
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 26, 2018 4:43 PM IST
ताण: शारीरिक आणि मानसिक ताणामुळे तेलग्रंथीतून तेलाची निर्मिती अधिक प्रमाणात होते. ताणावर मात करण्यासाठी योगसाधना किंवा ध्यान केल्यास फायदा होईल. परिणामी त्वचा तेलकट होण्यास आळा बसेल.
'मुझे डिप्रेशन हुआ है'। आपने अपने आसपास यह शब्द कई बार सुने होगे और शायद कई लोगों से। आए दिन कोई कलाकार बताता है कि वह डिप्रेशन से गुज़र चुका है या उसे डिप्रेशन महसूस हो रहा है। जहां इस दिमागी अवस्था के बारे में बात करने के लिए हिम्मत की ज़रूरत पड़ती है। साथ ही यह हमें रोज़-रोज़ महसूस होनेवाले चिड़चिड़ेपन और झल्लाहट के बारे में सचेत करता है और उसके बारे में सोचने के लिए मज़बूर करता है। क्या हमारी यह भावनाएं हमारे डिप्रेशन के शिकार होने का सबूत हैं?
हमारे मन की स्थिति को परिभाषित करने के लिए 'तनाव' और 'अवसाद या डिप्रेशन' जैसे शब्दों का अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन बहुत से लोग इनके बीच का अंतर समझ नहीं पाते। हमें जो बात समझने की ज़रूरत है वह यह है कि यह दोनों स्थितियां अलग हैं और इनका हमारी ज़िंदगी और मन पर अलग-अलग तरीकों से असर पड़ता है।
क्या तनाव और डिप्रेशन एक ही समस्या नहीं हैं?
तनाव एक घटना या एक स्थिति से शुरू हो रहा है, जबकि डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जो दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है। डिप्रेशन या अवसाद किसी आनुवंशिक गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है।
अक्सर डिप्रेशन और तनाव के लक्षण वाली समस्याएं एक जैसी होती हैं और इसलिए इनके बीच अंतर समझ पाना मुश्किल होता है। लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव करने या उनका सामना करने से तनाव के लक्षणों से राहत पायी जा सकती है। लेकिन डिप्रेशन से राहत पाने के लिए आपको डॉक्टरी मदद की आवश्यकता पड़ सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि डिप्रेशन से परेशान व्यक्ति अगर सही समय पर डॉक्टर के पास जाए तो उसका इलाज संभव हो सकता है।
तनाव या डिप्रेशन में अंतर का पता कैसे चलता है ?
‘तनाव और डिप्रेशन में प्रमुख अंतर है यही है कि तनाव वाली स्थिति के गुज़रने के बाद आप सामान्य रुप से अपनी ज़िंदगी जी सकते हैं। लेकिन डिप्रेशन की स्थिति में अकेले, उदास, निरुत्साही होने की भावना पूरी ज़िंदगी भर महसूस हो सकती है। डॉ. सईदा ने बताया कि, डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति के मन से ये भावनाएं उनके मनपसंद कामों में उन्हें शामिल करने के बाद भी जल्दी नहीं जाती।’
डिप्रेशन के बाद जो मानसिक और शारीरिक बदलाव आते हैं वो काफी गम्भीर और लम्बे समय तक टिकनेवाले होते है। डिप्रेशन के कुछ लक्षण हैं सोने का वक़्त बदलना, थकान, मूड स्विंग, पश्चताप, निराशा और ज़िंदगी न जीने की इच्छा। यह दिमाग में केमिकल्स से जुड़े बदलावों के कारण होते हैं जो खुद-ब-खुद ठीक नहीं होते।
चित्रस्रोत- Shutterstock.