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Written By: Yogita Yadav | Published : November 30, 2018 1:44 PM IST
दुनिया भर में एड्स को महामारी मानते हुए इसके रोकथाम और निदान के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, इसमें कुछ विकसित राष्ट्रों की स्थिति एशिया और अफ्रीका के देशों से बेहतर है। © Shutterstock
एड्स दुनिया भर के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। इस महामारी को समझते हुए विकसित राष्ट्र इसके निदान को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रहे हैं। इसी का प्रमाण है अमेरिका का पीईपीएफएआर बिल।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही 15 साल पहले शुरू हुए एचआईवी/एड्स सहायता कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए एक बिल पर हस्ताक्षर करेंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, पेंस ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में आगामी विश्व एड्स दिवस को चिन्हित करने के लिए आयोजित समारोह में गुरुवार को यह घोषणा की।
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पांच साल और बढ़ाई बिल की अवधि
सीनेट ने बुधवार को प्रेसीडेंट्स इमरजेंसी प्लान फॉर एड्स रिलीफ (पीईपीएफएआर) के लिए राष्ट्रपति की आपातकालीन योजना को पांच साल तक बढ़ाने वाले एक बिल को मंजूरी दी और इसे ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस भेजा।
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राष्ट्रपति करेंगे इस पर हस्ताक्षर
सदन ने इस महीने के शुरू में इसी तरह का एक बिल पारित किया था। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने पीईपीएफएआर को कानून बनाने के लिए 2003 में इस पर हस्ताक्षर किए थे।
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एशियाई देशों से बेहतर है पश्चिमी राष्ट्रों के प्रयास
इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट के प्रोजेक्ट ग्लोबेटरोटर (Globetrotter) में प्रस्तुत विस्तृत रिपोर्ट में गोल्डमैन सैक्स की रिसर्च विंग की उपाध्यक्ष साल्वेन रिक्टर ने लिखा है यह सच है कि दुनिया के कई हिस्सों में, एचआईवी वायरस को रोकथाम और देखभाल की तकनीकों द्वारा नियंत्रण में लाया गया है। इसका एक पक्ष यह है कि संपन्न देशों में हेल्थ केयर का बुनियादी ढांचा अभी उतना खराब नहीं है। यहां के दवा उद्योग में वायरस को काबू करने वाली कुछ ज्यादा असरकारी दवाएं मौजूद हैं। जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों जैसे अफ्रीका और एशिया में एचआईवी वायरस बहुत खतरनाक स्थिति में है। अफ्रीकी महाद्वीप के बड़े हिस्से में 25 वयस्कों में से 1 एचआईवी से ग्रस्त है। वे इसके लिए फार्मा कंपनियों के नेक्सस और खराब नीतियों को जिम्मेदार ठहराती हैं।
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