पेशाब पर लग रहीं हैं चींटियां, ये हो सकता है डायबिटीज का लक्षण

खून में जब शक्‍कर की मात्रा बढ़ जाती है तो वह यूरीन में भी आने लगती है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 14, 2018 11:24 AM IST

डायबिटीज अथवा मधुमेह खून में शक्कर की बीमारी है जो कि शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण होती है। इंसुलिन पेन्क्रियाज नामक ग्रंथि से निकलने वाला तरल पदार्थ है जो खून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करता है। यह मूलत: पैदायशी कारणों से होती है लेकिन अक्सर 35 साल की आयु के बाद ही लक्षण सामने आते हैं। अन्य अंग जैसे पेंक्रियाज, थायराइड, प्रेगनेन्सी व लिवर आदि की बीमारियों से भी मधुमेह हो सकता है।

बच्‍चे भी आ रहे हैं चपेट में 

दुर्भाग्‍यवश अब यह बीमारी छोटे बच्‍चों में भी नजर आने लगी है। यदि परिवार में किसी को भी पहले से यह बीमारी है, तब भी बच्‍चों का बहुत ध्‍यान रखने की जरूरत है। क्‍योंकि उनके इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना और बच्‍चों से अधिक है।

डायबिटीज के लक्षण

डायबिटीज के शुरूआत में कोई लक्षण नहीं होते। बाद में अधिक पेशाब लगना तथा अधिक भूख लगना व पेशाब में चींटी लग जाना, कमजोरी होना, वजन कम होना, खुजली होना एवं नपुंसकता, हाथ पैर में झनझनाहट, घाव समय पर न भरना आदि लक्षण दिखाई महसूस होने लगते हैं।

जरूरी है जांच

इसमें खून की जांच, फास्टिंग ब्लडशुगर, पोस्ट प्राडियल ब्लडशुगर, साथ ही पेशाब जांच, गुर्दों, हृदय एवं नेत्रों की जांच नियमित की जानी जरूरी है।

ऐसे करें बचाव

  • केवल खान पान में परहेज द्वारा एवं दवा गोली द्वारा या इंसुलिन इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है। मधुमेह में खान पान में परहेज करना चाहिए। इसमें शक्कर युक्त भोजन सीमित मात्रा में लेना चाहिए। चीनी, आलू, चावल, आदि का परहेज करना चाहिए।
  • इसमें सभी मरीजों को अपनी सेहत की देख भाल स्वयं करनी चाहिए। कुछ बातों की ओर विशेष ध्यान दें। नाखून काटते समय ख्याल रखना चाहिए कि अन्य कोई घाव न बने। सभी मरीजों को अपनी जेब में परिचय पत्र रखना चाहिए तथा समय-समय पर अपने पेशाब की जांच स्वयं करनी चाहिए।
  • सभी मरीजों को मोटापे से बचना चाहिए तथा खाली पेट दवा कभी नहीं खानी चाहिए। सुबह जितना हो सके पैदल चलना चाहिए।

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हो सकता है दुष्‍प्रभाव

  • इसमें गुर्दे खराब हो सकते हैं।
  • आंखों की रोशनी जा सकती है।
  • गलत इलाज के कारण शक्कर की मात्रा में अधिक कमी आ सकती है।
  • शक्कर की मात्रा अन्य रूपों से अधिक बढ़ सकती है।
  • इलाज सही न होने के कारण मरीज के हाथ पैर में सूजन आ सकती है।

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हर महीने करवाएं टेस्‍ट

इसके अतिरिक्त अन्य बीमारियां जैसे टी. बी., पेशाब में संक्रमण, खुजली आदि भी हो सकती है। इसमें खून की जांच प्रत्येक मास करनी चाहिए एवं हृदय, गुर्दों, नेत्र तथा और अंगों की जांच कम से कम एक साल में एक बार अवश्य करवानी चाहिए। इस प्रकार से अगर हम बीमारियों को जान कर उन पर ध्यान देना शुरू कर दें तो निश्चय ही परेशानी से बचा जा सकता है।

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