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हवा में फैला प्रदूषण आपके दिमाग को बना रहा कमजोर! दूसरे अंगों के मुकाबले 8 गुना तक दिमाग होता है प्रभावित

प्रदूषित हवा में सांस लेने से आपके फेफड़ों से दिमाग तक होने वाले रक्त प्रवाह में ऐसे जहरीले तत्व मौजूद होते हैं, जो दिमागी विकार और न्यूरोलॉजिकल क्षति का कारण बन सकते हैं।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 22, 2022 1:31 PM IST

मौजूदा वक्त में बहुत सारे लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हैं, जिसमें कोई दो राय नहीं लेकिन क्या आप जानते हैं बाहर की हवा आपके दिमागी स्वास्थ्य को बिगाड़ने का काम कर रही है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक नए अध्ययन में ये सामने आया है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने से आपके फेफड़ों से दिमाग तक होने वाले रक्त प्रवाह में ऐसे जहरीले तत्व मौजूद होते हैं, जो दिमागी विकार और न्यूरोलॉजिकल क्षति का कारण बन सकते हैं। आइए जानते हैं क्या कहती है स्टडी।

दिमाग में ज्यादा देर तक रहते हैं तत्व

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि वायु प्रदूषण पार्किंसन, अल्जाइमर और डिमेंशिया सहित कई गंभीर न्यूरोलॉजिक्ल विकार के कारण अस्पताल में भर्ती होने के खतरे से जुड़ा हुआ है। इसी दिशा में चीन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पाया है कि ब्लड सर्कुलेशन के माध्यम से सांस के जरिए शरीर के अंदर जाने वाले सूक्ष्म तत्व हमारे दिमाग में दूसरे मेटाबॉलिक अंगों के मुकाबले ज्यादा वक्त तक रहते हैं।

कई न्यूरो विकार का कारण है वायु प्रदूषण

ये अध्ययन ईमोरी यूनिवर्सिटी के रॉलिंस स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मैलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में किया गया था। ये अध्ययन अपने आप में पहला ऐसा राष्ट्रीयव्यापी अध्ययन है, जिसमें पीएम2.5 प्रदूषक तत्व और न्यूरोडिजेनेरेटिव रोगों के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण और न्यूरोलॉजिक्ल विकारों पर हुए पिछले कई अध्ययनों से प्राप्त डेटा की तुलना की। वैज्ञानिकों ने खुलासा किया कि उन्होंने दिमागी विकार का अनुभव करने वाले रोगियों के मस्तिष्कमेरु द्रव्य (cerebrospinal fluids) से ढेर सारे सूक्ष्म तत्व पाए हैं, जो ये दर्शाते हैं कि ये तत्व हमारे दिमाग में जाकर ठहर जाते हैं, जो दिमागी विकार का कारण बनते हैं।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम की प्रोफेसर और अध्ययन की सह-लेखक ईसयुल्ट लिंच का कहना है कि केंद्रीय तंत्रिका तंत्रपर हवा में मौजूद सूक्ष्म तत्वों के हानिकारक प्रभावों को लेकर हमारे ज्ञान में अंतर है। ये अध्ययन सांस के जरिए शरीर में जाने वाले तत्वों पर नया प्रकाश डालने का काम करता है और ये बताता है कि कैसे ये हमारे शरीर में घूमते रहते हैं।

फेफड़ों से दिमाग में जाते हैं तत्व

उन्होंने कहा कि ये डेटा बताते हैं कि रक्त प्रवाह के माध्यम से हमारे फेफड़ों से दिमाग तक की यात्रा करने वाले सूक्ष्म तत्वों की संख्या 8 गुना तक बढ़ जाती है, खासकर सीधे नाक से माध्यम से सांस लेने पर। ये अध्ययन वायु प्रदूषण और इस तरह के तत्वों के हानिकारक प्रभाव के बीच संबंधों के प्रति नए सबूतों को जोड़ता है।

सांस लेने से भी शरीर में जाते हैं ये तत्व

वैज्ञानिकों की टीम ने ये पाया है कि सांस लेने के माध्यम से शरीर में जाने वाले तत्व हमारे रक्त प्रवाह में प्रवेश करते हैं और दिमाग तक पहुंचते हैं, जिसकी वजह से दिमाग और उसके आस-पास के ऊत्तकों को नुकसान पहुंचता है। एक बार जब ये दिमाग तक पहुंच जाते हैं तो इन्हें साफ करना मुश्किल हो जाता है और ये दूसरे अंगों के मुकाबले हमारे दिमाग में ज्यादा देर तक बने रहते हैं।