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Inflammatory bowel disease: एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से बुजुर्गो में को हो सकता IBD, जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय

क्रोहन्स बीमारी और अल्सरेटीव कोलाइटिस जैसी बीमारियों से ग्रसित होने में एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन की भूमिका रही है। (Antibiotics Side Effects)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 15, 2022 6:29 PM IST

Antibiotics Side Effects: एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से बुजुुर्गों में इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज का खतरा बढ़ता है। एक नयी स्टडी में यह दावा किया गया है कि,  60 साल या उससे अधिक आयु के मरीजों को जितना अधिक एंटीबायोटिक दिया जायेगा, उतना ही उनके इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (Inflammatory bowel disease) से ग्रसित होने की संभावना बढ़ती जायेगी। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता एडम एस फाये के अनुसार, 60 साल और उससे अधिक आयु के लोगों में क्रोहन्स बीमारी (Crohn's disease) और अल्सरेटीव कोलाइटिस जैसी बीमारियों से ग्रसित होने में एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन की भूमिका रही है। (Antibiotics Side Effects In Hindi.)

अधिक उम्र में एंटीबायोटिक्स का सेवन गम्भीर नुकसानदायक

स्टडी के लिए, लगभग 23 लाख मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने डेनमार्क के नेशनल डाटाबेस का इस्तेमाल किया। यह सभी लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड का डाटाबेस है। शोधकर्ताओं ने 2000 से 2018 के बीच आईबीडी से ग्रसित होने वाले 60 साल और उससे अधिक आयु के लोगों को लिखी जाने वाली दवाओं के रिकॉर्ड देखे।  शोधकर्ताओं का कहना है कि,

  • शोधकर्ताओं ने देखा कि उन मरीजों को एंटीबायोटिक का कौन सा कोर्स किया है और उन्होंने हाल ही में कब एंटीबायोटिक ली थी।
  • उन्होंने पाया कि एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से आईबीडी से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है और जैसे-जैसे मरीज अन्य एंटीबायोटिक का कोर्स करता है, वैसे-वैसे यह संभावना भी बढ़ती जाती है।
  • एक कोर्स के बाद मरीज के आईबीडी से ग्रसित होने की संभावना 27 प्रतिशत अधिक बढ़ जाती है। एंटीबायोटिक का दो कोर्स करने पर यह जोखिम 55 प्रतिशत और तीन कोर्स करने पर 67 प्रतिशत बढ़ जाती है।
  • चार कोर्स करने पर यह संभावना 96 प्रतिशत और पांच या उससे अधिक कोर्स करने पर 236 प्रतिशत बढ़ जाती है।
  • वहीं, अन्य व्यस्कों में पर्यावरणीय कारक जेनेटिक्स से अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि जब क्रॉन बीमारी और अल्सरेटीव कोलाइटिस से ग्रसित युवा मरीजों के रिकॉर्ड को देखा जाये तो पता चलेगा कि उनकी फैमिली हिस्ट्री मजबूत रही है। लेकिन अधिक आयु के लोगों के मामले में ऐसा नहीं है यानी पर्यावरण में कुछ ऐसा है जिससे यह हो रहा है।

IBD के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Inflammatory bowel disease)

  • क्रैम्प्स और पेट में दर्द
  • डायरिया
  • बहुत अधिक तनाव महसूस करना
  • पेट साफ ना होना, कॉन्स्टिपेशन या कब्ज की शिकायत
  • एसिडिटी (Acidity) और खट्टी डकारें आना
  • अनिद्रा और नींद से जुड़ी समस्याएं (Sleeping disorders)

IBD से बचाव के उपाय क्या हैं?

कुछ बातों से जुड़ी सावधानी बरतने से आईबीडी के लक्षणों से आराम मिल सकता है-

  • स्ट्रेस मैनेजमेंट सीखे। इसके लिए एक्सरसाइज, योगाभ्यास और मेडिटेशन करें।
  • चाय-कॉफी और कैफीनयुक्त ड्रिंक्स का सेवन कम करें।
  • हेल्दी डाइट अपनाएं।
  • दिनभर में 2-3 लीटर पानी पीएं।
  • अल्कोहल के सेवन और स्मोकिंग से बचें।
  • स्पाइसी और ऑयली फूड का सेवन कम करें।
  • डाइटरी फाइबर से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।

(आईएएनएस)