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Arthritis Ka Dil Or Eyes Par Asar:अर्थराइटिस यानी गठिया आजकल हर वर्ग के लोगों के लिए एक आम बीमारी हो गई है। पहले के वक्त में जहां यह बीमारी बूढ़े बुजुर्गों में हुआ करती थी अब बच्चे बच्चे तक इससे पीड़ित होने लगे हैं अक्सर लोग गठिया के जोड़ों का दर्द और सूजन समझ लेते हैं लेकिन हकीकत इससे कहीं और भी ज्यादा चौंकाने वाली है। आर्टेमिस अस्पताल के ऑर्थो स्पाइन कंसल्टेंट डॉक्टर धीरज बठेजा ने बताया कि 'गठिया न सिर्फ जोड़ों को नुकसान पहुंचाता है बल्कि दिल आंखों और शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है जानते हैं आखिर घटिया कैसे दिल और आंखों को प्रभावित करता है।'
गठिया एक ऑटोइम्यून और इन्फ्लेमेटरी बीमारी है जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही टिशूज पर हमला करने लगती है। इससे धीरे-धीरे पूरे शरीर में सूजन फैल सकती है। इसके शुरुआती लक्षणों की बात करें तो दर्द, सूजन, जकड़न ही सबसे पहले नजर आते हैं। मरीज को सुबह उठने पर उंगलियां, घुटने में अकड़न महसूस होती है लेकिन अगर यही सूजन और जकड़न लंबे समय तक बनी रहती है, तो शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करती है।
अर्थराइटिस में शरीर में सूजन होता है और सूजन एथेरोस्क्लेरोसिस का एक बड़ा कारण बन सकती है। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें धमनियों की दीवारों में प्लाग बनने लगता है, इससे रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है और दिल तक रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। यह स्थिति हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है गठिया के मरीजों में यह खतरा सामान्य व्यक्ति की तुलना में ज्यादा देखा जाता है।
गठिया के कारणदिल के चारों ओर स्थित झिल्लीदार थैली यानी पेरिकार्डियम में सूजन हो सकती है। इसे पेरिकार्डाइटिस कहा जाता है। इससे रोगी को सीने में दर्द सांस लेने में तकलीफ और थकान महसूस हो सकती है।
सूजन के कारण दिल की मांसपेशियों पर भी असर पड़ता है। सूजन के कारण डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में शरीर की गहरी नसों खासकर पैरों में खून के थक्के बन जाते हैं। अगर यह धक्के टूट कर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो पलमोनरी एंबॉलिज्म जैसी गंभीर बीमारी पैदा हो सकती है।
गठिया से पीड़ित लोगों में ड्राई आई की समस्या हो सकती है। यह इम्यून सिस्टम से संबंधित एक विकार है और आर्थराइटिस वाले मरीजों में अक्सर पर देखा जाता है। ड्राई आई का इलाज न किया जाए, तो यह सिर्फ असुविधा पैदा नहीं करती, बल्कि आंखों में संक्रमण, कॉर्निया पर निशाना बनने का कारण बन सकती है। जिससे रोशनी प्रभावित हो सकती है।
अर्थराइटिस के कारण आंखों के ऊतकों में भी सूजन पैदा हो सकता है। इससे स्क्लेरा यानी आंखों के सफेद हिस्से में सूजन हो सकती है। इस स्थिति को एपिस्क्लेराइटिस कहा जाता है, जिसमें हल्का दर्द और लालिमा होती है। कुछ मामलों में सूजन ज्यादा गंभीर रूप ले लेती है, अगर वक्त पर इसका इलाज न किया जाए, तो दृष्टि को नुकसान हो सकता है।
सूजन के कारण कॉर्नियल अल्सर और अन्य गंभीर आंखों की समस्याएं हो सकती है। इसका भी अगर इलाज न किया जाए तो स्थाई दृष्टि नुकसान का कारण बन सकती है।
सूजन के कारण रेटिना की रक्त वाहिकाओं पर भी असर पड़ता है, जिससे उसमें ब्लॉकेज हो सकता है जिससे धीरे-धीरे दृष्टि हानि हो सकती है। अगर आपको गठिया (Arthritis) है और आप अपनी दृष्टि में बदलाव या अन्य आंखों से जुड़ी समस्याएं महसूस कर रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपकी आंखों में भी सूजन हो रही है।
आंखों की सूजन का इलाज केवल आंखों तक सीमित नहीं होता, इसके लिए पूरे शरीर में मौजूद गठिया से होने वाली सूजन को नियंत्रित करना जरूरी होता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहें और गठिया को नियंत्रित रखने के लिए उनके बताए अनुसार इलाज और दवाओं का पालन करें।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस जोड़ों को प्रभावित करने वाली एक क्रोनिक डिजीज है, जो गठिया का ही एक प्रकार है। यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है और इसलिए इसका कोई अब तक जड़ से इलाज नहीं मिल पाया है।
गठिया कई प्रकार का होता है। रूमेटाइड गठिया सबसे दर्दनाक होता है। यह जोड़ों की परत को प्रभावित करता है। यह हड्डियों को नष्ट कर सकता है।
गठिया में कलाई, कूल्हों, घुटनों और टखने पर गंभीर दर्द का अनुभव हो सकता है। इसकी वजह से व्यक्ति को चलने-फिरने में भी दिक्कत हो सकती है।
गठिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें यूरिक एसिड बढ़ जाता है। हाई यूरिक एसिड की वजह से क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं। इसकी वजह से जोड़ों में सूजन होने लगती है।