क्या अस्थमा से ज्यादा प्रदूषण के कारण हो रहा है ब्रोंकाइटिस? क्या AQI बढ़ने के साथ-साथ खतरा भी बढ़ रहा है?

Pollution se Hone wali Bimariyan: जिन क्षेत्रों में प्रदूषण ज्यादा है वहां पर लोगों को ब्रोंकाइटिस होने का खतरा काफी बढ़ता जा रहा है, जिसके बारे में डॉक्टर आपको कुछ खास जानकारियां देने वाले हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : December 2, 2025 4:32 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Harish Kumar Verma

Bronchitis Risk in Pollution Areas: आजकल दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि यह सिर्फ एक अस्थायी समस्या नहीं है बल्कि बल्कि परमानेंट बनती जा रही है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस प्रकार अस्थमा जैसी समस्याओं के कारण लोगों को ब्रोंकाइटिस की समस्या होने का खतरा ज्यादा रहता है। उसी प्रकार से ब्रोंकाइटिस होने का खतरा ज्यादा रहता है। यहां तक कि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि जिन क्षेत्र में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है, वहां पर अस्थमा से ज्यादा प्रदूषण के कारण ब्रोंकाइटिस होने का खतरा बढ़ रहा है। डॉ. हरीश कुमार वर्मा ने इसी बारे में कुछ खास जानकारियां देने की कोशिश की है, जिनके बारे में हम आपको इस लेख में खास जानकारी देने वाले हैं।

डॉ. वर्मा ने बताया कि आजकल अस्पतालों में सांस के मरीजों को देखने का नजरिया ही बदल गया है। कुछ समय पहले तक, हम सांस की समस्याओं जैसे ठंडी सर्दियों की हवा के कारण सांस लेने में कठिनाई आदि को मुख्य रूप से अस्थमा के मरीजों से जोड़कर देखते थे। अब स्थिति बदल गई है और अब पर्यावरण में प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण, अब अस्थमा के मरीजों की तुलना में ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।

खराब हवा के कारण ब्रोंकाइटिस का खतरा

डॉ. वर्मा के अनुसार अस्थमा अक्सर शरीर की आंतरिक एलर्जी से संबंधित होता है, जबकि अभी जो ब्रोंकाइटिस हो रहा है, वह हवा की गुणवत्ता (Air Quality Index - AQI) के 300 या 400 से ज्यादा होने के कारण हो रहा है। PM 2.5 जैसे छोटे कण हमारी श्वास नली (trachea) में उसी तरह जलन पैदा कर रहे हैं, जैसे रेगमाल (sandpaper) लकड़ी को खरोंचता है। इसके कारण जिन लोगों को पहले कभी सांस की समस्या नहीं थी, उन्हें भी लगातार सूखी खांसी हो रही है। यह समस्या कई दिनों से लेकर हफ्तों तक रह सकती है, फेफड़े भारी महसूस होते हैं और सांस लेने में दिक्कत होती है।

सिर्फ मौसम का बदलाव न समझे इसे

हमारे फेफड़ों में सूजन (inflammation) सीधी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि हवा में जहरीले तत्व बढ़ने के साथ AQI कितना ऊपर गया है। यह महज "मौसम का बदलाव" नहीं है, यह एक "मेडिकल इमरजेंसी" है। यह देखना खासकर दुखद और निराशाजनक है कि बच्चों और बुजुर्गों को, जिनके फेफड़े नाज़ुक होते हैं, इस बढ़ते वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है।

अपने फेफड़ों की सुरक्षा अब पहली प्राथमिकता है।

डॉ. वर्मा ने कहा कि मेरी सलाह सीधी और स्पष्ट है कि इस खांसी को बदलते मौसम की कोई सामान्य समस्या न समझें। अगर आपको अपने सीने में किसी तरह की जकड़न महसूस होती है, तो इसका मतलब है कि आपका श्वसन तंत्र बढ़ते प्रदूषण से प्रभावित हुआ है। इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत, सीने में जलन, सांस लेने में जलन, छाती में दर्द और खांसते समय ज्यादा दर्द जैसे लक्षण हो रहे हैं, तो लंबे समय तक इग्नोर न करें बल्कि जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

मास्क है जरूरी

अगर प्रदूषण ज्यादा है, तो मास्क पहनने की आदत डालें और इसे अपने व अपने परिवार के स्वास्थ्य के लिए एक जिम्मेदारी समझें। अगर आपको बाहर कोई काम नहीं है, तो बाहर न निकलें और खासतौर पर ज्यादा ट्रैफिक वाले एरिया जैसे मार्केट आदि में न जाएं। सुबह-शाम या फिर आपके आसपास जिस समय प्रदूषण ज्यादा होता है, घर के खिड़की व दरवाजे बंद रखें। समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच कराते रहें।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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