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Anil Kapoor Suffers From Right Shoulder Calcification: राम लखन, मिस्टर इंडिया, वेलकम, नायक, लाडला और बेटा जैसी फिल्मों में यादगार किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाने वाले अनिल कपूर का आज 69 वां जन्मदिन है। एक्टर की फिटनेस और लुक्स को देखकर कोई नहीं कह सकता है कि वह अगले साल 70 के भी हो जाएंगे। खैर इस फिटनेस के पीछे उनकी कंसिस्टेंसी है,जिसे वह कभी टूटने नहीं देते हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी आया था जब झक्कास जैसा फेमस डायलॉग देने वाले अनिल कपूर अपने ही कंधे के दर्द के बोझ तले दबे जा रहे थे।
दरअसल 2019 में अनिल कपूर अपने सीधे कंधे पर कैल्सीफिकेशन के जूझ रहे थे। इस दौरान उन्हें बहुत ही ज्यादा दर्द सहन करना पड़ रहा था। उन्हें यह समस्या पहले से थी, लेकिन 2019 में उन्होंने खुद इसे सबके साथ शेयर किया। उनके कंधे में कैल्सीफिकेशन होने का कारण फिल्मों में स्टंट करना था। लेकिन यह कैल्सीफिकेशन होता क्या है? कैसा होता है और क्या इसका इलाज संभव है या नहीं? यह सवाल हर कोई जानना चाहता है। इसलिए हमने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन की कंसल्टेंट डॉक्टर मनीषा शंभार्कर से बात की। आइए जानते हैं उन्होंने कैल्सीफिकेशन के बारे में क्या बताया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अनिल कपूर लगभग 2017 से उनके सीधे कंधे में कैल्शियम जमा हो रहा है और जिसकी वजह से उनकी परेशानियां बढ़ती जा रही थीं। इसलिए उन्होंने 2019 में फैसला लिया और अपना इलाज कराना चाहा। उनके कंधे में कैल्सीफिकेशन होने का कारणफिल्मों में स्टंट करना था। इलाज के बाद वह बिल्कुल ठीक हैं। लेकिन यह कैल्सीफिकेशन होता क्या है? कैसा होता है और क्या इसका इलाज संभव है या नहीं, आइए डॉक्टर से जानते हैं।
शोल्डर कैल्सीफिकेशन, जिसे मेडिकल भाषा में कैल्सीफिक टेंडिनाइटिस कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें रोटेटर कफ के टेंडन के अंदर कैल्शियम जमा हो जाता है, जो आमतौर पर सुप्रस्पिनेटस टेंडन में होता है। ये जमाव कंधे के जोड़ की सामान्य स्लाइडिंग मूवमेंट में रुकावट डालते हैं और आसपास की मांसपेशियों और टिशू को परेशान कर सकते हैं। इसके कारण अक्सर कंधे में डीप पेन होता है, अकड़न होती है और हाथ उठाने या घुमाने में मुश्किल होती है। खासकर सिर के ऊपर की गतिविधियों के दौरान या प्रभावित तरफ सोने पर। कुछ मामलों में, दर्द अचानक हो सकता है और काफी तेज हो सकता है।
डॉक्टर ने बताया कि इसका सटीक कारण हमेशा पता नहीं होता है, लेकिन यह आमतौर पर खराब टेंडन हीलिंग और बार-बार तनाव के कारण होता है। टेंडन में खून का बहाव कम होने से रोजाना की छोटी-मोटी चोटों को ठीक करने की उसकी क्षमता सीमित हो सकती है, जिससे समय के साथ कैल्शियम जमा हो सकता है।
बार-बार कंधे का इस्तेमाल, लंबे समय तक खराब पोस्चर, उम्र से संबंधित टेंडन में बदलाव और हार्मोनल या मेटाबॉलिक प्रभाव जैसे कारक जोखिम बढ़ा सकते हैं। यह स्थिति आमतौर पर बनने, आराम करने और फिर से अवशोषित होने के चरणों से गुजरती है। दर्द अक्सर अवशोषण चरण के दौरान बढ़ जाता है, जब शरीर सक्रिय रूप से कैल्शियम जमाव को तोड़ने और अवशोषित करने की कोशिश करता है।
इलाज ज्यादातर बिना सर्जरी वाला बहुत प्रभावी होता है। फिजियोथेरेपी दर्द से राहत, मूवमेंट को वापस लाने और कंधे की ताकत में सुधार पर केंद्रित होती है। इसमें हल्के स्ट्रेचिंग, रोटेटर कफ और शोल्डर ब्लेड की मांसपेशियों को धीरे-धीरे मजबूत करना, पोस्चर में सुधार और टेंडन पर तनाव कम करने के लिए गतिविधि में बदलाव शामिल हैं।
दर्द से राहत के लिए बर्फ, गर्मी या इलेक्ट्रोथेरेपी जैसी विधियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर लक्षण बने रहते हैं या दर्द गंभीर है तो एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा, कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन या शॉकवेव थेरेपी जैसे मेडिकल विकल्पों की सलाह दी जा सकती है। सर्जरी केवल दुर्लभ मामलों में ही की जाती है, जब कई महीनों के व्यवस्थित इलाज के बाद भी लक्षण बने रहते हैं।
शोल्डर कैल्सीफिकेशन खतरनाक या स्थायी नहीं है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज 1285991किया जाए तो यह काम करने में बाधा बन सकता है। लगातार दर्द रोजाना के कामों, काम और नींद में रुकावट डाल सकता है और लंबे समय तक मूवमेंट में रुकावट से सेकेंडरी अकड़न या फ्रोजन शोल्डर का खतरा बढ़ सकता है।
अच्छी बात यह है कि शुरुआती निदान, निर्देशित फिजियोथेरेपी और लगातार व्यायाम से ज्यादातर लोगों को दर्द में काफी राहत मिलती है और कंधे का पूरा या लगभग पूरा काम वापस मिल जाता है, जिसका लंबे समय तक न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
अनिल कपूर की वर्कआउट रूटीन में कार्डियो, वेट ट्रेनिंग और फंक्शनल ट्रेनिंग शामिल होती है।
शरीर को आराम देना अनिल कपूर रोजाना 7-8 घंटे की नींद जरूर लेते हैं।
इसके लिए फिजियोथेरेपी, ब्रेसिंग (बच्चों में), व्यायाम और दर्द प्रबंधन का उपयोग किया जाता है।
छोटे बच्चों की हड्डियां विकसित हो रही होती हैं और इसलिए पूरी तरह से विकसित न हुई होने के कारण वयस्कों की तुलना में उनकी हड्डियां कमजोर होती हैं।