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2 से 16 साल के बच्चों में अर्थराइटिस के दिखते हैं ये आम लक्षण! जानें माता-पिता को कब हो जाना चाहिए सतर्क
बदलते मौसम में अक्सर लोगों को अर्थराइटिस के दर्द की परेशानी बढ़ने की समस्या दिखती हैं, लेकिन अब 2 से 16 साल के बच्चों भी गठिया से पीड़ित होने लगे हैं। ज्यादातर बच्चों में जुवेनाइल इडियोपैथिक अर्थराइटिस की समस्या देखने को मिल रही हैं। यह स्थिति बढ़ते बच्चे में हड्डी विकास पर असर डालती है। इसलिए बच्चे में इस समस्या का निदान व इलाज तुरूंत होना काफी जरूरी है। इसके लिए माता-पिताने सतर्क रहना चाहिए और केवल डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।
बच्चों में गठिया को बचपन का गठिया या किशोर गठिया भी कहा जा सकता है। बचपन के गठिया का सबसे आम प्रकार जो बड़ी संख्या में बच्चों में देखा जाता है, वह जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (JIA) या जुवेनाइल रूमेटाइड आर्थराइटिसहै।
अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल (करोल बाग) के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. गौरव खेरा का कहना है कि बच्चों में असहनीय जोड़ों का दर्द, सूजन, थकान, भूख कम लगना, शरीर में अकड़न, बुखार, चलने में असमर्थता, दाने और लिम्फ नोड्स में सूजन यह आर्थराईटिस के मुख्य लक्षण हैं। बचपन के गठिया का सही कारण अभी तक समझ में नहीं आया है। लेकिन, गठिया के साथ बचपन में प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम नहीं कर पाती है जिसके कारण जोड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन आती है। एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन, हड्डी स्कैन और रक्त परीक्षणों की मदद से आर्थराइडिस का निदान किया जाता है।
डॉ. खेरा का कहना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए बच्चे को दवा, फिजियोथेरेपी, पोषण संबंधी सलाह, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन प्रबंधन और पर्याप्त आराम की सलाह डॉक्ट रद्वारा दी जाती हैं। इसके अलावा माता-पिता को अपने बच्चे पर ध्यान देना काफी जरूरी हैं। समय रहते निदान व इलाज हुआ तो बच्चा ठीक हो सकता हैं नहीं तो गठिया की समस्या हड्डियों के विकास को प्रभावित कर सकती है। बच्चे को बाद के जीवन में पतली हड्डियों (ऑस्टियोपोरोसिस) का सामना करना पड़ सकता है। आर्थराइटिस के कारण बच्चे की दैनिक गतिविधियों पर भी असर पड सकता हैं। इसलिए, समय पर उपचार का लक्ष्य बच्चे को स्वस्थ जीवन जीने में मदद करना है।
एक्सपर्ट बताते हैं कि जुवेलाइन इडियोपैथिक गठिया (जेआईए) तब देखा जाता है जब किसी की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला करती है। यह जोड़ों को नुकसान पहुंचाकर बच्चे के विकास और हड्डियों के विकास में बाधा डाल सकता है। बच्चे को असमान अंग और लंबे समय तक गंभीर दर्द भी होगा। उपचार का उद्देश्य दर्द और सूजन को कम करना, कार्य में सुधार करना और बच्चे में जोड़ों और हड्डियों की क्षति को रोकना।