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बार-बार Antibiotic लेने से शरीर को क्या नुकसान हो सकते हैं?

क्या आप हल्की-फुल्की बुखार होने पर एंटी-बायोटिक ले लेते हैं? अगर हां, तो यह आपके पूरे शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आइए इस विषय को इस लेख के जरिए विस्तार से समझते हैं-

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 23, 2026 11:51 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Sri Karan Uddesh Tanugula

जब भी हमें या हमारे बच्चों को बुखार, गले में खराश, खांसी या कोई इन्फेक्शन होता है, तो अक्सर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। इनमें कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जो पुरानी बची हुई दवाओं का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। वहीं, कुछ लोग मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं। लेकिन क्या ऐसा करना सेहत के लिए सुरक्षित होता है? सीधे तौर पर इसका जवाब ना ही होगा। बिना डॉक्टरी पर्चे के अगर आप बार-बार एंटी-बायोटिक्स लेते हैं, तो कई तरह की गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।

दुनियाभर के कई हेल्थ एक्सपर्ट्स और विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस बात को लेकर कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं। उनका कहना है कि एंटीबायोटिक का गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की परेशानी का खतरा बढ़ा सकता है। हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में सीनियर कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन डॉ. श्री करण उद्देश तनुगुला का कहना है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं और फिर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं उन पर असर करना बंद कर देती हैं। आइए इस विषय को अच्छे से समझते हैं-

क्या होती है एंटीबायोटिक?

डॉक्टर का कहना है कि एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं हैं, जो बैक्टीरिया से होने वाले इनफेक्शन को खत्म करने या उनके बढ़ाने को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। इनका उपयोग निमोनिया, टाइफाइड, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, स्किन इन्फेक्शन और कई अन्य बैक्टीरियल बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

Dr. Sri Karan Dr. Sri Karan

इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी एंटीबायोटिक वायरस पर असर नहीं करतीं। इसलिए सामान्य सर्दी-जुकाम, फ्लू, अधिकतर मामलों में होने वाले गले के वायरल संक्रमण और कई तरह के बुखार में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। इन स्थिति में अगर आप एंटी-बायोटिक लेते हैं, तो  इससे फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है।

बार-बार एंटीबायोटिक लेने से क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति बार-बार या बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेता है, तो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया धीरे-धीरे दवा के खिलाफ मजबूत होने लगते हैं। समय के साथ ये बैक्टीरिया उस दवा को पहचानने लगते हैं और उसके प्रभाव से बचने के तरीके विकसित कर लेते हैं। ऐसे में जब मरीज को सच में एंटीबायोटिक  की जरूरत होती है, तो उसके शरीर में यह दवा काम करना बंद कर देती है। ऐसी स्थिति में इलाज करना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्या है?

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है, जब बैक्टीरिया दवाओं के प्रभाव से बचने की क्षमता विकसित कर लेते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर दवा के प्रति प्रतिरोधी हो गया है, बल्कि संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया दवा से प्रभावित नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को बार-बार एक ही एंटीबायोटिक दी जाती है, तो बैक्टीरिया उसमें बदलाव कर लेते हैं। बाद में वही दवा इन्फेक्शन को कंट्रोल नहीं कर पाती है।

एंटीबायोटिक्स के नुकसान क्या हैं?

Side Effects of Anti BioticsImage Credit : ChatGPT

1. इलाज करना हो जाता है मुश्किल  : जब बैक्टीरिया सामान्य एंटीबायोटिक से नहीं मरते, तो डॉक्टरों को ज्यादा शक्तिशाली और महंगी दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ता है। कई बार मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है।

2. लंबे समय तक बना रहता है इन्फेक्शन  : रेजिस्टेंट बैक्टीरिया शरीर में लंबे समय तक एक्टिव रह सकते हैं। इससे बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती और मरीज को अधिक समय तक तकलीफ झेलनी पड़ती है।

3. गंभीर जटिलताओं का खतरा : अगर इन्फेक्शन समय पर कंट्रोल न हो, तो यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकता है। कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

4. इलाज का खर्च बढ़ जाता है : जब सामान्य दवाएं काम नहीं करतीं, तो महंगी एंटीबायोटिक, अतिरिक्त जांच और लंबे समय तक हॉस्पिटल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है। इससे मरीज और उसके परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

एंटीबायोटिक दवाओं का आंत पर क्या असर पड़ता है?

हमारी आंत में काफी ज्यादा गुड बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो पाचन, इम्यून सिस्टम और पूरे हेल्थ के लिए जरूरी हैं। ऐसे में बार-बार एंटीबायोटिक लेने से ये गुड बैक्टीरिया भी नष्ट हो सकते हैं। इससे आंतों से जुड़ी कुछ परेशानियां हो सकती हैं, जैसे-Antibiotic Side effects

  1. पाचन संबंधी समस्याएं
  2. पेट दर्द
  3. दस्त
  4. गैस और ब्लोटिंग
  5. इम्यूनिटी में कमजोरी
  6. बार-बार दस्त होने का खतरा, इत्यादि।

कई लोगों को एंटीबायोटिक लेने के बाद दस्त की शिकायत हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि दवा अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के बैक्टीरिया को प्रभावित करती है। कुछ मामलों में क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइ, जैसे खतरनाक संक्रमण का जोखिम भी बढ़ सकता है।

एंटी-बायोटिक्स दवाओं से होने वाली एलर्जी

इस बात का ध्यान रखें कि हर दवा की तरह एंटीबायोटिक से भी एलर्जी होने चांस होते हैं, जैसे-

Antibiotic Allergy

  • स्किन पर चकत्ते होना।
  • खुजली की परेशानी होना।
  • मतली और उल्टी जैसा महसूस होना।
  • पेट खराब होना
  • चक्कर आना
  • सांस लेने में परेशानी, इत्यादि।

कुछ लोगों में गंभीर एलर्जिक रिएक्शन भी हो सकते हैं, जिनके लिए तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।

बच्चों पर क्या असर पड़ सकता है?

बच्चों में बार-बार एंटीबायोटिक का उपयोग विशेष चिंता का विषय है। रिसर्च बताते हैं कि शुरुआती उम्र में अत्यधिक एंटीबायोटिक उपयोग से गट माइक्रोबायोम प्रभावित हो सकता है। कुछ अध्ययनों में इसे मोटापा, एलर्जी और कुछ प्रतिरक्षा संबंधी समस्याओं के बढ़ते जोखिम से भी जोड़ा गया है। हालांकि इस विषय पर अभी और रिसर्च जारी है।

बीच में क्यों नहीं छोड़नी चाहिए दवा?

कई लोग जैसे ही बेहतर महसूस करते हैं, एंटीबायोटिक लेना बंद कर देते हैं। यह एक बड़ी गलती है। यदि दवा का पूरा कोर्स पूरा नहीं किया जाता, तो कुछ बैक्टीरिया जीवित बच सकते हैं। यही बैक्टीरिया आगे चलकर रेजिस्टेंस विकसित कर सकते हैं और संक्रमण दोबारा हो सकता है।

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एंटीबायोटिक का सही इस्तेमाल कैसे करें?

कई रिसर्च और सीडीसी की रिपोर्ट्समें भी बताया गया है कि एंटी-बायोटिक का इस्तेमाल करना चाहिए, जिसके लिए आप कुछ बातों पर ध्यान दे सकते हैं, जैसे-

  1. डॉक्टर की सलाह पर ही लें, कभी भी खुद से एंटीबायोटिक शुरू न करें।
  2. एंटी-बायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स पूरा करें, डॉक्टर द्वारा बताए गए दिनों तक दवा लें। भले ही आप पहले बेहतर महसूस करने लगें।
  3. दूसरों की दवा इस्तेमाल न करें। कई बार देखा होगा कि लोग अक्सर दूसरे व्यक्ति की बची हुई दवा का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिसकी वजह से परेशानी बढ़ सकती है।
  4. वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक दवा लेने की गलती बिल्कुल भी न करें। ध्याान रखें कि सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी वायरल बीमारियों में अक्सर एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती।
  5. दवा का डोज न बदलें, खुद से डोज बढ़ाना या घटाना नुकसानदायक हो सकता है।

भारत के लिए क्यों है बड़ी चिंता?

भारत दुनिया में एंटीबायोटिक इस्तेमाल करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की उपलब्धता, सेल्फ मेडिकेशन और जागरूकता की कमी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को बढ़ावा दे रही है। कई हेल्थ एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई, तो आगे मरीजों का सामान्य संक्रमणों का इलाज भी बेहद मुश्किल हो सकता है।

Disclaimer : एंटीबायोटिक आधुनिक चिकित्सा की सबसे जरूरी खोजों में से एक हैं, लेकिन इनका गलत इस्तेमाल गंभीर समस्या बनता जा रहा है। बार-बार और बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से न सिर्फ दवाओं का असर कम हो सकता है, बल्कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, आंत के स्वास्थ्य में गड़बड़ी, साइड इफेक्ट्स और गंभीर संक्रमणों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए अगली बार जब आपको सर्दी, खांसी या बुखार हो, तो खुद से एंटीबायोटिक लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें। एंटीबायोटिक का जिम्मेदारी से उपयोग करना न सिर्फ आपकी, बल्कि पूरे समाज की सेहत के लिए जरूरी है।