
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 9, 2024 12:08 AM IST
Asthma and brain function: अस्थमा श्वसन प्रक्रिया से जुड़ी एक समस्या है और दुनिया भर में हर साल 2,50,000 लोगों की जान इस बीमारी की वजह से चली जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार अस्थमा की बीमारी मस्तिष्क के कार्यों को काफी हद तक बाधित भी कर सकती है। अस्थमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 7 मई को विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day 2024) मनाया जाता है।
अस्थमा से पीड़ित लोगों के फेफड़ों की दीवारें मोटी हो जाती हैं और उनमें बलगम भरने लगता है। धूल-मिट्टी के कण, पराग या वायरल संक्रमण जैसे कारणों से अस्थमा की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के श्वसन मार्ग को संकरा बनने लगते हैं। अस्थमा मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अस्थमा की बीमारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ब्रेन फंक्शनिंग को भी कमजोर कर सकती है।
फोर्टिस अस्पताल, गुरुग्राम में न्यूरोलॉजी के चीफ और प्रिंसिपल डायरेक्टर प्रवीण गुप्ता का कहना है कि, ''अस्थमा अटैक के कारण ब्रेन तक ऑक्सीजन कम मात्रा में पहुंचता है। ऑक्सीजन की कमी से ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में बार-बार अस्थमा अटैक आने और अस्थमा को ठीक तरीके से मैनेज न कर पाने के कारण अस्थमा के मरीजों को नींद से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती हैं। ठीक तरीके से सो ना पाने के कारण मस्तिष्क की कार्यप्रणाली खराब हो सकती है।''
रिसर्च से पता चला है कि अस्थमा से पीड़ित वयस्क और बच्चे दोनों में ही याददाश्त कमजोर होने की समस्या होती है। ऐसा माना जाता है कि अस्थमा के रोगियों में कमजोर मेमरी मस्तिष्क की संरचना में होनेवाले बदलावों के कारण होती है।
अस्थमा के रोगियों को हिप्पोकैम्पस की मात्रा में कमी का अनुभव होता है, जो याददाश्त की कमी से जुड़ा हुआ है।
आईएएनएस से बातचीत में नारायणा हॉस्पिटल-आरएन टैगोर हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट अरात्रिका दास ने कहा कि, ''अस्थमा विशेष रूप से बच्चों में न्यूरोलॉजिकल फंक्शन पर प्रभाव डाल सकता है। हाइपोक्सिया सूजन और बीमारी की वजह से लम्बे समय तक तनाव जैसे कारक संभावित रूप से तंत्रिका-संज्ञानात्मक कार्य को प्रभावित कर सकते हैं। बच्चों में अस्थमा और विभिन्न न्यूरोलॉजिकल परिणामों के बीच एक संबंध पाया गया है, जिसमें याददाश्त कमजोर होने, व्यवहार संबंधी समस्याएं , नींद के पैटर्न से जुड़ी समस्याएं और संभावित दवा के दुष्प्रभाव शामिल हैं।''
इसके अलावा अस्थमा से पीड़ित लोगों में रासायनिक एनएए का स्तर भी कम होता है, जिससे उनकी याददाश्त कम हो जाती है। इसके अलावा अस्थमा के अटैक के दौरान ऑक्सीजन की कमी(low supply of oxygen to brain) हिप्पोकैम्पस को नुकसान पहुंचा सकती है जिससे उनके लिए कार्यों को सीखना कठिन हो जाता है।
पीएसआरआई हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर स्लीप मेडिसिन नीतू जैन ने आईएएनएस को बताया, ''अस्थमा में ब्रेन पर ओवरलोड की स्थिति पैदा हो जाती है। यह खासकर गंभीर अस्थमा से पीड़ित युवा और वृद्ध दोनों ही कमजोर समूहों के रोगियों में देखी जाती है। इससे सेरेब्रल हाइपोक्सिया (मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलना) भी हो सकता है। अस्थमा से जुड़ी याददाश्त की कमी वैश्विक है, जिसका शैक्षणिक और कार्यकारी कामकाज पर प्रभाव पड़ता हैै।''
''अस्थमा के मरीज अक्सर स्ट्रेस में रहते हैं। भावनात्मक परेशानी पैदा करने वाला कोई भी कारक अस्थमा के अटैक का कारणबन सकता है।''
एक्सपर्ट्स ने अस्थमा और न्यूरोलॉजिकल फंक्शन के बीच जटिल अंतर संबंध को समझने की कोशिश की है। उन्होंने उपचार रणनीतियों को अनुकूलित करने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए अस्थमा की देखभाल और तंत्रिका संबंधी दोनों पहलुओं पर ध्यान देने को कहा है।
(IANS)