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कठिन परिस्थितियों में चिंतित व्यक्तियों का निर्णय पर बेहतर नियंत्रण होता है - रिसर्च

रिसर्च में इस बात का पता चला कि जो लोग चिंता जैसी समस्या से ग्रस्त होते हैं वो बेहतर निर्णायक होते हैं।

कठिन परिस्थितियों में चिंतित व्यक्तियों का निर्णय पर बेहतर नियंत्रण होता है - रिसर्च

Written by akhilesh dwivedi |Updated : June 22, 2018 12:49 PM IST

इस तरह के रिसर्च कितने चौकाने वाले होते हैं, जब पता चलता है कि जो लोग चिंता जैसी समस्या से परेशान होते हैं वो कठिन परिस्थितियों में बेहतर निर्णय ले सकते हैं। हाल ही में हुए एक रिसर्च में इस बात का पता चला कि जो लोग चिंता जैसी समस्या से ग्रस्त होते हैं वो बेहतर निर्णायक होते हैं।

इस शोध को 20 लोगों के बीच किया गया जो लोग चिंता जैसी समस्या से परेशान थे। उन लोगों को रिस्क लेने वाले गेम को एक साथ खेलने को कहा गया और उनके ब्रेन को इलेक्ट्रोइन्सेफ्लोग्राम के माध्यम से रीड किया गया और देखा गया की जब गेम में अत्यधिक खतरा था तो उनके ब्रेन का रिस्पांस कैसा था।

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शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग चिंता जैसी समस्या से परेशान थे उन लोगों में निर्णय के समय हाई फ्रंटल मिडलाइन थिटा पावर पाया गया, जो ज्यादा नियंत्रण को दर्शाता है। हायर फ्रंटल मिडलाइन थिटा पावर ने अनुमान को बेहतर बनाया, खतरे को कम खतरनाक होने या उससे आगे बढ़ने की समझ दी।

मुख्य लेखक डॉ बारबरा सचमिड्ट, फ्रेटरिक शिलर यूनिवर्सिटी, जेना के अनुसार ''हमने इस शोध में पाया कि अत्यधिक चिंता से परेशान इंसान खतरनाक परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेता है। इससे जाहिर होता है कि वे नकारात्मक परिणामों से बचने की कोशिश करते हैं।''

डॉ बारबरा के अनुसार ''यह शोध चिंता, फ्रंटल मिडलाइन थिटा पावर और खतरनाक परिस्थितियों में निर्णय के बीच एक लिंक प्रदान करता है। यह रोमांचक है, क्योंकि इसका मतलब है कि फ्रंटल मिडलाइन थिटा पावर इंसान के व्यवहार को प्रभावित करता है।''

स्रोत: ANI.

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चित्रस्रोत: Shutterstock.

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