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people who have suffered any weather-related calamity have a 50 per cent more chance of developing mental health conditions compared to those suffering from debt, social disadvantage and poor physical health.
वायु प्रदूषण (Air pollution hazards) दुनिया भर में सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। इससे श्वसन और फेफड़ों संबंधी बीमारियों में इजाफा हो रहा है। अमेरिका की शिकागो यूनवर्सिटी में हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि वायु प्रदूषण (Air pollution hazards) सिर्फ श्वसन संबंधी समस्याओं ही नहीं, बल्कि मानसिक बीमारियों को भी बढ़ा देता है। शोध में पता चला है जो लोग वायु प्रदूषण के ज्यादा संपर्क में आते हैं,उनमें डिप्रेशन और बाइपोलर डिसऑर्डर का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में बढ़ जाता है।
अमेरिका की पीएलओएस बायोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार वायु प्रदूषण (Air pollution hazards) कई तरह की बीमारियों का कारण बनता है। शोध के प्रमुख लेखक और बायोलॉजिस्ट आतिफ खान कहते हैं, मानसिक बीमारियां, चाहें वह डिप्रेशन हो या बाइपोलर डिसऑर्डर, सभी आप के लिए आर्थिक और सामाजिक स्तर की समस्याएं खड़ी कर देती हैं।
पर इनका कारण वातावरण में फैला प्रदूषण (Air pollution hazards) है। खासतौर से वायु प्रदूषण। अपने शोध के आधार पर वे आगे कहते हैं कि अमेरिका और डेनमार्क पर किए गए हमारे शोध में यह बात सामने आई है कि जो लोग अपने जीवन के शुरूआती वर्षों में वायु प्रदूषण (Air pollution hazards) के संपर्क में आए, उनमें मानसिक विकारों का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
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