
राहुल शर्मा
राहुल शर्मा एक युवा और तेज तर्रार युवा पत्रकार हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से ... Read More
Written By: Rahul Sharma | Published : June 24, 2025 6:30 PM IST
Medically Verified By: Dr Anjana Kalia
सफेद दाग, जिसे चिकित्सा की भाषा में विटिलिगो कहा जाता है, एक त्वचा विकार है जिसमें शरीर के कुछ हिस्सों में मेलानिन का निर्माण रुक जाता है, जिससे वहां की त्वचा सफेद पड़ जाती है। यह बीमारी संक्रामक नहीं होती, लेकिन मानसिक और सामाजिक दृष्टि से व्यक्ति को परेशानी में डाल सकती है। अक्सर मरीज और उनके परिवारजन यह समझ नहीं पाते कि सफेद दाग का इलाज एलोपैथी से कराएं या आयुर्वेद से। विश्व विटिलिगो डे (World Vitiligo day) हर साल 25 जून को मनाया जाता है ताकि सफेद दाग के बारे में लोगों को लोगों को जागरुक किया जा सके और जरूरी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए। आज हम आयुर्वेदिक डॉक्टर और डाइट एक्सपर्ट डॉ अंजना कालिया से खास बातचीत कर आपको बताएंगे कि सफेद दाग का इलाज एलोपैथी में संभव है या आयुर्वेद में।
एलोपैथी में सफेद दाग के इलाज के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। सबसे पहले, डॉक्टर रोग की गंभीरता और फैलाव के अनुसार उपचार की योजना बनाते हैं। टॉपिकल स्टेरॉइड्स, कैल्सीन्यूरिन इनहिबिटर्स और डिपिग्मेंटेशन थेरेपी जैसी विधियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा फोटोथेरेपी एक प्रभावशाली तरीका होता है, जिसमें प्रभावित हिस्सों पर विशेष प्रकाश डाला जाता है ताकि मेलानिन का पुनर्निर्माण हो सके। यदि दाग बहुत अधिक और जिद्दी हैं, तो कुछ मामलों में सर्जिकल तकनीक, जैसे स्किन ग्राफ्टिंग, भी अपनाई जाती है। एलोपैथी की खासियत यह है कि यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और जल्दी असर देने वाली होती है, लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट्स जैसे त्वचा पतली होना या जलन भी हो सकते हैं।
आयुर्वेद सफेद दाग को 'श्वित्र' या 'किलास' के नाम से जानता है और इसे त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में सफेद दाग के लिए बाखुची, नीम, गिलोय, हरिद्रा, और मंजिष्ठा जैसी जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक उपचार में शोधन, आहार-विहार का संतुलन, और औषधियों के साथ योग व ध्यान को भी शामिल किया जाता है। यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है लेकिन शरीर पर धीरे-धीरे सकारात्मक असर डालती है। आयुर्वेद यह मानता है कि जब शरीर अंदर से संतुलित होगा तभी रोग की जड़ खत्म हो पाएगी।
यह निर्णय व्यक्ति की स्थिति, रोग की गंभीरता और उसकी जीवनशैली पर निर्भर करता है। यदि रोग शुरुआती अवस्था में है और तेजी से फैल रहा है, तो एलोपैथी से तुरंत इलाज शुरू करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं, लंबे समय तक समग्र सुधार के लिए आयुर्वेदिक उपचार सहायक हो सकता है, विशेषकर तब जब रोग बहुत पुराने स्तर पर न हो। हालांकि कुछ मामलों में दोनों पद्धतियों को संतुलित रूप से अपनाना भी अच्छा विकल्प साबित हो सकता है— जैसे एलोपैथी से दाग की तीव्रता कम करना और आयुर्वेद से शरीर का संतुलन बहाल करना।
सफेद दाग का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए धैर्य, अनुशासन और समय की आवश्यकता होती है। चाहे आप एलोपैथी चुनें या आयुर्वेद, एक कुशल और अनुभवी चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। रोग को छुपाने की बजाय समय रहते उपचार लेना, सही जानकारी रखना और समाजिक मिथकों से दूर रहना ही सबसे बड़ी चिकित्सा है।
FAQs
नहीं, यह छूने से नहीं फैलती है और न ही यह कोई बीमारी है।
एलोपैथी में सफेद दाग के इलाज में दवाएं, प्रकाश चिकित्सा, और कुछ मामलों में सर्जरी शामिल होती हैं।
हां, आयुर्वेद में सफेद दाग का इलाज है।
आप कुछ घरेलू नुस्खे अपना सकते हैं लेकिन इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा।