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बहुत सी बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं होती। वैसे भी अधिकतर लोग डर और शर्म के कारण अपनी बीमारियों को छुपाते हैं। शारीरिक परेशानियों को दबाए रखना आपके लिए खतरनाक हो सकता है। जब तक बीमारी बढ़ने पर मर्ज का पता चलता है बहुत देर हो जाती है।
इसी तरह से थायरॉएड एक ऐसी बीमारी है जो पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक होती है। हर दस थायरॉएड के मरीजों में 8 महिलाएं होती हैं। थायरॉएड से ग्रस्त महिलाओं को मोटापा, तनाव, डिप्रेशन, बांझपन, कोलेस्ट्रॉल जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
क्या है थायरॉएड- थायरॉएड एक ग्रंथि है जो गर्दन में स्थित होती है। यह ग्रंथि थायोक्सिन नाम के हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया को विनियमित करने में मदद करती है। थायरॉयड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने का मतलब है कि शरीर का मेटाबॉलिज्म यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया का सही तरीके से काम करना, लेकिन थायरॉएड ग्लैंड के घटने या बढ़ने से परेशानी होती है।
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थायरॉएड के प्रकार- थायरॉएड दो प्रकार का होता है हाइपोथायरॉएड और हाइपरथायरॉएड।
थायरॉएड में अश्वगंधा से करें इलाज- आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में अश्वगंधा की मांग इसके अधिक गुणकारी होने के कारण बढ़ती जा रही है। अश्वगंधा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में प्रयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पौधा है।
थायरॉएड के इलाज में अश्वगंधा बहुत गुणकारी है। यह एक शक्तिवर्धक आयुर्वेदिक औषधि है। इसका सेवन करने से थायरॉएड को कंट्रोल किया जा सकता है। 200 से 1200 मिलीग्राम अश्वगंधा चूर्ण एक कप चाय के साथ मिला कर लें। आप चाहें तो अश्वगंधा की पत्तियों को पीस कर भी उपयोग में ला सकते हैं। इसके अलावा इसके स्वाद को बढ़ाने के लिए आप तुलसी का भी प्रयोग कर सकते हैं। हाइपोथायरॉएडिज्म के लिए आयुर्वेदिक इलाज में गुग्गल और अश्वगंधा के साथ भी इलाज किया जाता है।
थायरॉएड का मरीज नियमित रूप से अश्वगंधा का सेवन करे तो शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और काम करने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। साथ ही यह शरीर के अंदर का हार्मोन इंबैलेंस भी संतुलित कर देता है। यह टेस्टोस्टेरॉन और एंड्रोजन हार्मोन को भी बढ़ाता है। इस तरह से अश्वगंधा के उपयोग से थायरॉएड को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अश्वगंधा के उपयोग से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।