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World Obesity Day : पिछले एक दशक में बच्चों में मोटापे के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। बच्चों में बढ़ते मोटापे की परेशानी न सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में इस तरह की परेशानी देखने को मिल रही है। आज के समय में बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी देखने को मिल रही है। World Health Organization (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में करोड़ों बच्चे ओवरवेट या मोटापे का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बच्चों के बढ़ते मोटापे के पीछे माता-पिता की भूमिका है? इस विषय की जानकारी के लिए हमने मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में सीनियर डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं क्या बच्चों में बढ़ते मोटापे के पीछे माता-पिता होते हैं जिम्मेदार?
डॉक्टर संजय कहते हैं कि बच्चे वही सीखते हैं, जो वे घर में देखते हैं। यदि घर में जंक फूड, मीठे पेय और अनियमित भोजन की आदत सामान्य है, तो बच्चा उसी को स्वाभाविक मान लेता है। माता–पिता यदि स्वयं शारीरिक गतिविधि से दूर रहते हैं, तो बच्चों में भी सक्रिय जीवनशैली विकसित नहीं हो पाती। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का प्रतिबिंब है। इसलिए घर में पहले हेल्दी खाने की शुरूआत करना बहुत ही जरूरी हो जाता है।
मोबाइल, टैबलेट और टेलीविजन ने बच्चों की दिनचर्या बदल दी है। बाहर खेलना अब बच्चों में लगभग खत्म होता जा रहा है। वहीं, कई बार माता–पिता सुविधा के लिए बच्चों को स्क्रीन दे देते हैं, जिससे शारीरिक गतिविधि घटती है और कैलोरी खर्च कम होती है। लंबे समय तक बैठकर रहने की आदत मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ सकता है।
अक्सर आपने देखा होगा कि आपका बच्चा वही करता है, जो आप करते हैं। क्योंकि वो आपको अपना रोल-मॉडल मानते हैं। ऐसे में बच्चा अपनी लाइफस्टाइल की उन्हीं आदतों को अपनाएगा, जो उसके माता-पिता अपनाते हैं। यदि पेरेंट्स खुद एक्सरसाइज नहीं करते, जंक फूड ज्यादा खाते हैं या देर रात तक जागते हैं, तो ऐसी स्थिति में बच्चा भी इन्हीं आदतों को अपना सकता है। इसलिए कोशिश करें कि पहले आप एक हेल्दी जीवनशैली अपनाएं। इसके बाद बच्चा अपने आप उसे फॉलो करना शुरू कर देता है।
कुछ परिवारों में प्रेम या सांत्वना का माध्यम भोजन बन जाता है। अच्छा प्रदर्शन करने पर मिठाई, रोने पर चॉकलेट, या उदासी में तला हुआ भोजन देना एक पैटर्न बना देता है। इससे बच्चे भोजन को भावनात्मक सहारे के रूप में देखने लगते हैं, जो आगे चलकर अनियंत्रित खाने की आदत में बदल सकता है।
डॉक्टर का कहना है कि बच्चों का मोटापा सिर्फ आनुवंशिक कारणों से नहीं बढ़ता। घर का वातावरण, खानपान की आदतें और माता–पिता का व्यवहार निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा इस मोटापे की चपेट में न खाए, तो घर के वातावरण और उनके खानपान पर ध्यान दें।
डॉक्टर कहते हैं समाधान दोषारोपण में नहीं, बल्कि जागरूकता में है। यदि माता–पिता संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या अपनाएं, तो बच्चे भी उसी मार्ग पर चलना सीखेंगे। स्वस्थ आदतें उपदेश से नहीं, उदाहरण से विकसित होती हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।