
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
पीलिया और हेपेटाइटिस की बीमारी अलग-अलग होती है।
अक्सर जब किसी व्यक्ति की आंखें या त्वचा पीली पड़ जाती हैं, तो लोग तुरंत कह देते हैं कि उसे हेपेटाइटिस हो गया है। वहीं कुछ लोग पीलिया और हेपेटाइटिस को एक ही बीमारी मान लेते हैं। लेकिन सच यह है कि दोनों एक-दूसरे से जुड़े जरूर हैं, पर दोनों एक जैसी बीमारी नहीं हैं। इनके होने की वजह, जांच और इलाज अलग-अलग होते हैं। अगर समय रहते सही कारण का पता न लगाया जाए, तो लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि आखिर पीलिया और हेपेटाइटिस में फर्क क्या है। आज इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं पीलिया और हेपेटाइटिस में क्या अंतर है और इन दोनों ही बीमारियों के लक्षण क्या हैं, ताकि सही बीमारी में सही इलाज को अपनाया जा सके।
रांची स्थित भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. शेखर स्वरूप के अनुसार, पीलिया (जॉन्डिस) कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है। यह तब दिखाई देता है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ का स्तर असामान्य रूप से बढ़ने लगता है। इसके कारण सबसे पहले आंखों का सफेद हिस्सा पीला दिखाई देने लगता है, फिर धीरे-धीरे त्वचा का रंग भी पीला पड़ सकता है।
हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी है।
वहीं, बात हेपेटाइटिस की करें तो यह मुख्य रूप से लिवर में होने वाली सूजन की बीमारी है। यह वायरल संक्रमण, लंबे समय तक शराब का सेवन, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट या ऑटोइम्यून बीमारियों की वजह से हो सकती है। जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता, तब कई मामलों में बिलीरुबिन बढ़ जाता है और मरीज को पीलिया हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर पीलिया का कारण हेपेटाइटिस ही हो।
डॉ. शेखर स्वरूप बताते हैं कि हेपेटाइटिस की वजह से पीलिया हो सकता है, लेकिन पीलिया होने के पीछे कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। जैसे पित्त की पथरी, पित्त नली में रुकावट, लिवर की दूसरी बीमारियां या कुछ अन्य मेडिकल कंडीशन भी पीलिया का कारण बन सकती हैं। इसलिए सिर्फ आंखें पीली होने के आधार पर यह मान लेना कि व्यक्ति को हेपेटाइटिस है, यह कहना बिल्कुल भी सही नहीं होगा।
हमारे साथ खास बातचीत के दौरान डॉ. शेखर स्वरूप बताते हैं कि हर हेपेटाइटिस मरीज में पीलिया नहीं होता और हर पीलिया का मरीज हेपेटाइटिस से पीड़ित नहीं होता। यही कारण है कि सही जांच करना बेहद जरूरी होता है, ताकि बीमारी की असली वजह सामने आ सके और उसी के अनुसार इलाज शुरू किया जा सके। अगर आंखों या त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे, पेशाब का रंग गहरा हो जाए, लगातार कमजोरी और थकान महसूस हो, पेट के दाईं तरफ दर्द रहे, भूख कम लगने लगे या बार-बार मतली आए, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए, क्योंकि शुरुआती जांच से बीमारी की सही पहचान हो सकती है और इलाज भी समय पर शुरू किया जा सकता है।
इन दोनों बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. नचिकेत दुबाले, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स, पुणे कहते हैं- हर पीलापन हेपेटाइटिस नहीं होता, लेकिन हर पीलापेन की परेशानी की मेडिकल जांच होना बहुत जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं कि त्वचा या आंखों का पीला पड़ने के साथ अगर इसके साथ थकान, भूख में कमी, गहरे रंग का पेशाब या पेट में तकलीफ हो, तो यह जांच का समय है, खुद इलाज करने का नहीं है।
| पीलिया Jaundice | हेपेटाइटिस Hepatitis | |
| क्या है | एक लक्षण / निशानी | एक बीमारी / लिवर में किसी प्रकार की सूजन होना |
| मुख्य कारण | हेपेटाइटिस, पित्त की पथरी, खून की बीमारी, दवा, कैंसर | वायरस A,B,C,D,E, शराब, दवा, ऑटोइम्यून बीमारी के कारण होता है। |
| इलाज | कारण का इलाज करना पड़ता है | कारण के हिसाब से एंटीवायरल, आराम, दवा से इलाज किया जाता है। |
| क्या हर पीलिया हेपेटाइटिस है? | नहीं | नहीं। शुरुआती स्टेज में पीलिया नहीं दिखता है। |
| क्या हर हेपेटाइटिस में पीलिया होता है? | नहीं | हां, हेपेटाइटिस में पीलिया हो सकता है। |
WHO की Global Hepatitis Report 2024 के अनुसार दुनिया भर में लगभग 32.4 करोड़ लोग Hepatitis B और C से ग्रस्त हैं। इनमें से ज्यादातर को पता ही नहीं होता क्योंकि शुरुआती सालों तक कोई लक्षण नहीं दिखता। वहीं Indian Journal of Medical Research, 2023 में छपी स्टडी बताती है कि भारत में पीलिया के 60% केस वायरल हेपेटाइटिस A और E की वजह से होते हैं। खासकर मानसून में दूषित पानी पीने से Hepatitis A और E फैलता है।
Disclamier: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आपको हेपेटाइटिस या पीलिया से जुड़ी कोई समस्या है इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।