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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 15, 2021 11:03 AM IST
घर में घुसकर आपको अपना शिकार बनाती है ये 1 बीमारी, लक्षण कोरोना जैसे लेकिन सावधानी बचा सकती है आपकी जान
मानसून अपने साथ मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी को भी ले आता है। मलेरिया एक संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है। मच्छर के काटने से परजीवी (पैरासाइट) को स्वस्थ शरीर के अंदर जाने का रास्ता मिल जाता है। इसके बाद ये परजीवी खून में मिल जाते हैं जिससे ये फिर ब्लड फ्लो द्वारा लीवर तक पहुंच जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रकाशित विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2019 के अनुसार 89 देशों में मलेरिया के अनुमानित 228 मिलियन केसेस मिले थे। 2018 में वैश्विक स्तर पर इस बीमारी से 405,000 लोगों की जान चली गयी थी। डब्ल्यूएचओ ने दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के तीन देशों का मलेरिया का डाटा लिया था। जो इस क्षेत्र में कुल रिपोर्ट किए गए केसेस का 98 प्रतिशत था, जिनमें से भारत में मलेरिया के 58% केसेस थे। सबसे बुरी बात यह है कि मलेरिया बड़ी संख्या में छोटे बच्चों को घातक रूप से प्रभावित करता है।
मलेरिया से पीड़ित होने वाले मरीज में जो लक्षण शुरुआत में दिखते हैं उनमे तेज बुखार के साथ कंपकंपी ठंड लगना शामिल होता है। मलेरिया है या नहीं यह ब्लड टेस्ट और शारीरिक टेस्ट के साथ लक्षणों को जांच कर किया जाता है। किसी व्यक्ति की पहले के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और वर्तमान शारीरिक स्थिति के आधार पर मलेरिया की गंभीरता अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकती है।
आमतौर पर मलेरिया के लक्षण और संकेत संक्रमित मच्छर द्वारा काटे जाने के कुछ ही हफ्तों के अंदर दिखना शुरू हो जाते हैं। नीचे बताये गए लक्षणों को मरीज तब अनुभव कर सकता है जब उसे संक्रमित मादा मच्छर काटती है।
मच्छर काटने के अलावा भी मलेरिया निम्न तरीकों से फ़ैल सकता है।
गर्भवती मां से अजन्मे बच्चे में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इंजेक्शन में इस्तेमाल की गयी सुइयों के द्वारा भी मलेरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फ़ैल सकता है।
हालांकि इस घातक बीमारी के इलाज के लिए अब कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं जिन्हें बहुत ही सावधानी और नियमित सलाह के अंतर्गत खाना चाहिए। लेकिन मलेरिया को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप सावधानियों को अमल में लाएं और रोकथाम के बारे में जानें। सबसे आसान तरीका यह सुनिश्चित करना है कि मच्छरों के काटने से बचे रहें। मलेरिया फैलने का यह एक प्राथमिक कारण मच्छर का काटना होता है। मलेरिया को नियंत्रित करने और इसे आगे फैलने से रोकने के लिए कुछ निवारक उपाय नीचे दिए जा रहे हैं:
हमेशा पूरी बांह के कपड़े पहनें
जो त्वचा कपड़े से न ढक मिले उसकी सुरक्षा करने के लिए इन्सेक्ट रेपेलैंट का प्रयोग करें। रिकमेंडेड रेपेलैंट में 20-35% N N, N-Diethylmeta-toluamide(DEET) होता है। इन रेपेलैंट को लगाने के बाद इन्हें फिर से भी लगाना जरूरी होता है। जो त्वचा न ढक मिलती हो उस पर इन्सेक्ट रेपेलैंट का छिड़काव करने के अलावा कपड़ों पर भी इन्सेक्ट रेपेलैंट का छिड़काव करना महत्वपूर्ण होता है। पतले कपड़े न पहने क्योंकि इससे मच्छर काट सकते हैं। साथ ही टाइट कपड़े की जगह ढीले-ढाले कपड़े पहनें।
अगर आपका बेडरूम एसी वाला या स्क्रीन वाला नहीं है, तो बिस्तर पर मच्छरदानी का उपयोग करना सबसे प्रभावी तरीका होता है। एडवांस सुरक्षा के लिए व्यक्ति कीटनाशक पर्मेथ्रिन के साथ मच्छरदानी का उपयोग कर सकता है।
अपने घर और आसपास को साफ और स्वच्छ रखना बहुत जरूरी है
घर के दरवाजे और खिड़कियां न खुला रखें क्योंकि रात में मच्छरों को इनके जरिये आने का ज्यादा खतरा होता है।
जब बीमारी को नियंत्रित करने की बात आती है, तो ज्यादा तापमान वाले बुखार जैसे लक्षणों पर नज़र रखें। जैसे ही आपको मलेरिया के किसी भी संभावित लक्षण का पता चले, तुरंत अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें।
स्थिति के आधार पर मरीज डॉक्टर के पर्चे के आधार पर मलेरिया-रोधी गोलियां खा सकता है। डॉक्टर आमतौर पर 2 हफ्ते के कोर्स को अमल में लाने की सलाह देते हैं। इस कोर्स का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। अब तक मलेरिया को फैलने से रोकने और इसे कम करने का सबसे प्रभावी तरीका वेक्टर नियंत्रण को अपनाना रहा है। फरवरी 2016 में भारत सरकार ने मलेरिया उन्मूलन 2016-2030 के लिए राष्ट्रीय रूपरेखा शुरू की और जुलाई 2017 में मलेरिया उन्मूलन 2017-2022 के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना शुरू की ताकि 2027 तक भारत को मलेरिया से मुक्त देश बनाने की दिशा में काम किया जा सके। और 2030 तक मलेरिया का पूरी तरह से सफाया किया जा सके। पर्याप्त वेक्टर नियंत्रण वाली रणनीतियों और सरकारी अधिकारियों और आम लोगों द्वारा अपनाए गए प्रभावी सावधानी वाले उपायों से इस घातक बीमारी के प्रसार को रोका जा सकता है और इस बीमारी का उन्मूलन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
(इनपुटः कोलंबिया एशिया हॉस्पिटलए गाज़ियाबाद के इंटरनल मेडिसिन डॉ. दीपक वर्मा)