सॉफ्ट टिशू कैंसर से पीड़ित थे अरुण जेटली, जानें इस बीमारी के बारे में

सॉफ्ट टिशू सार्कोमा, फैट, मसल्स, नर्व्स, फाइबर टिश्यू, रक्त धमनियां या फिर डीप स्किन टिशू में विकसित होता है। वैसे तो ये शरीर के किसी भी हिस्से में पाए जा सकते हैं, लेकिन मुख्य तौर पर सॉफ्ट टिशू कैंसर की शुरुआत हाथ या पैर से होती है।

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Written By: Editorial Team | Updated : August 24, 2019 3:58 PM IST

पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली  का शनिवार को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान  में लंबी बीमारी के बाद निधन (Arun jaitley dies) हो गया। उन्‍होंने दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस (Arun jaitley dies) ली।  अरुण जेटली को कुछ दिन पहले ही सांस लेने में दिक्‍कत के कारण एम्‍स  में भर्ती कराया गया था। पिछले कुछ दिनों से उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही थी। अरुण जेटली सॉफ्ट टिशू कैंसर (Soft Tissue Cancer) से भी पीड़ित थे।

कैंसर दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही बीमारियों में से एक है। इस बीमारी का दायरा अब इतना ज्‍यादा बढ़ गया है कि इससे कोई भी वर्ग बच नहीं पा रहा। बॉलीवुड के कई सेलेब्‍स ऐसे हैं जिन्‍होंने अपनी मजबूत इच्‍छा शक्ति और  बेहतर इलाज से इस घातक बीमारी को हराया है। इन दिनों पूर्व वित्‍त मंत्री अरुण जेटली कैंसर से ही मुकाबला कर रहे थे। उन्‍हें अन्य बीमारियों के साथ सॉफ्ट टिश्‍यू कैंसर (Soft Tissue Cancer) भी था। जिसकी वजह से वे काफी कमजोर हो गए हैं। आइए जानते हैं कि क्‍या है कैंसर का यह रूप।

क्‍या है सॉफ्ट टिशू कैंसर

दरअसल, किडनी संबंधी बीमारी से ग्रसित अरुण जेटली का पिछले साल मई में किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। लेकिन किडनी के साथ-साथ जेटली कैंसर से भी जूझ रहे हैं। उनके बायें पैर में सॉफ्ट टिशू कैंसर हो गया है। जिसकी सर्जरी के लिए जेटली इसी साल जनवरी में अमेरिका भी गए थे। फिलहाल वह कीमो के दौर से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं।

पहचानें इसके लक्षण

शरीर के किसी भी हिस्से में कोई नई गांठ दिखे या फिर कोई गांठ जो बढ़ रही हो।

पेट में दर्द जो हर दिन धीरे-धीरे बढ़ रहा हो।

स्टूल या वॉमिटिंग में खून आना।

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सभी सॉफ्ट टिशू ट्यूमर कैंसरस नहीं होते

वैसे तो हमारे शरीर में कई तरह के सॉफ्ट टिशू ट्यूमर होते हैं, लेकिन सभी कैंसरस नहीं होते। सॉफ्ट टिशू में कई मामूली ट्यूमर भी होते हैं। जिसका मतलब है कि इनमें कैंसर नहीं होता और वे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल नहीं सकते। लेकिन जब इस तरह की बीमारी के साथ सार्कोमा शब्द जुड़ जाता है तो इसका मतलब है कि उस ट्यूमर में कैंसर विकसित हो गया है और वह घातक है।

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सार्कोमा की शुरुआत 

सार्कोमा एक तरह का कैंसर है जो हड्डी या मांसपेशियों के टिशू में शुरू होता है। बोन और सॉफ्ट टिशू सार्कोमा मुख्य तरह का सार्कोमा होता है। सॉफ्ट टिशू सार्कोमा, फैट, मसल्स, नर्व्स, फाइबर टिश्यू, रक्त धमनियां या फिर डीप स्किन टिशू में विकसित होता है। वैसे तो ये शरीर के किसी भी हिस्से में पाए जा सकते हैं, लेकिन मुख्य तौर पर सॉफ्ट टिशू कैंसर की शुरुआत हाथ या पैर से होती है। 50 से भी ज्यादा अलग-अलग तरह का होता है सॉफ्ट टिशू सार्कोमा। इनमें से कुछ तो बेहद रेयर होते हैं।

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