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क्या प्रदूषण से बच्चों में भी हार्ट डिजीज बढ़ रही हैं? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स

Is Heart Disease Caused Due to Pollution : बढ़ता प्रदूषण लोगों में कई तरह की परेशानियां बढ़ा रहा है। मुख्य रूप से बच्चों को कई तरह की परेशानी हो रही है, जिसमें हार्ट डिजीज शामिल है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-

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Written By: Mishra Kishori | Updated : December 16, 2024 1:41 PM IST

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Medically Verified By: Dr Abhijit Borse

Is Heart Attack Caused Due to Pollution in Children : बढ़ता प्रदूषण न सिर्फ हमारे वातावरण को खराब कर रहा है बल्कि ये हमारी हेल्थ के लिए एक बहुत सीरियस मुद्दा बन गया है। पिछले कुछ समय से हम सब पढ़ रहे हैं कि प्रदूषण अपने चरम पर है जिससे श्वास संबंधी कई बीमारियां बढ़ चुकी हैं। रिपोर्ट्स साफतौर पर दावा कर रही हैं कि बढ़ते प्रदूषण के चलते बच्चों में भी कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का रिस्क बढ़ गया है। मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में डॉक्टर अभिजीत बोरसे आज हमें विस्तार से बताएंगे कि पल्यूशन कैसे बच्चों में हार्ट की बीमारियों को बढ़ा रहा है।

प्रदूषण और बच्चों में हार्ट डिजीज

क्योंकि छोटे बच्चों के लगभग सभी अंग विकासशील स्टेज में होते हैं, यानि कि बच्चों के अंग उनकी उम्र के साथ मेच्योर होते रहते हैं ऐसे में उन्हें प्रदूषण ज्यादा प्रभावित करता है। साथ ही बच्चों के वजन के कारण भी वो ज्यादा ऑक्सीजन लेते हैं जो अगर सही नहीं है तो उनके फेफड़ों पर सीधा डालती है। पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), और ग्राउंड-लेवल ओजोन (O₃) जैसे प्रदूषक फेफड़ों और रक्तप्रवाह में गहराई तक प्रवेश करते हैं और सूजन पैदा करते हैं। डॉक्टर के अनुसार ये सूजन बच्चों में हृदय संबंधी बीमारियों का कारणबनती है।

हार्ट डैमेज होने के शुरुआती लक्षण

अध्ययनों से पता चलता है कि उच्च स्तर के वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाले बच्चों में हार्ट डैमेज के निम्न लक्षण दिख सकते हैं:

  • रक्तचाप में वृद्धि: वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से बच्चों में रक्तचाप बढ़ जाता है, जो आगे चलकर हृदय रोग के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है।
  • धमनियों में कठोरता: प्रदूषण में मौजूद कण धमनियों में कठोरता ला सकते हैं, जिससे रक्त वाहिकाओं के फैलने और सिकुड़ने की क्षमता खराब हो जाती है, जिससे हृदय पर दबाब बढ़ जाता है।
  • सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव: प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से पुरानी सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव हो सकता है, रक्त वाहिका की दीवारों को नुकसान पहुंच सकता है और सामान्य हृदय कार्य बाधित हो सकता है।
  • हृदय रोग की घटनाओं में वृद्धि. खराब वायु गुणवत्ता के लंबे समय तक संपर्क में रहने से लंबे समय में हृदय संबंधी बीमारियों की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

जब छोटे बच्चे लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं तो इसका असर उनकी हेल्थ पर तुरंत नहीं दिखता है। हालांकि, प्रदूषक तत्व शुरुआत से ही बच्चों के अंगों को डैमेज करना शुरू कर देते हैं, जो उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस और यहां तक ​​​​कि हार्ट फेलियर जैसी स्थितियों की नींव रखती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि वायु प्रदूषण विश्व स्तर पर लाखों समय से पहले होने वाली मौतों में योगदान देता है, और इस संकट से निपटना भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को अधिक खतरा

शहरी क्षेत्रों या औद्योगिक क्षेत्रों के पास रहने वाले बच्चों को प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण ज्यादा खतरा रहता है। सामाजिक आर्थिक कारक भी भूमिका निभाते हैं; सीमित संसाधनों वाले परिवार जोखिम को कम करने या स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच पाने में असमर्थ हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी असमानताएं बढ़ सकती हैं।

प्रदूषण की वजह से खराब होते हार्ट हेल्थ को कैसे रखें सुरक्षित? 

बच्चों के हृदय स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव से निपटने के लिए निम्न कदम जरूर उठाए जाने चाहिए:

  • सार्वजनिक जागरूकता: समुदायों को वायु प्रदूषण के खतरों के बारे में शिक्षित करना, ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना और अधिक प्रदूषण के समय बाहरी गतिविधियों से बचने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • स्वास्थ्य देखभाल: उच्च प्रदूषण स्तर के संपर्क में आने वाले बच्चों में हृदय स्वास्थ्य के लिए प्रारंभिक जांच और हस्तक्षेप सुनिश्चित करना दीर्घकालिक प्रभावों को कम कर सकता है।
  • वैश्विक सहयोग: वायु प्रदूषण एक वैश्विक मुद्दा है जिसके लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और संसाधनों को साझा करने से प्रगति में तेजी आ सकती है।

वायु प्रदूषण और बच्चों के हृदय स्वास्थ्य के बीच का संबंध पर्यावरण के साथ हो रहे अन्याय और बढ़ती परेशानी की ओर इशारा करता है। प्रदूषण से बच्चों के हार्ट को बचाना न सिर्फ एक चिकित्सीय आवश्यकता है बल्कि एक नैतिक अनिवार्यता भी है। स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण को प्राथमिकता देकर, हम अपने बच्चों और धरती के भविष्य की रक्षा कर सकते हैं।