
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : June 8, 2026 3:35 PM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
स्ट्रेस के लक्षण
Bahut Jyada Neend Aane Ka Kya Matlab Hai: नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए उतनी ही जरूरी है जितना खाना और पानी। लेकिन अक्सर जब नींद जरूरत से ज्यादा होने लगे, खासकर बिना किसी शारीरिक कारण के, तो यह सिर्फ थकान नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा संकेत भी हो सकता है। कई बार लोग इसे नॉर्मल समझकर अनदेखा कर देते हैं कि “शायद मैं बस ज्यादा थक गया हूं”, लेकिन लगातार ज्यादा सोना यानी कि हाइपरसोमनिया कुछ मानसिक स्थितियों जैसे डिप्रेशन, तनाव या भावनात्मक थकावट का संकेत हो सकता है।
कैसे? साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट मालिनी सबा बताती हैं कि अधिक नींद आने के अलावा ऐसे 5 और जरूर संकेत हैं, जो मानसिक बीमार होने का संकेत दे सकते हैं और इन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तो ये कौन से साइन हैं, आइए विस्तार से जानते हैं।
अगर आप रात में 8–10 घंटे सोने के बावजूद दिनभर सुस्त और थके हुए महसूस करते हैं, तो यह सामान्य नहीं है। जैसे बार-बार लेटने का मन करना, काम में ध्यान न लगना और शरीर भारी महसूस होना। यह स्थिति अक्सर मानसिक थकावट या डिप्रेशन से जुड़ी हो सकती है, जिसमें दिमाग आराम नहीं कर पाता, चाहे शरीर सो रहा हो।
जब मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, तो व्यक्ति धीरे-धीरे अपने रोजमर्रा के कामों से दूरी बनाने लगता है। ऐसे में आपका ऑफिस या पढ़ाई में मन न लगना, छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से बचना, “बाद में कर लेंगे” की आदत बढ़ना आदि जैसी स्थितियां पैदा हो जाती है। इस स्थिति में नींद एक तरह का एस्केप बन जाती है।
जरूरत से ज्यादा सोने के साथ अगर लगातार उदासी या अंदर से खालीपन महसूस हो रहा है, तो यह एक गंभीर संकेत हो सकता है। इस दौरान व्यक्ति को किसी चीज में खुशी नहीं मिलती है, अकेलापन महसूस होता है और इमोशनल नम्बनेस होती है। यह लक्षण अक्सर डिप्रेशन या लंबे समय से चले आ रहे तनाव में देखे जाते हैं।
जरूरी नहीं है कि स्ट्रेस में आप ज्यादा ही सोएं, कुछ लोगों की स्ट्रेस की वजह से नींद उड़ जाती है तो कुछ लोग दिन में सोते हैं और रातभर जागते हैं। ऐसा होना दिन-रात का अंतर खराब कर देता है। यह शरीर की “बायोलॉजिकल क्लॉक” के बिगड़ने का संकेत हो सकता है, जो मानसिक तनाव से प्रभावित होती है।
मनोवैज्ञानिक रूप से, ज्यादा सोना कई बार दिमाग का खुद को इमोशनल दर्द, तनाव या ओवरथिंकिंग से बचाने का तरीका होता है, लेकिन जरूरी नहीं कि सभी के साथ ऐसा हो। यह कोई आलस नहीं, बल्कि एक संकेत है कि दिमाग को इमोशनल रिकवरी की जरूरत है।
अगर ये संकेत लगातार दिख रहे हैं, तो इन्हें हल्के में न लें। बल्कि अपनी दिनचर्या को स्टेबल करें, सुबह की धूप और हल्की एक्सरसाइज शामिल करें, स्क्रीन टाइम कम करें और किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। साथ ही जरूरत पड़े तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
डिस्क्लेमर: ज्यादा सोना हमेशा आराम का संकेत नहीं होता। कभी-कभी यह मानसिक थकावट, डिप्रेशन या भावनात्मक दबाव का एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण संकेत होता है। अपने शरीर और दिमाग के संकेतों को समझना ही बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की पहली शुरुआत है।