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Written By: Atul Modi | Published : October 11, 2022 3:34 PM IST
हमारे हाथों व कलाईयों में कई छोटे-छोटे जॉइंट्स (जोड़) होते हैं जिनके चलते हम जूते के फीते बांधने से लेकर कम्प्यूटर के कीबोर्ड चलाने तक का काम करते हैं। इनके बिना छोटे से छोटा काम तक बेहद मुश्किल बन जाता है। अर्थराइटिस या गठिया (Arthritis) होते ही इन जोड़ों के कामकाज पर तुरंत असर पड़ता है। अगर समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो हाथों की हड्डियों का आकार तक बदल सकता है। अर्थराइटिस और हाथों में अर्थराइटिस (हाथों में गठिया) के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमनेजुपिटर अस्पताल पुणे के आर्थोपेडिक और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रशेखर दीक्षित से कई सवालों के जवाब लिए, उन्होंने हमें विस्तार जानकारी दी है।
अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें जोड़ों के टिश्यू यानि ऊतक प्रभावित होते हैं। जोड़ों पर दो हड्डियां आपस में मिलती हैं और अर्थराइटिस हड्डियों के अंत में मौजूद मुलायम टिश्यू को प्रभावित करता है, जिससे हड्डियां आपस में रगड़ती हैं और धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं।
अर्थराइटिस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन ओस्टियो अर्थराइटिस, रयूमेटायड अर्थराइटिस और सोराइटिक अर्थराइटिस हाथ में होने वाले मुख्य प्रकार होते हैं। ओस्टियो अर्थराइटिस हाथों में होने वाला सबसे किस्म का अर्थराइटिस है जो कलाई, अंगूठे के जड़ व उंगलियों के ऊपरी भाग को प्रभावित करता है। रयूमेटायड अर्थराइटिस जोड़ो पर मौजूद परत को प्रभावित करता है जिससे सूजन और दर्द बढ़ता है और स्नायू तंत्र पर भी असर पड़ता है।
यह मुख्य तौर पर हाथों के छोटे जोड़ों को प्रभावित करता और इसकी सबसे खास बात यह है कि बाएं हाथ के जिस हिस्से में यह होता है, दाएं हाथ के उसी हिस्से में भी यह होता है। सोराइटिक अर्थराइटिस जोड़ों के साथ-साथ त्वचा को भी प्रभावित करता है तथा कई मायने में रयूमेटायड अर्थराइटिस जैसा ही है।
अर्थराइटिस हाथों में प्रमुख तौर पर अंगूठे के जड़, उंगलियों के बीच वाली जोड़ें और उंगलियों की ऊपरी जोड़ें को प्रभावित करती हैं। हाथों में आर्थराइटिस का खतरा मोटापे व बढ़ती उम्र के साथ बढ़ता है। ओस्टियो अर्थराइटिस 50 की उम्र के बाद और रयूमेटायड अर्थराइटिस के लक्षण आमतौर पर 35 व 50 की उम्र के बीच सामने आता है। इसके साथ ही हाथों में चोट लगने पर या फिर आनुवांशिक इतिहास होने पर अर्थराइटिस का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।
हाथों में अर्थराइटिस के कई लक्षण पहले से ही सामने आने लगते हैं, जिनकी अगर समय रहते पहचान कर ली जाए तो दर्द और तकलीफ़ से बचा जा सकता है। ये लक्षण हैं हाथों के जोड़ों में दर्द जो सुबह से लगातार बढ़ता जाता है, जोडों में नींद से उठने के बाद सूजन।
अर्थराइटिस की जांच के लिए हड्डियों का एक्सरे लिया जाता है जिससे जोड़ों में बदलाव को देखा जा सकता है। इसके अलावा रयूमेटायड आर्थराइटिस के लिए अलग से खून की जांच भी करनी पड़ती है।
हाथों में अर्थराइटिस के इलाज़ के लिए दवाईयों, इंजेक्शन के अलावा प्रभावित जोड़ों को सहारा देने के लिए ब्रेसों का इस्तेमाल किया जाता है। स्प्लिट या ब्रेस जोड़ों को सहारा देकर सूजन और दर्द को कम करता है। दवाईयों के अलावा बेहद अधिक दर्द या सूजन की स्थिति में स्टेरॉयड इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। साथ ही नियमित व्यायाम, आराम व हॉट-कोल्ड पैक के इस्तेमाल से भी फायदा होता है।
सबसे अहम है सही समय पर लक्षणों की पहचान व इलाज, जिससे दर्द से बचा जा सके।
(Inputs By: Dr. Chandrashekhar Dixit, Consultant - Orthopaedic and Joint Replacement Specialist, Jupiter Hospital, Pune)