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सर्दी की चुभन और प्रदूषण बढा रहा है स्ट्रोक व हार्ट अटैक का खतरा। © Shutterstock
फरवरी का महीना आ चुका है, लेकिन ठंड है कि कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पूरे उत्तर भारत में जब पारा नीचे गिरकर सिंगल डिजिट में पहुंच चुका है। कड़ाके की ठंड और कोहरे की वजह से लोगों को हार्ट अटैक और स्ट्रोक की समस्या का अधिक सामना करना पड़ रहा है। पूरे दिल्ली-एनसीआर का तापमान अब भी नीचे है, जिसमें गुरुग्राम भी शामिल है। गुरुग्राम का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्शियस दर्ज हो रहा है। डॉक्टर्स का कहना है कि कड़ाके की ठंड हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देती है, खासतौर से उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही किसी प्रकार की कार्डियोवैस्कुलर बीमारी है।
ठंड के दिनों में बढ़ जाती है दिल के मरीजों की संख्या
पारस हॉस्पिटल, गुडगांव के डायरेक्टर एवम एचओडी, कार्डियोलॉजी डॉ. डी. के. झाम्ब कहते हैं,''दिल के मरीजों की संख्या में 7% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। शरीर में गर्माहट की कमी अथवा शरीर के भीतरी तापमान में गिरावट उन मरीजों के लिए खतरनाक स्थिति होती है, जिन्हें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां हैं। कोरोनरी हार्ट डिजीज वाले मरीज जब भी सर्द मौसम के सम्पर्क में आते हैं तब उन्हें अक्सर एंजाइना अथवा सीने में दर्द महसूस होता है।''
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ठंड दिल पर डालती है दबाव
कड़ाके की ठंड दिल पर काफी अधिक दबाव डालती है क्योंकि दिल गर्म रक्त को पम्प करके शरीर के सभी हिस्सों में पहुंचाता है। ठंड से नसें संकरी हो जाती हैं अथवा इनमें संकुचन आ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। मौसम में बदलाव के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी ऊपर-नीचे होने लगता है। ऐसे में जिन लोगों को बॉर्डरलाइन का कोलेस्ट्रॉल स्तर होता है, उन्हें ठंड के दिनों में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डब्लूएचओ का अध्ययन
भारत में दिल की बीमारियों का प्रसार बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आयोजित अ ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीजेज के अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2020 तक भारत में हर साल कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की वजह से 4.77 मिलियन मौतें होंगी और 2.58 मिलियन लोगों की जान कोरोनरी हार्ट डिजीज की वजह से जा सकती है।
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वायु की गुणवत्ता भी है वजह
कड़ाके की ठंड और दिल्ली-गुडगांव की हवा में घुले प्रदूषक तत्वों की वजह से लोगों को विंटर एलर्जी की समस्या भी बढ़ गई है। वायु की गुणवत्ता इन दिनों अधिकतर समय खराब ही रहती है, ऐसे में विंटर एलर्जी का यह सबसे बड़ा कारण बन जाता है जो शरीर पर कई तरह से हमला करता है। फ्लू को बढ़ावा देता है। लगातार कोल्ड की समस्या चलती रहती है। सांसें फूलने, अस्थमा और ऐसी कई अन्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। डॉ. झाम्ब कहते हैं कि करीब 15-20% अधिक मरीज दिल्ली से आ रहे हैं। हवा में कणों के मौजूदगी विंटर एलर्जी बढ़ाने का एक अन्य बड़ा कारण है। डस्ट एलर्जेंस सांस के जरिए हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और सीने में जकड़न की समस्या पैदा करते हैं। ठंड के मौसम में फेफड़े से संबंधित कई अन्य बीमारियां और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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