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कोरोना मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है अस्‍थमा इनहेलर, सही इस्‍‍‍‍‍तेमाल से नहीं होना पड़ेगा अस्‍पताल में भर्ती

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा की गई एक रिसर्च में कहा गया है कि अस्‍थमा इनहेलर का प्रयोग से कोरोना मरीजों (Asthma Inhalers for Covid-19 patients in hindi) में अस्‍पताल में भर्ती होने का जोखिम कम होता है।

कोरोना मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है अस्‍थमा इनहेलर, सही इस्‍‍‍‍‍तेमाल से नहीं होना पड़ेगा अस्‍पताल में भर्ती
अस्थमा फेफड़ों से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, जिसके कारण सांस लेने में समस्या होती है।

Written by Rashmi Upadhyay |Published : May 4, 2021 5:40 PM IST

कोरोना की दूसरी लहर भारत पर कहर बनकर टूट रही है। हर दिन कोरोना से मरने वालों की संख्‍या में इजाफा हो रहा है। साल 2020 की कोरोना लहर में मरीज संक्रमित होने के बाद खुद को होम आइसोलेट रखकर जल्‍दी सही हो रहे थे। लेकिन इस बार कोरोना पॉजिटिव आने के बाद ज्‍यादातर मरीजों में ऑक्‍सीजन की कमी हो रही है। यही कारण है कि भारत के लगभग सभी अस्‍पतालों में बेडों और ऑक्‍सीजन की कमी हो रही है। वर्तमान में तमाम डॉक्‍टर्स और एक्‍सपर्ट्स कोई ऐसा तरीका खोज रहे हैं जिससे कोरोना मरीजों को अस्‍पताल में भर्ती होने की जरूरत न पड़े और वो होम आइसोलेशन में ही सही हो जाएं। इसी सिलसिले में एक स्‍टडी आई है जिसमें यह कहा गया है कि अस्‍थमा इनहेलर (Asthma Inhalers) के प्रयोग से कोरोना मरीजों के फेफड़ों में SARS-CoV-2 की प्रतिकृति कम होती है और COVID रोगियों में अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम भी कम होता है।

asthma

पढ़िए क्‍या कहती है रिसर्च?

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार जो दवा अस्थमा के मरीजों को इलाज के दौरान दी जाती है, उनका सेवन यदि कोरोना मरीज भी करें तो उनकी रिकवरी जल्‍दी हो सकती है। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि सांस ग्लूकोकार्टोइकस SARS-COV-2 संक्रमण से संक्रमित लोगों में गंभीर COVID और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम कर सकता है। इसी तरह की रिसर्च चीन, इटली और अन्‍य देशों में भी हो चुकी है। इन देशों में हुए अध्‍ययन में भी यह कहा गया है कि अस्‍थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से पीड़ित रोगी कोविड पॉजिटिव होने के बाद भी अस्पताल में बहुत कम संख्‍या में भर्ती हुए। लैंसेट स्‍टडी में यूनाइटेड किंगडम के 146 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था, जिनमें से आधे को बाइडोनाइड (Budesonide) के साथ इनहेलर्स का उपयोग करने के लिए कहा गया और साथ ही उन्‍हें कोरोना संबंधी जरूरी ​​देखभाल दी गई। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि इनहेलर COVID के उपचार में प्रभावी हो सकते हैं और उनकी रिकवरी भी जल्‍दी हो सकती है।

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कितनी गंभीर बीमारी है अस्‍थमा?

अस्थमा फेफड़ों से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, जिसके कारण सांस लेने में समस्या होती है। अस्थमा को दमा भी कहते हैं और इसे श्वसन तंत्र की गंभीर बीमारी भी कहा जाता है। 4 मई को वर्ल्‍ड अस्‍थमा डे मनाया जाता है। ताकि लोग अस्‍थमा के बारे में और ज्‍यादा जान सके और इसके लक्षणों को समय रहते कंट्रोल कर सके। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार अस्‍थमा एक गंभीर बीमारी है। इससे पीड़ित लोगों को सांस लेने में बहुत मुश्किल होती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि श्वसन मार्ग में सूजन आने से वह संकुचित हो जाती है। जब किसी व्‍यक्ति को अस्थमा का अटैक आता है तो उसे छाती में कसाव, छोटी-छोटी सांस लेना, सांस फूलना और बार-बार खांसी आने लगती है। इस स्थिति में सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। यदि किसी व्‍यक्ति को अस्‍थमा हो जाए तो इसे पूरी तरह से सही नहीं किया जा सकता है, केवल कंट्रोल किया जा सकता है।

food in asthma

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अस्‍थमा रोगी को क्‍या करना चाहिए?

  • सबसे पहले किसी अच्‍छे डॉक्‍टर से मिलें और उन्‍हें अपनी हेल्‍थ कंडीशन के बारे में बताएं।
  • डॉक्टर से अपना पर्सनल अस्थमा मैनेजमेंट प्लान तैयार करें। इस प्लान में दवाएं कब लेनी हैं, क्‍या खाना है, आपका लाइफस्‍टाइल कैसा होना चाहिए और अस्थमा के जोखिम से बचने के लिए क्‍या करना है, ये सब लिखने को कहें।
  • अपने चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का ही सेवन करें, ताकि अस्थमा के लक्षणों से राहत मिल सके। इससे वायुमार्ग से संबंधित सूजन और जलन को आप नियंत्रित कर सकेंगे।
  • अस्थमा के उन जोखिम कारकों के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाएं, जो लक्षणों को बढ़ाकर आपकी स्थिति को बदतर बना सकते हैं।
  • अगर आपको बार बार अस्थमा का दौरा पड़ता है, तो डॉक्‍टर से पूछें कि उस वक्‍त आपको क्‍या करना चाहिए। ताकि जब आपको अस्थमा अटैक आए, तो आपके घरवालों को पता हो कि उन्‍हें क्‍या करना है।