
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : December 2, 2025 6:27 PM IST
Medically Verified By: Dr Brij Vallabh Sharma
Pollution Or Diabetes Mai Kya Link Hai: दिल्ली में जिस तरह पॉल्यूशन बढ़ रहा है, हर किसी के लिए सांस लेना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो गया है। ऐसे में नई-नई बीमारियां पैदा हो रही वो अलग, जो पुराने हैं वह हर उम्र के लोगों को इफेक्ट कर रही हैं। इस पॉल्यूटेड हवा में मौजूद बारीक कण जिन्हें PM2.5 कहा जाता है, यह हमारे शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को तेजी से बढ़ाने का काम कर रहे हैं। जिसका नतीजा यह देखने को मिल रहा है कि किसी भी उम्र के व्यक्ति का शुगर लेवल बढ़ जा रहा है और उसे डायबिटीज होने का चांस बहुत ज्यादा हो रहा है।
इस विषय पर अधिक जानकारी लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल जयपुर, सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर ब्रिज वल्लभ शर्मा से बातचीत की। उन्होंने प्रदूषण और बढ़ते इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध बताया है। 5 बिंदुओं से उन्होंने इसे विस्तार से बताया ताकि आपको समझने में कोई परेशानी न हो और सटीक जानकारी फी मिल जाए। तो आइए बिना देर किए डॉक्टर की सलाह जानते हैं।
शहरों की जहरीली हवा अब सिर्फ फेफड़ों को नहीं, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, PM2.5 और अन्य प्रदूषण शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस में बदलता है, जो टाइप-2 डायबिटीज के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
हवा में मौजूद धुआं, धूल और औद्योगिक कण शरीर में एक ऐसी ‘इंफ्लेमेटरी चेन रिएक्शन’ शुरू कर देते हैं, जिसमें कोशिकाएं लगातार तनाव में रहती हैं। यह तनाव इंसुलिन के संकेतोंको कमजोर कर देता है। नतीजा, खून में ग्लूकोज जमा होने लगता है और शरीर उसे ऊर्जा में बदल नहीं पाता।
विज्ञान बताता है कि प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों पर ही सीमित नहीं है। जहरीले कण वसा कोशिकाओं के मेटाबॉलिज्म को अस्थिर कर देते हैं, जिससे इंसुलिन की क्षमता और घटती है। साथ ही, ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस अग्नाशय की बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, यही कोशिकाएं इंसुलिन बनाती हैं। इस दोहरी मार के कारण डायबिटीज का खतराऔर बढ़ जाता है।
दिल्ली, लखनऊ, पटना और कोलकाता जैसे महानगरों में प्रदूषण का स्तर लगातार उच्च रहता है। यह स्थिति उन लोगों के लिए अधिक खतरनाक है जो पहले से डायबिटीज के जोखिम में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के कारण युवाओं में भी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है।
प्रदूषण पूरी तरह रोकना आसान नहीं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर कुछ कदम असरदार हो सकते हैं। उच्च प्रदूषण वाले दिनों में N95 मास्क उपयोगी है। सुबह के समय भारी एक्सरसाइज करने से बचना बेहतर होता है क्योंकि उस समय प्रदूषण अधिक होता है। घर में एयर प्यूरीफायर लगाना, खिड़कियाँ समयबद्ध खोलना और प्रदूषण-केंद्रित मौसम ऐप्स पर नजर रखना स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
इस बढ़ते खतरे के बीच एयर क्वालिटी को सिर्फ मौसम की खबर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य चेतावनी माना जा रहा है। हवा में मौजूद अदृश्य कण यह याद दिलाते हैं कि शहरों की धुंध अब हमारे शरीर की रसायन व्यवस्था को भी चुनौती दे रही है और डायबिटीज जैसे रोगों को और जटिल बना रही है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।