
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr Tushar Tayal
इनडोर एयर पोल्यूशन (Image Credit- ChatGPT)
हम घर से बाहर की जहरीली हवा से खुद को बचाने के लिए फेस मास्क का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन घर के अंदर की प्रदूषित हवा से खुद की सुरक्षा नहीं कर पाते हैं।बल्कि कई बार अनजाने में खुद ही परेशानियों को न्योता दे देते हैं। आज बाहरी हवा में मौजूद हानिकारक पॉल्यूटेंट्स को लेकर कई सारी रिसर्च और स्टडीज हैं, जबकि हमारा अधिकतर समय घर व ऑफिस के अंदर जाता है। फिर बात चाहे घर की हो या ऑफिस की, हम सभी बाहर आने-जाने से पहले परफ्यूम और बंद जगह में खुशबू के लिए रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करते ही हैं।
सी.के बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम के एसोसिएट डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर तुषार तायल के अनुसार “सुबह तैयार होते वक्त परफ्यूम की एक स्प्रे और कमरे में घुसते ही रूम फ्रेशनर की भीनी खुशबू, ये दोनों चीजें अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। सांस के जरिए अंदर जाने वाले उत्पादों के प्रभावों के बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है। लोगों को पता होना चाहिए कि जिन्हें वह महज सुगंध के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वह उनकी हेल्थ पर बुरा प्रभाव डाल सकती है।” आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि यह स्प्रे सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं।
हम अक्सर मान लेते हैं कि अगर कोई चीज खुशबूदार है, तो वो सुरक्षित भी होगी। या फिर इस पर ध्यान ही नहीं देते। लेकिन डॉक्टर सच्चाई बताते हुए कहते हैं कि ज्यादातर परफ्यूम और रूम फ्रेशनर में मौजूद खुशबू कई तरह के केमिकल कंपाउंड्स से तैयार की जाती है, न कि प्राकृतिक तत्वों से। इनमें अक्सर वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs) और बाकी खुशबू वाले केमिकल्स हो सकते हैं, जो हवा में मिलकर सांस के जरिए हमारे फेफड़ों तक पहुंचते हैं।
वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (Image Credit- ChatGPT)
अधिक जानकारी के लिए बता दें कि वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (VOCs) ऐसे केमिकल्स होते हैं जो नॉर्मल टैम्प्रेचर पर आसानी से हवा में घुल जाते हैं। ये पेंट, परफ्यूम, रूम फ्रेशनर, पेट्रोल, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स और कुछ फर्नीचर से भी निकल सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से आंखों और गले में जलन, सिरदर्द, सांस की समस्या हो सकती है। कुछ VOCs के लंबे समय तक और अधिक मात्रा में संपर्क में रहने को स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है। हालांकि यह जोखिम वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड के प्रकार, मात्रा और संपर्क की अवधि पर निर्भर करता है।
स्प्रे वाले प्रोडक्ट्स का सेहत पर असर (Image Credit- ChatGPT)
जब हम बार-बार इन प्रोडक्ट्स के बार-बार संपर्क में आते हैं, तो शरीर धीरे-धीरे इनके प्रति संवेदनशील हो सकता है। इसे लेकर डॉक्टर तुषार तायल कहते हैं कि कुछ लोगों को इससे सिरदर्द, गले में खराश, आंखों में जलन या सांस लेने में हल्की तकलीफ महसूस होती है। अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह समस्या और गंभीर हो सकती है, क्योंकि बंद कमरे में इन कणों की सघनता कहीं ज्यादा होती है।
डॉक्टर तुषार तायल के अनुसार “बाजार में मिलने वाले कई प्रोडक्ट्स पर "नेचुरल" या "ऑर्गेनिक" लिखा होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह हानिरहित हैं। एसेंशियल ऑयल्स भी अगर बहुत ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किए जाएं, तो सेंसिटिव लोगों में जलन पैदा कर सकते हैं। असल सवाल यह नहीं कि खुशबू नेचुरल है या सिंथेटिक, बल्कि यह है कि उत्पाद का इस्तेमाल कितनी बंद जगह में और कितनी देर तक इस्तेमाल हो रही है।”
डॉक्टर कहते हैं कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आपको परफ्यूम या फ्रेशनर का उपयोग करना छोड़ देना चाहिए। बस कुछ आसान बदलाव फर्क डाल सकते हैं। जैसे कमरे में हवा का आना-जाना बना रहने दें, स्प्रे करते समय इसे शरीर या चेहरे के बहुत नजदीक से न करें, और बंद गाड़ी या छोटे कमरे में लगातार स्प्रे करने से बचें। जिन लोगों को पहले से सांस की दिक्कत है, उन्हें कम खुशबू वाले या फ्रेशनर-फ्री जगहों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
खुशबू अच्छा महसूस कराने के लिए है, तकलीफ देने के लिए नहीं, बस थोड़ी समझदारी और संतुलन की जरूरत है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की सलाह पर आधारित है, लेकिन यह किसी चिकित्सीय परामर्श या उपचार का विकल्प नहीं है। लोगों द्वारा इस्तेमाल होने वाला परफ्यूम और रूम फ्रेशनर भले ही खुशबू अच्छी दें, लेकिन इनका अधिक इस्तेमाल सेहत पर असर डाल सकता है।