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Bird Flu in India: पशुपालन आयुक्त ने कहा, बर्ड फ्लू से डरने की जरूरत नहीं, अच्छा तरह से पकाकर खा सकते हैं चिकन, अंडे।
Bird Flu in India in Hindi: कोरोना का खतरा अभी तक टला नहीं है कि देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू (Bird flu) का खतरा शुरू हो गया है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है बर्ड फ्लू की रोकथाम (Bird Flu Prevention in hindi) के लिए चाकचौबंद प्रबंध किए गए हैं और सभी प्रकार के जरूरी उपाय किए जा रहे हैं, इसलिए चिकन या अंडे खाने से डरने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार में पशुपालन आयुक्त डॉ. प्रवीण मलिक का। डॉ. मलिक ने कहा कि मुर्गों में बर्ड फ्लू की इस साल अभी तक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर पुष्टि होती भी है, तो डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस दिशा में पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है। बर्ड फ्लू (Bird flu in india) की खबर आने के बाद देश में चिकन और अंडे की बिक्री घट गई है, क्योंकि लोग घबराए हुए हैं। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर पशुपालन आयुक्त ने कहा कि अंडे और चिकन को अगर सही तरीके से पकाकर खाएं (Eat chicken in bird flu) तो यह पूरी तरह सुरक्षित है, इसलिए घबराने या डरने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में हालांकि, बड़ी संख्या में पॉल्ट्री बर्ड यानी मुर्गों की मौत हुई है, लेकिन इसकी वजह बर्ड फ्लू (Bird Flu in Haryana in Hindi) है या नहीं इसकी भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (एनआईएचएसएडी) भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत आने वाले एनआईएचएसएडी को देश के अन्य राज्यों से भी पक्षियों की असामान्य मौत को लेकर नमूने लगातार भेजे जा रहे हैं। डॉ. मलिक ने बताया कि अब तक चार राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें से राजस्थान और मध्यप्रदेश में कौव्वों में जबकि हिमाचल प्रदेश में प्रवासी पक्षियों में और केरल में घरेलू बतख में बर्ड फ्लू (Bird Flu in India in Hindi) की रिपोर्ट है। उन्होंने बताया कि केरल में पहले रोकथाम के उपायों के तहत पक्षियों को मारने की प्रक्रिया को अमल में लाया जा चुका है।
पॉल्ट्री बर्ड में जहां कहीं भी बर्ड फ्लू यानी एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian influenza) की रिपोर्ट मिलती है, वहां प्रभावित फार्म के सारे पक्षियों और एक किलोमीटर के एरिया में लोगों ने जो भी पक्षी पाल रखा है, सबको खत्म कर दिया जाता है और सरकार की ओर से लोगों को उसका मुआवजा दिया जाता है। इसके बाद अगले 10 किलोमीटर तक निगरानी बढ़ा दी जाती है और उस क्षेत्र से नमूने लेकर जांच करवाते हैं। इसके बाद पोस्ट सर्विलांस ऑपरेशन चलता है। इसमें दो-तीन महीने रिपोर्ट निगेटिव रहती है, तो फिर उसे बर्ड फ्लू मुक्त एरिया घोषित कर दिया जाता है।"
डॉ. मलिक ने बताया कि इसके अलावा वाइल्ड बर्ड यानी जंगली पक्षी के मामले में जो सावधानियां व उपाय हैं, उनको भी अमल में लाया जाता है। जंगली बर्ड में इस बीमारी की पुष्टि होने पर किए जाने वाले उपायों के बारे में उन्होंने बताया कि जहां पक्षियों की मौत की रिपोर्ट मिलती है, वहां पहले सुरक्षा बढ़ा दी जाती है और मृत पक्षियों का तुरंत निपटान करने की बात करते हैं और मानव की आवाजाही कम कर दी जाती है और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। मसलन, चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट आने पर वहां विजिटर्स की आवाजाही रोक दी जाती है।
डॉ. मलिक ने बताया कि दुनिया में बर्ड फ्लू 1996 में प्रकाश में आई, लेकिन भारत में यह 2006 में आने से एक साल पहले 2005 में ही इससे बचाव की कार्ययोजना बना ली गई थी। उन्होंने बताया कि 2006 के बाद से सर्दियों में लगातार दो-तीन राज्यों में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट मिलती रही है और इस दौरान कार्य योजना में भी बदलाव किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में पक्षियों की असामान्य मौत की रिपोर्ट इस साल अब तक राजस्थान, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, केरल के अलावा हरियाणा से आई है, लेकिन दूसरे राज्यों से भी नमूने भोपाल भेजे गए हैं, उनमें से कई नमूने निगेटिव आए हैं।
इनपुट: (आईएएनएस हिंदी)