकाम और श्वसन मार्गों में संक्रमण आदि शामिल हैं। अस्थमा के दो अलग-अलग प्रकार हैं जिन्हें स्पेसिफिक अस्थमा और नॉन-स्पेसिफिक अस्थमा के नाम से जाना जाता है। अस्थमा के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी देखा जा सकता है और इसलिए यह अनुवांशिक बीमारी हो सकती है। अस्थमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं व अन्य उपचारों की मदद से इसके लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

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अस्थमा के प्रकार

अस्थमा के कारणों के अनुसार इसे प्रमुख रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है, जो इस प्रकार हैं -


  • बाहरी अस्थमा - बाहरी पदार्थों से होने वाले इम्यून रिस्पॉन्स को एक्ट्रींसिक यानि बाहरी अस्थमा कहा जाता है। यह आमतौर पर धूल, पराग और जानवरों के बालों व रूसी आदि से होता है।

  • आंतरिक अस्थमा - यह आमतौर पर तब होता है जब कुछ केमिकल शरीर के अंदर चले जाएं जैसे सिगरेट का धुआं आदि सांस के माध्यम से शरीर के अंदर चला जाना। कई बार यह सीने में संक्रमण या स्ट्रेस आदि के कारण गंभीर भी हो जाता है।

अस्थमा के लक्षण

अस्थमा से ग्रसित ज्यादातर लोगों को कभी-कभी लक्षण महसूस होते हैं, जबकि अन्य लोगों को लगातार लक्षणों का सामना करना पड़ जाता है। घरघराहट होना अस्थमा का सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है, जिसमें सांस लेने के दौरान सीटी बजने और बोलने के दौरान चिल्लाने जैसी ध्वनि आती है। हालांकि, इसके अलावा अस्थमा में कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं जैसे -


  • रात के समय खांसी होना

  • हंसने या व्यायाम करने के दौरान खांसी उठना

  • सीने में जकड़न व दर्द

  • सांस फूलना

  • बोलने में दिक्कत होना

  • चिंता या पैनिक होना

  • थकान रहना

  • तेजी से सांसें लेना

  • बार-बार संक्रमण होना

  • पर्याप्त नींद न ले पाना


हालांकि, इसके अलावा आपके स्वास्थ्य और अस्थमा के प्रकार के अनुसार उसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को अस्थमा के लक्षण पूरा दिन महसूस होते हैं, जबकि अन्य लोगों को कोई खास गतिविधि करते समय अस्थमा के लक्षण महसूस होते हैं। खास गतिविधि करते समय महसूस होने वाले लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं -

  • खांसी उठना

  • घरघराहट होना

  • बार-बार गला साफ करने का मन करना

  • नींद न आना

  • सीने में दर्द व जकड़न होना


यदि आपको उपरोक्त में से कोई लक्षण महसूस हो रहा है या फिर कोई गतिविधि करते समय आपके अस्थमा के लक्षण महसूस होते हैं, तो इस बारे में आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।

अस्थमा के कारण

अस्थमा अटैक के दौरान श्वसन मार्गों के चारों तरफ मौजूद मांसपेशियों में सूजन आने लगती है, जिससे मार्ग संकुचित होने लगते हैं और परिणामस्वरूप सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हालांकि, ऐसा क्यों होता है इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है, हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ अनुवांशिक और वातावरणीय कारक अस्थमा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अस्थमा के जोखिम कारक


अस्थमा के सटीक कारणों का तो अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, कुछ कारक हैं, जो अस्थमा विकसित होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं -

  • अनुवांशिक कारक - यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता या सगे भाई-बहन को अस्थमा है, तो उसे भी यह बीमारी होने के खतरा बढ़ जाता है।

  • मोटापा - मोटापे को कई बीमारियों की जड़ माना जाता है और इनमें अस्थमा भी एक है। मोटापे के कारण स्वशन मार्ग संकुचित होने लगते हैं, जिससे अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है।

  • बार-बार संक्रमण - श्वसन मार्गो में बार-बार संक्रमण होने से अस्थमा समेत अन्य सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

  • धूम्रपान करना - जो व्यक्ति धूम्रपान या तंबाकू के किसी अन्य प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यह रोग होने का खतरा बढ़ सकता है।

  • अधिक दवाएं लेना - एस्पिरिन और नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी जैसी दवाएं भी कई बार अस्थमा के लक्षणों को पैदा कर सकती हैं।

अस्थमा का निदान

अस्थमा का निदान करने के लिए कोई विशेष टेस्ट नहीं बन पाया है, इसलिए नवजात शिशुओं में अक्सर इस बीमारी का पता नहीं चल पाता है। हालांकि, छोटे बच्चों या किसी वयस्क को अस्थमा के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो शारीरिक परीक्षण और मेडिकल हिस्ट्री का पता लगाकर डॉक्टर इस स्थिति का निदान कर सकते हैं। स्थिति की पुष्टि करने के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PETs) जिसे ब्रीथिंग टेस्ट भी कहा जाता है। इसके अलावा स्पायरोमेट्री टेस्ट भी किया जा सकता है, जिसकी मदद से आपके सांस छोड़ने के दौरान निकलने वाली हवा के दबाव की जांच की जाती है। इसके अलावा कुछ अन्य टेस्ट भी हैं, जिन्हें अस्थमा का निदान करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है -


  • मेथाकोलाइन चैलेंज

  • पीक फ्लो

  • एक्सहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड टेस्ट

  • चेस्ट एक्स रे

अस्थमा की रोकथाम

अभी तक अस्थमा के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है और इसलिए ज्यादातर मामलों में इस से बचाव नहीं किया जा सकता है। हालांकि, इसके लक्षणों को पैदा करने वाला कारकों से बचकर इसके लक्षणों को विकसित होने से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है -


  • जिन चीजों से अस्थमा के लक्षण पैदा होते हैं उनसे दूर रहें

  • एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों से दूर रहें

  • आवश्यकता पड़ने पर एलर्जी की दवाएं लेते रहें

  • धूम्रपान कर रहे लोगों के संपर्क में न आएं और न खुद करें

  • जिन लोगों को सर्दी-जुकाम हुआ है, उनसे दूरी बनाकर रखें

अस्थमा का इलाज

इलाज की मदद से अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, हालांकि, इसके इलाज पर अभी शोध चल रहे हैं। वर्तमान में दवाओं व अन्य उपचार विकल्पों की मदद से अस्थमा के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अस्थमा के इलाज का मुख्य लक्ष्य ग्रस्त व्यक्ति के लक्षणों को नियंत्रित करना है ताकि व सांस लेने में दिक्कत व अन्य परेशानियां न हो पाएं। अस्थमा के प्रकार के अनुसार उनका इलाज भी अलग-अलग हो सकता है जिनमें निम्न शामिल हैं -


  • तुरंत आराम करने वाली दवाएं - इन दवाओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से आपातकालीन स्थितियों में किया जाता है। उदाहरण के रूप में यदि किसी व्यक्ति को गंभीर अस्थमा अटैक आया है और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो ऐसे में क्विक रिलीफ मेडिसिन का इस्तेमाल किया जाता है।

  • लंबे समय तक लक्षणों को नियंत्रित करने वाली दवाएं - ये दवाएं तुरंत आराम नहीं करती हैं, इनका असर धीरे-धीरे शुरू होता है और लंबे समय तक रहता है। इन दवाओं का मुख्य काम व्यक्ति को अस्थमा अटैक आने से रोकना होता है। इनमें आमतौर पर स्टेरॉयड व अन्य एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं और लॉन्ग एक्टिव ब्रोंकोडायलेटर आदि शामिल हैं।

  • ब्रीथिंग एक्सरसाइज - दवाओं के अलावा डॉक्टर मरीज को ब्रीथिंग थेरेपी लेने की सलाह भी दे सकते हैं। इस थेरेपी की मदद से व्यक्ति को सही तरीके से सांस लेने और छोड़ने की तकनीक सिखाई जाती है, जिससे व्यक्ति के फेफड़ों की क्षमता भी बढ़ती है।


इसके अलावा अस्थमा से ग्रसित व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य और उसे महसूस हो रहे अन्य लक्षणों के अनुसार डॉक्टर इलाज में कुछ अन्य दवाओं व उपचार विकल्पों को भी शामिल कर सकते हैं।

अस्थमा की जटिलताएं

यदि अस्थमा की समय पर देखभाल न की जाए तो इससे कई गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे -


  • नींद न आना

  • सांस संबंधी अन्य बीमारियां होना

  • लंबे समय तक दवाएं लेने के कारण साइड इफेक्ट्स होना

  • जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो जाना

  • गर्भावस्था से जुड़ी परेशानियां होना

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