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वायु प्रदूषण की वजह से लोग हो रहे इन मानसिक रोगों के शिकार.
वायु प्रदूषण की वजह से आने वाले समय में बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है. हाल ही में PLOS Biology में प्रकाशित एक शोध के अनुसार वायु प्रदूषण मेंटल हेल्थ (air pollution effects on mental health) पर असर डाल रहा है. अध्ययन में आए परिणाम बताते हैं कि हवा, पानी और खान-पान की चीजों में पाये जाने वाले प्रदूषण वाले कण मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहे हैं. वायु प्रदुषण की वजह से डिप्रेशन, पर्सनैलिटी डिसॉर्डर, सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसॉर्डर का खतरा बढ़ गया है. वैसे तो यह शोध अमेरीका और डेनमार्क में हुआ है, जहां भारत की तुलना में कम वायु प्रदूषण है. भारत में 10 से ज्यादा ऐसे शहर हैं जो दुनिया में सबसे प्रदुषित शहर के तौर पर जाने जाते हैं.
शोध करने वाले लोगों ने प्रदुषित इलाके में रहने वाले लोगों पर शोध किया था. शोध में जो खतरनाक बात सामने आयी है, वो यह है कि वायु प्रदुषण में पाये जाने वाले खतरनाक रसायन हवा से पानी, खाने-पीने के सामानों में पहुंच रहे हैं.
खाने-पीने और हवा से जो रसायन शरीर में जाते हैं, वो दिमाग की नसों में सूजन पैदा कर देते हैं. दिमाग की नसों में सूजन की वजह से मानसिक शिथिलता और कई तरह के मानसिक रोग का खतरा बढ़ जाता है.
शोध के अनुसार हाल के वर्षों में मानसिक रोगों की वजह वायु प्रदूषण ही है. पहले की स्थिति ऐसी थी लोगों को अनुवांशिक कारणों से मानसिक रोग होते थे. इसके अलावा कुछ लोगों में अन्य स्वास्थ्य कारणों से मानसिक रोग होता था.
भारत में नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे 2015-16 के अनुसार 18 साल से ऊपर के लगभग 11 प्रतिशत भारतीय मानसिक रोगों के शिकार हैं. भारत में मानसिक रोगों के इलाज और उनकी देखभाल के लिए व्यवस्थाएं बहुत कम हैं.
प्रदूषण की वजह से जीवन घटने के आंकड़े भी आने लगे हैं. इस साल जून में हिंदू बिजनेस लाइन में छपे एक लेख के अनुसार भारत में प्रदूषण की वजह से लोगों की औसत आयु लगभग 2.6 साल कम हो गयी है.