
Also Read
सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से भी आप एंग्जाइटी का शिकार हो सकते हैं। © Shutterstock
अक्सर हम लोग छोटी-छोटी चीजों को लेकर तनाव ले लेते हैं। कई बार होता है कि आपकी शाम की फ्लाइट है और सारा दिन आप इसी चिंता में रहते हैं कि कहीं आपकी फ्लाइट छूट न जाए। कई बार एग्जाम हॉल में पहुंचते ही आप घबरा जाते हैं और सारा पढ़ा हुआ भी भूल जाते हैं। तनाव के शिकार लोग अक्सर इस तरह के डरों का सामना करते हैं। इससे मुंह का सूखना और सांस का टूटना और भी ज्यादा बढ़ जाता है। इससे आप धीरे-धीरे एंग्जाइटी के शिकार होते चले जाते हैं। एंग्जाइटी आपके मानसिक सेहत के लिए सही नहीं है। ध्यान लगाकर आप इस समस्या से बच सकते हैं। यदि आप यह काम भी सही से नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको सोचने की जरूरत है। इस बात पर गौर करें कि कहीं आपकी एंग्जाइटी का कारण आपकी रोजमर्रा की आदतें तो नहीं हैं?
इसे भी पढ़ें- तनाव से पाना है छुटकारा, तो ऑफिस में रहें शारीरिक रूप से एक्टिव
सोशल मिडिया पर ज्यादा समय बिताना
सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से भी आप एंग्जाइटी का शिकार हो सकते हैं। हाल ही में किए गए कुछ शोधों में सामने आया है कि सोशल मीडिया जिसमें कि खासकर फेसबुक पर अधिक समय बिताना एंग्जाइटी का कारण बनता है। ऑस्ट्रेलियन साइकोलॉजी सोसायटी ने एक शोध में पाया है कि फेसबुक पर समय बिताने वाले लगभग 50 प्रतिशत लोग फोमो (फीयर ऑफ मिसिंग आउट) जिसका मतलब है पीछे छूट जाने का डर का शिकार हो जाते हैं। आज किशोर और कई बार वयस्क भी नींद के आगे सोशल मिडिया को चुनते हैं, जिसके कारण उनकी नींद की आदत गड़बड़ा जाती है। ऐसे लोगों में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है और असली दुनिया से कट जाते हैं। अक्सर सोशल मिडिया पर चकाचौंध की जिंदगी और फिट शेप वाले लोगों की फोटो को देखकर आप डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। व्यक्ति का जितना ज्यादा समय सोशल मिडिया पर बीतता है, उससे उसके डिप्रेशन के स्तर से जोड़कर देखा जा सकता है। इसे भी पढ़ें- कील-मुंहासों से बढ़ता है तनाव, जानें कैसे
शारिरिक श्रम से बचना
हम सब को शारीरिक मेहनत का महत्व पता है। इसके बावजूद कितने लोग इसको अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उतारते हैं? कई बार बिल्कुल भी मेहनत न करना आपकी एंग्जाइटी का कारण हो सकता है। एंग्जाइटी में इंसान पूरे दिन थका-थका महसूस करता है, जिसके चलते वह मेहनत करने से बचने लगता है। शारिरिक मेहनत से आपका शरीर तो मजबूत होता है, साथ ही सांस लेने में भी आसानी रहती है। मेहनत करने से आपके दिमाग को फायदा पंहुचाने वाले केमिकल बनते हैं। जान लें, आपका शरीर काम करने के लिए बना है और यदि आप इससे काम नही लेगें तो आपको शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह से नुकसान होगा। इसे भी पढ़ें- तनाव है, तो इन आयुर्वेदिक औषधियों से पाएं तनाव मुक्त जीवन
अकेले समय बिताना
पूरा दिन घर में अकेले बिताने से भी आपको एंग्जाइटी हो सकती है। दिन में कुछ घंटे घर के बाहर बिताएं। नए लोगों से या दोस्तों से मिलें। लोगों के साथ समय बिताने से आपका तनाव कम होगा और आपकी एंग्जाइटी भी शांत रहेगी। अकेले होने पर दिमाग में कई बार उल्टे-सीधे विचार आने लगते हैं। ऐसे में आपको कोशिश करनी चाहिए कि पूरा दिन कुछ न कुछ करते रहें, जिससे आप इन ख्यालों से बच सकते हैं।
खान-पान का ख्याल न रखना
ठीक से खाना न खाना भी आपकी एंग्जाइटी को और आक्रामक बना सकता है। ज्यादा खाना या फिर बिल्कुल ही नहीं खाना दोनों ही तरह से एंग्जाइटी आपके खाने की आदत को प्रभावित करती है। ऐसे में आपको दोनों ही परिस्थितियों में अपने आप पर कंट्रोल करना होगा और सही समय पर पौष्टिक भोजन लेने की कोशिश करें। आपका शरीर तो तंदरुस्त रहेगा ही आप मानसिक तौर पर भी हल्का महसूस करेंगे।
एल्कोहल का इस्तेमाल
आपके लिए सबसे गलत तो तब होगा जब आप एंग्जाइटी से लड़ने के लिए एल्कोहल का सहारा लेंगे। अक्सर लोग सोचते हैं कि एल्कोहल के सेवन से एंग्जाइटी से निजात पाया जा सकता है जबकि होता इसका उल्टा है। एल्कोहल आपके लिए सिर्फ हानिकारक ही साबित होगा। यदि आप पहले से ही एल्कोहल लेते हों तब भी एंग्जाइटी के समय इसे छोड़ देना ही अच्छा विकल्प होगा। दरअसल, एल्कोहल आपके दिमाग पर सीधा असर डालता है और सेरोटोनीन (केमिकल जो आपको खुशी का अहसास कराता है) का स्तर घटा देता है। इससे शरीर डिहाइड्रेटेड (शरीर में पानी का कमी) भी हो जाती है।