
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : April 15, 2026 1:17 PM IST
Medically Verified By: Dr. Sanjay Gupta
Are High Uric Acid cause Fatty Liver Doctor explains: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खानपान और कम होती फिजिकल एक्टिविटी के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें यूरिक एसिड का बढ़ना और फैटी लिवर जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है- क्या बढ़ता हुआ यूरिक एसिड फैटी लिवर का कारण बन सकता है? आज हम इसी विषय पर चर्चा करने वाले हैं। इस विषय पर अधिक जानकारी दे रहे हैं डॉ. संजय गुप्ता। डॉक्टर बताते हैं कि यूरिक एसिड (High Uric Acid) एक केमिकल है जो शरीर में प्यूरीन (Purine) नामक पदार्थ के टूटने से बनता है। सामान्य स्थितियों में यूरिक एसिड को किडनी फिल्टर करती है और पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है। लेकिन जब किसी व्यक्ति के शरीर में जरूरत से ज्यादा यूरिक एसिड बनने लगता है और पेशाब के जरिए बाहर नहीं निकल पाता है, तो शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है। वहीं, फैटी लिवर (Fatty Liver Causes) उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है।
पबमेड सेंट्रल की वेबसाइट पर छपी रिसर्च बताती है कि शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर और फैटी लिवर के बीच बहुत ही गहरा कनेक्शन है। हालांकि सीधे तौर पर हाई यूरिक एसिड, फैटी लिवर का कारण नहीं बनता है। लेकिन हाई यूरिक एसिड के कुछ कारक हैं जो नॉन- अल्कोहोलिक फैटी लिवर का कारण बन सकता है। आइए आगे जानते हैं उन कारकों के बारे में, जो फैटी लिवर का कारण बनते हैं।
डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि हाई यूरिक एसिड शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को कम कर देता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस का बढ़ा हुआ स्तर फैटी लिवर होने की मुख्य वजहों में से एक है। इसके साथ ही, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड लिवर में फैट के जमाव को बढ़ा सकता है, जिससे NAFLD की संभावना बढ़ जाती है।
डॉक्टर का कहना है कि शरीर में बढ़ा हुआ यूरिक एसिड सूजन को बढ़ाते हैं। इसे इंफ्लेमेशन कहा जाता है। हाई इंफ्लेमेशन भी फैटी लिवर के मुख्य कारणों में से एक है।
हाई यूरिक एसिड, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से भी जुड़ा हुआ है। यह भी चीजें मिलकर मेटाबॉलिक सिंड्रोम का कारण बनती है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम के कारण फैटी लिवर होना एक आम समस्या मानी जाती है।
यूरिक एसिड का असर शरीर के कई अंगों पर पड़ता है।
डॉ. संजय गुप्ता का कहना है कि यह बात कहना गलत होगा कि सभी हाई यूरिक एसिड के पीड़ित व्यक्ति को फैटी लिवर की समस्या हो ही जाएगी। बढ़े हुए यूरिक एसिड के कारण कुछ लोगों को फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है। इसमें शामिल हैः
हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि हाई यूरिक एसिड के कारण फैटी लिवर की समस्या न हो, इसके लिए नीचे बताई गई चीजों से परहेज करें।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
हां, नींबू पानी का नियमित सेवन यूरिक एसिड को कम करने में मददगार हो सकता है। नींबू पानी में मौजूद विटामिन C और साइट्रिक एसिड शरीर को डिटॉक्सिफाई करते हैं और यूरिक एसिड के क्रिस्टल को घोलकर किडनी के जरिए बाहर निकालते हैं।
यूरिक एसिड बढ़ने (हाइपरयूरिसीमिया) के मुख्य संकेतों में जोड़ों में अचानक तेज दर्द (विशेषकर पैर के अंगूठे में), सूजन, लाली, जोड़ों में अकड़न (सुबह के समय), चलने-फिरने में कठिनाई और त्वचा में गर्माहट महसूस होना शामिल है।
गठिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें यूरिक एसिड बढ़ जाता है। हाई यूरिक एसिड की वजह से क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं। इसकी वजह से जोड़ों में सूजन होने लगती है।